दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को उन्नीस दिन पूरे हो चुके हैं, और ठीक इसी बीच कॉकरोच पार्टी के आंदोलन के मंच पर अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी ने पूरी सियासत गरमा दी है. बड़े अरमानों के साथ शुरू हुए इस आंदोलन को लेकर अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यह अनशन खत्म कब और कैसे होगा, लेकिन केजरीवाल के मंच पर पहुंचते ही इस पूरी कहानी में एक नया मोड़ आ गया. इससे पहले भी कॉकरोच पार्टी चलाने वाले अभिजीत दीपके और उनकी टीम को केजरीवाल की टीम से जोड़कर देखा जाता रहा है, मगर अब तक केजरीवाल खुद इस मंच पर खुलकर सामने नहीं आए थे. पहली बार उन्होंने इस आंदोलन का हिस्सा बनकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, और उनके आते ही मंच का पूरा माहौल बदल गया.
वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन, अदालत ने जताई चिंता
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बीते 19 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं. यह अनशन कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन के तहत चल रहा है. उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत ने चिंता जताई है. वहीं सरकार की ओर से आए पहले बयान में कहा गया कि डॉक्टर उनकी सेहत पर लगातार नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित इलाज दिया जाएगा. खुद सोनम वांगचुक ने अपनी हालत को लेकर कहा, "मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है कि मैं दो-चार दिन में मर जाऊं." इतने लंबे अनशन के बावजूद उनका यह बयान बताता है कि वे अभी भी अपने रुख पर कायम हैं, जबकि दूसरी तरफ अनशन को लेकर लगातार विपक्षी नेताओं से समर्थन की अपील की जा रही है.
केजरीवाल पहुंचे मंच पर, अभिजीत दीपके को लगाया गले
अरविंद केजरीवाल जब जंतर-मंतर पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने अभिजीत दीपके को गले लगाया. यह तस्वीर इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि अभिजीत दीपके पर लंबे समय से अरविंद केजरीवाल का करीबी होने के आरोप लगते रहे हैं और वे पहले आम आदमी पार्टी में भी काम कर चुके हैं. वहां मौजूद कॉकरोच पार्टी के कार्यकर्ता केजरीवाल को देखकर खुश हो गए. केजरीवाल को देखकर अभिजीत दीपके के चेहरे पर जो उत्साह और खुशी दिखी, वह उस दिन मंच पर पहुंचे बाकी नेताओं से मिलते वक्त नजर नहीं आई थी. उसी दिन डिंपल यादव और राकेश टिकैत भी वहां मौजूद थे, लेकिन तस्वीरों में साफ फर्क दिखता है कि केजरीवाल से मिलते ही अभिजीत दीपके किस तरह तुरंत मोबाइल पर वीडियो बनाने लगे और फिर संजय सिंह से भी गर्मजोशी से गले मिले.
क्या कॉकरोच आंदोलन बन गया है केजरीवाल की 'बी टीम'?
जब से कॉकरोच वालों का आंदोलन शुरू हुआ, तभी से यह चर्चा चलती रही है कि इसका पूरा तरीका जाना-पहचाना है, वही जंतर-मंतर, वही धरना-प्रदर्शन, वही भूख हड़ताल, वही अनशन, जो पहले खुद केजरीवाल अपनाते रहे हैं. यह भी कहा जाता रहा है कि आंदोलन चलाने वाले कई लोग कहीं ना कहीं केजरीवाल से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब तक केजरीवाल खुद कभी खुलकर सामने नहीं आए थे और कॉकरोच वालों के मंच पर नहीं गए थे. अब जब केजरीवाल खुद पहुंच गए और गर्मजोशी से गले मिले, तो लोग खुलकर कहने लगे हैं कि कॉकरोच वाले तो केजरीवाल की बी टीम जैसे नजर आ रहे हैं. जबकि आंदोलन शुरू होने के वक्त कॉकरोच पार्टी वालों ने ही यह दावा किया था कि वे अपने आंदोलन को राजनैतिक रंग नहीं देंगे और नेताओं को इससे दूर रखेंगे. केजरीवाल के मंच पर पहुंचते ही यह दावा भी सवालों के घेरे में आ गया.
