झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के समर्थन में उतरे कोचिंग संचालकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राज्य का सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है। रांची नगर निगम ने शहर के 20 प्रमुख कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा दस्तावेज प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस प्रशासनिक कदम के तहत सभी संबंधित संस्थानों को वैध ट्रेड लाइसेंस तथा अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर NOC) प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई है। इस कार्रवाई के बाद से ही विपक्षी दलों और कोचिंग संचालकों ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर हमला बोल दिया है। उनका दावा है कि हालिया छात्र आंदोलन में छात्रों का साथ देने के कारण इन संस्थानों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक जांच है जो शहर में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए चलाई जा रही है।
रांची नगर निगम का नोटिस और सुरक्षा मानकों की जांच
नगर निगम की विशेष टीमों द्वारा रांची के विभिन्न व्यावसायिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में चलाए गए निरीक्षण अभियान के दौरान 20 कोचिंग सेंटरों में अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद निगम अधिकारियों ने इन संस्थानों को औपचारिक नोटिस जारी किए। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि तीन दिनों के भीतर वैध म्युनिसिपल ट्रेड लाइसेंस और फायर NOC जमा न करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कदम उठाए जाएंगे और उनके संचालन पर रोक लगाई जा सकती है। नागरिक प्रशासन ने तर्क दिया है कि रांची में बड़ी संख्या में शैक्षणिक केंद्र बिना किसी वैध अनुमति या अग्नि सुरक्षा उपायों के चल रहे हैं, जिससे वहां पढ़ने वाले हजारों युवाओं की जान जोखिम में रहती है। इसलिए यह जांच अभियान विद्यार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद आवश्यक है।
831 संस्थानों में से केवल 68 के पास है वैध ट्रेड लाइसेंस
नगर निगम द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रांची में लगभग 831 कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 68 शैक्षणिक संस्थानों के पास ही नगर निगम का वैध ट्रेड लाइसेंस उपलब्ध है। बाकी सैकड़ों केंद्र आवश्यक स्वीकृतियों के बिना ही चल रहे हैं। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच का यह दायरा केवल इन 20 नोटिस पाने वाले संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में शहर भर के अन्य कोचिंग केंद्रों और निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों की भी सघन जांच की जाएगी ताकि नियमों का पूर्ण पालन कराया जा सके।
छात्र आंदोलन और JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी का मुद्दा
रांची में पिछले कुछ समय से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और परीक्षा परिणामों में देरी को लेकर अभ्यर्थियों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख कोचिंग संस्थानों के संचालकों ने छात्रों का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने न केवल रैलियों और धरनों में हिस्सा लिया, बल्कि परीक्षार्थियों की मांगों को लेकर अपनी आवाज भी उठाई थी। अब जब उन्हीं संस्थानों पर नगर निगम का चाबुक चला है, तो यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह कार्रवाई आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी की प्रतिक्रिया स्वरूप की गई है।
भाजपा का हमला: आंदोलन कुचलने के लिए दी जा रही धमकी
प्रशासनिक कार्रवाई के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सोरेन सरकार पर सीधा हमला बोला। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्र आंदोलन को दबाने के लिए प्रतिशोध की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संचालकों ने छात्रों की जायज मांगों का समर्थन किया था, इसलिए सरकार उन्हें डराने और मानसिक दबाव बनाने का प्रयास कर रही है। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि अगर यह कार्रवाई केवल कागजी नियमों और लाइसेंस के पालन तक सीमित है, तो प्रशासन ने केवल उन्हीं संस्थानों को पहली सूची में क्यों चुना जो छात्र प्रदर्शनों में सबसे ज्यादा सक्रिय थे? पार्टी का आरोप है कि यह पूरी तरह से बदले की मंशा से की गई कार्रवाई है।
झामुमो और कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भाजपा के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि बिना ट्रेड लाइसेंस और फायर NOC के किसी भी संस्थान का संचालन कानूनन गलत है और प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह अवैध गतिविधियों पर रोक लगाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी राजनीतिक या छात्र आंदोलन में भाग लेने मात्र से किसी संस्थान को नागरिक नियमों और सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन की छूट मिल जानी चाहिए? झामुमो का कहना है कि नगर निगम पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहा है।
इसी क्रम में कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा के बयानों पर चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष की बौखलाहट साबित करती है कि कोचिंग संचालकों की इस आंदोलन में क्या भूमिका थी। कांग्रेस नेता का आरोप है कि भाजपा अब कोचिंग संचालकों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रही है और छात्र आंदोलन को भुनाने का प्रयास कर रही है।
कोचिंग संचालकों ने उठाया अचानक हुई कार्रवाई पर सवाल
दूसरी तरफ, प्रभावित कोचिंग संचालकों का मानना है कि नियमों का पालन अनिवार्य है और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन जिस तरह से आंदोलन समाप्त होते ही अचानक जांच और नोटिस की बाढ़ आई है, वह संदेह पैदा करती है। संचालकों के मुताबिक, अगर म्युनिसिपल लाइसेंस या अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्रों की ही जांच करनी थी, तो यह काम पहले भी नियमित तौर पर किया जा सकता था। आंदोलन के ठीक बाद शुरू हुई इस सख्ती के कारण रांची का माहौल राजनीतिक रूप से गरमा गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में नगर निगम सभी 831 संस्थानों पर निष्पक्ष कार्रवाई करता है या यह मामला केवल चुनिंदा संस्थानों तक ही सीमित रहता है।



















