नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' रिलीज के बाद से लगातार सुर्खियों में है, लेकिन अब वजह सिर्फ इसकी कहानी या दर्शकों का प्यार नहीं, बल्कि इससे जुड़ी सियासी बयानबाजी भी बन गई है. 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म ने कम बजट में बनने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर ऐसी कमाई की है जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों को थी. फिल्म को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच बयानों का सिलसिला भी शुरू हो गया है, और कुछ नेताओं ने साफ आरोप लगाया है कि इसके सहारे धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है.
बाबा के गांव से मिला भरपूर प्यार
सियासी बहस से अलग हटकर देखें तो नीम करौली बाबा के गांव और उनसे जुड़े लोगों की ओर से फिल्म को दिल खोलकर सराहा जा रहा है. बाबा को करीब से जानने वाले लोगों की यह सकारात्मक प्रतिक्रिया भी उन वजहों में शामिल है जिसने कम बजट के बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर आगे बढ़ाया है. दिलचस्प यह है कि जिस वक्त फिल्म बाबा से जुड़े लोगों का दिल जीत रही है, ठीक उसी वक्त कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच इसे लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है.
कांग्रेस का हमला: चुनाव भी राम मंदिर के नाम पर
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने फिल्म को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी लगातार धर्म को राजनीति से जोड़ती आई है. अल्वी ने कहा, "जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, तब से वह धर्म को राजनीति में ले आई है." उनका कहना था कि हर चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़ा जाता रहा है और अब 'हनुमान अंश' जैसी फिल्मों के जरिए भी लोगों की धार्मिक आस्था को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है. अल्वी ने आगे कहा कि आस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करना और उसके जरिए लोगों के मन पर असर डालना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक ऐसी फिल्मों का सहारा लेकर धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है.
राम कदम का पलटवार: हर बात विवाद नहीं होनी चाहिए
भाजपा नेता राम कदम ने इन आरोपों पर बिल्कुल अलग रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि नीम करौली बाबा को देश भर में बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं और उन्हें हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है. राम कदम ने भी यह नहीं बताया कि उन्होंने फिल्म देखी है या नहीं, लेकिन उनका कहना था कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले फिल्म का विषय समझना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे को विवाद बना देना सही तरीका नहीं है और किसी भी बात पर चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए, न कि जल्दबाजी में लगाए गए आरोपों के आधार पर.
कांग्रेस सांसद की अपील: पहले देखें, फिर राय बनाएं
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस विवाद पर संतुलित रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म पर टिप्पणी करने से पहले उसे देखना जरूरी है और बिना देखे उसके बारे में राय बना लेना ठीक नहीं. मनोज कुमार ने फिल्मकारों से भी अपील की कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और धर्मनिरपेक्ष देश में सिनेमा बनाते वक्त अलग-अलग समुदायों की भावनाओं का खयाल रखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक फिल्मों को समाज को आपस में जोड़ने का जरिया बनना चाहिए, न कि किसी तरह के बंटवारे की वजह.
सहायक निर्देशक से मुख्य किरदार तक का सफर
'हनुमान अंश' की कहानी विशाल चतुर्वेदी ने लिखी है और फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने ही संभाला है. फिल्म में नीम करौली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है, और उनकी यह भूमिका मिलने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. शोभिनव सत्या शुरुआत में फिल्म से सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़े थे, लेकिन जब मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता की तबीयत खराब हो गई, तो उन्हें बाबा की भूमिका निभाने का मौका मिल गया. निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इसके बाद उनका लंबा ऑडिशन लिया और फिर उन्हें फिल्म की मुख्य भूमिका के लिए चुना. फिल्म की यह अप्रत्याशित सफलता और अब इससे जुड़ा सियासी विवाद, दोनों ही इसे लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं.



















