लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच दूरियां साफ नजर आईं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के मुख्य दलों ने सामूहिक बहिष्कार किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां इस आयोजन में शामिल नहीं हुईं। हालांकि, विपक्षी खेमे में एकजुटता के दावों के बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी द्रमुक के नेताओं ने इस बहिष्कार से अलग हटकर कार्यक्रम में शिरकत की। सूत्रों के मुताबिक, इस अनौपचारिक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
विपक्षी गुट में मतभेद और चाय पार्टी की परंपरा
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इस बात की पुष्टि की कि उनकी पार्टी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और 'इंडिया' ब्लॉक के अन्य सहयोगी दलों ने चाय पार्टी से दूर रहने का फैसला लिया। हर संसदीय सत्र के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा चाय पार्टी का आयोजन एक स्थापित परंपरा रही है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और सत्तापक्ष के प्रमुख सांसदों के अलावा विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया जाता है ताकि सत्र के बाद एक अनौपचारिक संवाद हो सके। लेकिन इस बार विपक्षी दलों के एक बड़े हिस्से ने इसमें न जाने का मन बनाया, जबकि द्रमुक नेताओं ने परंपरा का पालन करते हुए हिस्सा लिया।
सत्र की अनिश्चितकालीन समाप्ति और राष्ट्रगीत के छह पद
संसद का यह मानसून सत्र शुरू से ही भारी हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ गया। बृहस्पतिवार को सुबह लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई, जिसके साथ ही मानसून सत्र का समापन हो गया। सुबह 11 बजे राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के साथ सदन का कामकाज शुरू हुआ था। इस दौरान राष्ट्रगीत के सभी छह पद बजाए गए। जब राष्ट्रगीत चल रहा था, तब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे। राष्ट्रगीत पूरा होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। खास बात यह रही कि इस बार स्पीकर ने सत्र के दौरान हुए कामकाज और सदन की कार्य उत्पादकता से जुड़ा पारंपरिक समापन भाषण नहीं पढ़ा।
सदन में जारी हंगामा और बिना बहस पास हुए प्रमुख विधेयक
पूरे मानसून सत्र के दौरान कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। मुख्य रूप से नीट पेपर लीक मामले और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों पर विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा। इसके अलावा, नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का भी विपक्षी सांसदों ने पुरजोर विरोध किया। विपक्ष ने सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए और मांग की कि सरकार छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब दे। इस गतिरोध और नारेबाजी के बावजूद सरकार संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही। विपक्षी सदस्यों के चर्चा में भाग न लेने के कारण इनमें से कुछ बिल बिना किसी बहस के ही लोकसभा से पास हो गए।






