डिंपल यादव, राकेश टिकैत से लेकर उमर अब्दुल्ला तक, समर्थन में उतरे नेता
जंतर-मंतर पर डिंपल यादव और राकेश टिकैत भी पहुंचे. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी समर्थन जताते हुए कहा, "सोनम वांगचुक के साथ अभी तक बातचीत करने की कोशिश नहीं की गई. अब आगे हुकूमत का क्या रवैया रहेगा, हम नहीं जानते." राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, "प्रधान जी कभी इस्तीफा नहीं देंगे, ना सरकार इनको कहेगी कि इस्तीफा दो." एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने भी वांगचुक के समर्थन में बयान देते हुए कहा, "वो सच के लिए, कुछ अच्छे के लिए लड़ रहे हैं. पर कोई सुन क्यों नहीं रहा?" वहीं सिंगर विशाल ददलानी ने अपील करते हुए कहा, "मेरा आपसे विनती है कि अनशन तोड़ दें. मेरी सरकार से विनती है कि उनकी बात सुन लें." इतने सारे नामी चेहरों का एक साथ समर्थन में उतरना बताता है कि यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय प्रदर्शन नहीं रह गया है.
केजरीवाल का विवादित बयान, वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की मांग
मंच से अरविंद केजरीवाल ने कहा, "कॉकरोच आंदोलन की बात सुन लो, सोनम वांगचुक की बात सुन लो. नहीं तो आज से 3 साल बाद आपका भी वही हाल होगा, जो 2014 में इनका हुआ था." इसके साथ ही केजरीवाल ने यह भी कह दिया कि सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बना देना चाहिए. इस बयान पर तुरंत सवाल उठने लगे. आलोचकों का कहना है कि जब दिल्ली में खुद आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब मनीष सिसोदिया की जगह सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जा सकता था. अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, तो वहां सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाकर दिखाया जा सकता है कि अगर नरेंद्र मोदी उन्हें शिक्षा मंत्री नहीं बना रहे, तो केजरीवाल खुद बनाकर दिखाएं और साबित करें कि वे कैसे एक कामयाब शिक्षा मंत्री साबित होंगे. केजरीवाल के इस बयान ने ही सबसे नया विवाद खड़ा कर दिया है.
कांग्रेस अलग-थलग, विपक्षी गठबंधन में दिखी दूरी
जहां इंडी गठबंधन के लगभग सभी सहयोगी दल कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में सक्रिय नजर आए, वहीं कांग्रेस इससे साफ दूरी बनाए हुए है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैराथन बैठक हुई थी, और उसके अगले दिन यानी गुरुवार को सोनिया गांधी ने भी अपनी अलग बैठक की. यह घटनाक्रम इशारा करता है कि कांग्रेस इस पूरे मामले में खुद को बाकी सहयोगियों से अलग रखते हुए अपनी अलग रणनीति पर काम कर रही है, जबकि बाकी इंडी गठबंधन के नेता एक-एक कर कॉकरोच आंदोलन के मंच पर पहुंचते जा रहे हैं.
राम मंदिर पर केजरीवाल की दोहरी लाइन पर सवाल
अरविंद केजरीवाल पर एक और सवाल यह उठाया जा रहा है कि जो नेता आजकल राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं, वही मंच पर उन लोगों को गले लगा रहे हैं जिन पर राम का अपमान करने वालों के लिए तालियां बजाने का आरोप लगता रहा है. आलोचकों का कहना है कि केजरीवाल की यह दोहरी लाइन उनके कॉकरोच आंदोलन के मंच पर खुलकर पहुंचने के बाद और साफ नजर आने लगी है.
कुल मिलाकर, बड़े अरमानों के साथ शुरू हुआ कॉकरोच पार्टी का यह आंदोलन अब खुद कई सवालों में घिर गया है. एक तरफ सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर अदालत और सरकार दोनों की नजरें टिकी हैं, तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल की खुलकर हुई एंट्री ने इस पूरी कहानी को और उलझा दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अनशन आखिर किस मोड़ पर जाकर खत्म होता है.





















