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जयपुर में छठे सत्र के शुरू होते ही विधानसभा में घमासान: मुख्य गेट रोके जाने के दावे और राष्ट्रगीत पर तीखी तकरारराजनीति
20 अग॰ 2026, 6:47 pm (22 दिन पहले)· 3

जयपुर में छठे सत्र के शुरू होते ही विधानसभा में घमासान: मुख्य गेट रोके जाने के दावे और राष्ट्रगीत पर तीखी तकरार

राजस्थान विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी पर बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्ष ने मुख्य प्रवेश द्वार पर रोके जाने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की घोषणा की है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रगीत के गायन से बचने का प्रयास बताया है।

जयपुर में राजस्थान विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन ही कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक घमासान छिड़ गया। कांग्रेस विधायक दल के सदन की कार्यवाही में हिस्सा न लेने पर राज्य के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे सदन की गरिमा और परंपराओं से जुड़ा मुद्दा बनाया। सत्ता पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि कांग्रेस के विधायक राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन में शामिल होने से बचने के लिए जानबूझकर सदन में नहीं आए। इसके विपरीत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों का यह कोई बहिष्कार नहीं था, बल्कि उन्हें विधानसभा परिसर के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया गया था।

प्रवेश द्वार पर पाबंदी और विशेषाधिकार हनन के नोटिस की तैयारी

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के आरोपों का करारा जवाब देते हुए पूरा वाकया बयां किया। उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस के तमाम विधायक विधानसभा पहुंचे, तो उन्हें उस मुख्य गेट से अंदर जाने से रोक दिया गया जिसका उपयोग जनप्रतिनिधि सामान्य रूप से परिसर में दाखिल होने के लिए करते आए हैं। टीकाराम जूली ने कहा कि शुरुआत में विधायकों को यह समझ नहीं आया कि अचानक मुख्य द्वार क्यों बंद किया गया है। लेकिन बाद में जब सत्ता पक्ष ने सदन के भीतर कांग्रेस पर वंदे मातरम् के गायन से बचने का आरोप लगाना शुरू किया, तो पूरी स्थिति स्पष्ट हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है, ताकि विपक्ष को पहले रोका जाए और फिर उस पर राष्ट्रगीत के अपमान का झूठा आरोप मढ़ा जा सके।

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टीकाराम जूली ने स्पष्ट किया कि यदि मुख्य प्रवेश द्वार को बंद न किया जाता, तो सभी कांग्रेस विधायक समय पर सदन में अपनी सीटों पर मौजूद रहते। जनप्रतिनिधियों को विधानसभा में आने से रोकने को लोकतंत्र में एक बेहद गंभीर मामला बताते हुए उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस विधायक इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश करेंगे।

सत्ता पक्ष का पलटवार और सर्वदलीय बैठक का हवाला

विपक्ष की गैरमौजूदगी पर हमला बोलते हुए भाजपा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष के पास अपनी बात रखने का पूरा अवसर होता है। यदि विपक्ष को राज्य सरकार की नीतियों या कामकाज के खिलाफ कोई शिकायत या मुद्दा उठाना था, तो उसके लिए सदन के पटल से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती थी। उन्होंने तंज कसते हुए टिप्पणी की कि शायद कांग्रेस के प्रतिनिधि वंदे मातरम् के गायन में भागीदारी से बचना चाहते थे और इसी वजह से उन्होंने सदन की कार्यवाही से दूरी बनाई।

इसी क्रम में संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने भी विपक्ष के इस रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने याद दिलाया कि सत्र का शुभारंभ होने से ठीक पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। उस बैठक में विधानसभा की स्थापित परंपराओं का सम्मान करने और सदन की कार्यवाहियों में सक्रिय रूप से भाग लेने पर सर्वसम्मति बनी थी। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय सहमति के बावजूद बिना किसी पूर्व जानकारी के पूरे विपक्ष का सदन में उपस्थित न होना बिल्कुल अनुचित है। जोगाराम पटेल ने विपक्ष के इस कदम को "लोकतंत्र की हत्या" करार दिया।

राष्ट्रगीत के सम्मान का इतिहास और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दे

राष्ट्रगीत के गायन से भागने के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के दौर से ही कांग्रेस के तमाम अधिवेशनों, सम्मेलनों और औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य रूप से होता रहा है। ऐसे में कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान या उससे बचने का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार और गलत है।

नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की जनता वंदे मातरम् जैसे संवेदनशील विषय पर किसी तरह का राजनीतिक विवाद नहीं चाहती। जनता चाहती है कि विधानसभा में शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे अति आवश्यक मुद्दों पर विस्तार से सार्थक चर्चा हो। उन्होंने सरकार से इन बुनियादी सवालों पर जवाब देने की मांग की और कहा कि विधानसभा का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों और मीडिया पर पाबंदियों का आरोप

सरकार की कार्यशैली पर हमला जारी रखते हुए टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि राज्य में जनप्रतिनिधियों और मीडिया की स्वतंत्रता पर लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी कमियों, प्रशासनिक विफलताओं और कथित भ्रष्टाचार को उजागर होने से रोकने के लिए हर संभव हथकंडे अपना रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधायकों को पहले सरकारी स्कूलों में जाने से रोका गया और अब खुद विधानसभा पहुंचने पर रोक लगा दी गई है। जूली ने सरकार की इस नीति को "पाप ढकने का ढक्कन" बताया और मांग की कि जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को सीमित करने वाले ऐसे सभी नियमों और पाबंदियों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष की पीड़ा और पहले दिन रखे गए दो महत्वपूर्ण विधेयक

