मध्य प्रदेश विधानसभा में 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया है। इसके साथ ही यह राज्य उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद इस कानून को लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। विपक्षी दल कांग्रेस के भारी विरोध और हंगामे के बीच इस बिल को पास किया गया। हालात यह थे कि शोरगुल के चलते सदन की कार्यवाही को दो बार रोकना पड़ा।
शादी और लिव-इन रिलेशनशिप के बदलेंगे नियम
इस नए कानून के लागू होने से राज्य में विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई नियमों में बड़े बदलाव आएंगे। विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए विशेष शर्तें तय की गई हैं। अब मध्य प्रदेश में भी सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून लागू होंगे, जिससे अलग-अलग धर्मों के निजी कानूनों की जगह एक साझा कानूनी ढांचा तैयार होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में इस बिल का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में शरिया की जगह एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब मध्य प्रदेश में अलग-अलग मजहबी नियम काम नहीं करेंगे। यादव ने दावा किया कि 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने इस विधेयक का पूरा समर्थन किया है। जिस समय यह बिल पास हो रहा था, उस वक्त विधानसभा में लगातार जय श्री राम के नारे गूंज रहे थे।
कांग्रेस की 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की मांग
कांग्रेस ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे चर्चा से पहले प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। विपक्षी नेताओं का तर्क था कि समान नागरिक संहिता को सबसे पहले देश की संसद में पास होना चाहिए और उसके बाद ही इसे राज्यों की विधानसभाओं में लाया जाना चाहिए। कांग्रेस सदस्यों ने यह भी कहा कि इस समय UCC से कहीं ज्यादा जरूरत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी आरक्षण देने की है। दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा।

















