उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव में अभी करीब छह महीने बाकी हैं, लेकिन राज्य की सियासत में मंदिरों को लेकर घमासान अभी से तेज हो गया है। इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुई एक नियुक्ति ने विपक्षी खेमे की पूरी रणनीति को उलझा दिया है। ट्रस्ट ने अपने पहले चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर यानी सीईओ के तौर पर पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को चुना है, और यह फैसला विपक्ष के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा।
मंदिरों की सियासत क्यों बनी 2027 चुनाव का पहला मुद्दा
उत्तर प्रदेश में चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं होती, बल्कि यहां हर चुनाव के साथ विचारधारा की भी बड़ी जंग जुड़ी होती है। इस बार भी वोटों की गिनती शुरू होने से बहुत पहले ही मंदिर के दरवाजे पर सियासी शंखनाद हो चुका है। पहले राम मंदिर का मुद्दा केंद्र में था, अब मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, दोनों ही अपने-अपने तरीके से भगवान और आस्था का जिक्र कर लोगों तक सीधा राजनीतिक संदेश पहुंचाने में जुटे हैं।
कौन हैं जितेंद्र मिश्रा, जिन्हें मिली राम मंदिर की कमान
राम मंदिर ट्रस्ट की एक बैठक में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई। मिश्रा हाल के दिनों में ऑपरेशन सिंदूर में निभाई गई भूमिका को लेकर चर्चा में रहे थे। इससे पहले कारगिल युद्ध के समय वे वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर तैनात थे और मिराज 2000 लड़ाकू विमानों की उस टुकड़ी का हिस्सा थे, जिसने दुश्मन ठिकानों पर बमबारी को अंजाम दिया था। उनका वायुसेना का कार्यकाल इसी साल अप्रैल की 30 तारीख को पूरा हुआ था। ट्रस्ट ने उन्हें ठीक उसी दौर में यह जिम्मेदारी सौंपी, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर विवाद अपने चरम पर था।
दरअसल इंडी गठबंधन के नेता चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ी को यूपी चुनाव में मोदी और योगी सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लिया गया यह फैसला उस मुद्दे की धार को काफी हद तक कुंद कर गया है। एक ऐसे सैन्य अधिकारी को मंदिर ट्रस्ट का प्रशासनिक प्रमुख बनाना, जिसकी छवि पाकिस्तान के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ी है, विपक्ष के आरोपों को कमजोर करता दिख रहा है। एनडीए अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरी ताकत के साथ यूपी के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
मथुरा से योगी का संदेश, अब कृष्ण जन्मभूमि की बारी
राम मंदिर के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत का अगला पड़ाव मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि बनती दिख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा पहुंचकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा,
सनातन को मिटाने वाले खुद मिट्टी में मिल गए।योगी के भाषणों में अब भगवान राम के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे भी गूंजने लगे हैं। चुनावी साल में मुख्यमंत्री हर मंच से यह कोशिश करते दिख रहे हैं कि आस्था से जुड़ा यह मुद्दा सीधे जनता तक पहुंचे और साथ ही मथुरा जन्मभूमि के सवाल पर समाजवादी पार्टी को घेरा भी जा सके।
अखिलेश का पलटवार, सैफई में शिव मंदिर का ऐलान
योगी के मथुरा वाले दांव के जवाब में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी पीछे नहीं रहे। वे सहारनपुर पहुंचे और वहां एक शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसी दौरान उन्होंने बताया कि सैफई में भी एक भव्य शिव मंदिर बनवाया जा रहा है। अखिलेश ने कहा,
भगवान शिव सबके आराध्य हैं, यानी भगवान राम और भगवान कृष्ण के भी।इस बयान के जरिए उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि आस्था के मामले में उनकी पार्टी किसी से पीछे नहीं है, चाहे मुद्दा भगवान राम का हो या भगवान कृष्ण का।
बीजेपी बनाम सपा, धर्म को लेकर सियासी जंग
भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से मंदिर से जुड़े मुद्दों को अपनी सांस्कृतिक राजनीति का मुख्य आधार बनाती रही है, और अब वही पार्टी अखिलेश यादव के मंदिर वाले बयानों को शक की नजर से देख रही है। बीजेपी नेताओं का सवाल है कि अगर समाजवादी पार्टी भगवान और आस्था की बात कर रही है, तो फिर मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि को लेकर उसका रुख साफ क्यों नहीं है। इसके जवाब में समाजवादी पार्टी भी पलटवार करते हुए यह आरोप लगा रही है कि भाजपा धर्म की आड़ में सियासत कर रही है। इस तरह मंदिर बनाम मंदिर की यह लड़ाई अब सीधे-सीधे बीजेपी और सपा के बीच बयानबाजी की जंग में बदल चुकी है।
सहारनपुर में बुलडोजर एक्शन से नया बवाल
मंदिर की सियासत अभी थमी भी नहीं थी कि शनिवार को सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया। प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत पहले ही इस निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध करार दे चुकी थी और मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी कोर्ट खारिज कर चुका था। इसी अदालती आदेश के आधार पर यह कार्रवाई की गई। लेकिन बुलडोजर चलते ही उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया तूफान खड़ा हो गया।
सांसद इकरा हसन नजरबंद, अखिलेश ने भी दी प्रतिक्रिया
कैराना से सांसद इकरा हसन घटनास्थल यानी सहारनपुर की तरफ जा रही थीं, लेकिन रास्ते में शामली में ही उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया। इस पर नाराजगी जताते हुए इकरा हसन ने कहा,
हम कोर्ट तक जाएंगे, हमारा अधिकार है।उन्होंने आगे यह भी कहा कि जिस तरह यह कार्रवाई की गई है, उससे साफ लगता है कि प्रदेश में संवैधानिक प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था को दरकिनार करके फैसले लिए जा रहे हैं, और अगर हर फैसला सरकार के इशारे पर ही होना है तो अदालतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस बुलडोजर कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सौहार्द बनाए रखना किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, और सच्चा सनातनी कभी किसी दूसरे धर्म का अनादर नहीं करता, ठीक वैसे ही जैसे सच्चा हिंदू भी दूसरों के प्रति अपमानजनक रवैया नहीं अपनाता।
आगे यूपी की सियासत में क्या होगा
कुल मिलाकर तस्वीर यही बताती है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो लकीर खींची है, उसी पर अब अखिलेश यादव को भी चलना पड़ रहा है। एक तरफ राम मंदिर ट्रस्ट में हुई नियुक्ति ने चढ़ावे के विवाद को कमजोर कर दिया है, तो दूसरी तरफ मथुरा और सैफई के मंदिरों को लेकर बीजेपी और सपा के बीच होड़ तेज हो गई है। इसी बीच सहारनपुर की बुलडोजर कार्रवाई ने माहौल को और गर्मा दिया है। 2027 का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएगा, आस्था और मंदिर से जुड़े ये मुद्दे यूपी की सियासी बहस में और बड़ी जगह घेरते नजर आ सकते हैं।


