सदन के भीतर विपक्ष की खाली पड़ी सीटों को देखकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता से जुड़ी समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सदन के भीतर उठाना विपक्ष का न केवल अधिकार है, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन का बहिष्कार करने या इससे बाहर रहने के बजाय सदस्यों को अपनी बात सदन के पटल पर रखनी चाहिए। उन्होंने सभी सदस्यों से कार्यवाही में शामिल होने की अपील की ताकि उठाए गए मुद्दों पर सत्ता पक्ष संज्ञान ले सके और सरकार की ओर से अधिकारिक जवाब दिया जा सके।

राजनीतिक तनातनी के बीच छठे सत्र के पहले ही दिन सदन की मेज पर दो महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए गए। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक, 2026 सदन में प्रस्तुत किया। वहीं, संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 को पटल पर रखा। इसके बाद सदन में दिवंगत आत्माओं के प्रति शोकाभिव्यक्ति की गई और कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

आगामी दिनों में टकराव बढ़ने के आसार

विधानसभा के पहले ही दिन विपक्ष की अनुपस्थिति और आरोपों के दौर ने राज्य के राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष का स्पष्ट मानना है कि विपक्ष को सदन के अंदर आकर सरकार से तीखे सवाल पूछने चाहिए थे, जबकि विपक्ष का कहना है कि उसे संवैधानिक संस्था के भीतर प्रवेश करने से ही रोक दिया गया। अब जब कांग्रेस विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की तैयारी कर रही है, तब आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की पूरी संभावना है। इसके अलावा, आगामी दिनों में यूसीसी (UCC) समेत कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों तथा जनहित के मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विधानसभा में जोरदार तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।

सवाल-जवाब

राजस्थान विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन क्या विवाद हुआ?
सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस विधायकों के सदन में उपस्थित न होने पर भारी हंगामा हुआ, जहां विपक्ष ने मुख्य गेट बंद करने का आरोप लगाया और सत्ता पक्ष ने राष्ट्रगीत के बहिष्कार का दावा किया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में न पहुंचने पर क्या सफाई दी?
टीकाराम जूली ने कहा कि विधायकों को मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर आने से रोका गया, जिसके कारण वे समय पर सदन में नहीं पहुंच सके।
विशेषाधिकार हनन के नोटिस को लेकर कांग्रेस ने क्या घोषणा की है?
कांग्रेस विधायकों ने जनप्रतिनिधियों को विधानसभा में प्रवेश करने से रोके जाने के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की बात कही है।
सत्र के पहले दिन कौन-कौन से नए विधेयक सदन में पेश किए गए?
पहले दिन गीतांजलि ग्लोबल विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक, 2026 और राजस्थान वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 सदन के पटल पर रखे गए।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर क्या कहा?
विधानसभा अध्यक्ष ने खाली सीटों पर दुख जताते हुए विपक्ष से सदन के भीतर रहकर जनहित के मुद्दे उठाने और कार्यवाही में भाग लेने की अपील की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·21 दिन पहले

राजस्थान विधानसभा के पहले ही दिन इस तरह के गतिरोध से राज्य के व्यावसायिक माहौल और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। राजनीतिक स्थिरता और विधायी प्रक्रिया में सुचारू कामकाज निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद अहम होते हैं। यदि इस प्रकार का टकराव जारी रहा, तो नीतिगत फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

राजस्थान विधानसभा के इस घटनाक्रम से सत्र के शुरुआती दिनों में ही सत्ता और विपक्ष के बीच तल्खियां चरम पर पहुंच गई हैं। मुख्य द्वार पर रोक और राष्ट्रगीत के मुद्दे पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की विपक्ष की चेतावनी यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर कामकाज चलना बेहद मुश्किल होगा। जनता से जुड़े असली मुद्दों पर बहस के बजाय इस तरह के विवाद लोकतांत्रिक संवाद की दिशा को भटकाते हैं।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·21 दिन पहले

सदन में इस तरह के गतिरोध और तनावपूर्ण माहौल का सीधा असर जनप्रतिनिधियों के मानसिक स्वास्थ्य और विधायी कार्यकुशलता पर पड़ता है। जब शुरुआती दिनों में ही ऊर्जा ऐसे विवादों में खर्च होने लगे, तो स्वास्थ्य नीतियों, चिकित्सा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक कल्याण जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा की गुंजाइश काफी कम हो जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

राजस्थान विधानसभा के पहले ही दिन का यह गतिरोध राज्य के वित्तीय और विधायी एजेंडे पर नकारात्मक असर डाल सकता है। जब सदन में सत्ता और विपक्ष इस तरह के प्रशासनिक और प्रतीकात्मक विवादों में उलझ जाते हैं, तो नीतिगत चर्चाओं और बजट जैसे आर्थिक विषयों पर होने वाले मंथन की गति धीमी हो जाती है। यदि यह गतिरोध आगे भी जारी रहा, तो राज्य में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों और विकास संबंधी विधेयकों को पारित कराने में अनावश्यक देरी तय है, जिसका सीधा असर कारोबारी माहौल और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

विधानसभा के पहले ही दिन ऐसा प्रशासनिक गतिरोध और विशेषाधिकार हनन के नोटिस की चेतावनी सीधे तौर पर विधायी प्रक्रिया की सुरक्षा और सदन की मर्यादा पर सवाल खड़े करती है। जब प्रवेश द्वारों पर पाबंदी और राष्ट्रगीत जैसे प्रतीकात्मक मुद्दों पर आमने-सामने की जंग छिड़ जाए, तो सुरक्षा और सदन के प्रबंधन की आंतरिक व्यवस्था पर गंभीर जाँच की आवश्यकता होती है। यदि इस मामले की विधिवत संसदीय जाँच नहीं हुई, तो ऐसे विवाद भविष्य की बैठकों की सुरक्षा, सुचारू संचालन और लोकहित के जरूरी विधेयकों को पारित करने की गति को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।

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