हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित विधानसभा में मॉनसून सत्र का पहला ही दिन भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। शुक्रवार सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष में बैठे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने वंदे मातरम गाने की मांग को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। इस वजह से सदन की कार्यवाही शुरू होने के महज 19 मिनट के भीतर ही स्पीकर कुलदीप पठानिया को बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब सदन की अगली कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगी।
वंदे मातरम गाने की मांग को लेकर सदन में बढ़ा विवाद
सदन की बैठक शुरू होते ही विपक्षी दल भाजपा के विधायक अपनी-अपनी सीटों पर खड़े हो गए और बोलने के लिए समय मांगने लगे। इसके साथ ही विपक्षी विधायकों ने सदन की शुरुआत में ही वंदे मातरम गाने की मांग रखी और नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा विधायकों का कहना था कि विधानसभा में स्थापित नियमों और कानून की पूरी तरह से पालना की जानी चाहिए। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे बुलंद किए और सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्पीकर की नसीहत और परंपरा का हवाला
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा स्पीकर कुलदीप पठानिया ने विपक्षी सदस्यों को समझाने का प्रयास किया। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि विधानसभा की स्थापित परंपरा के अनुसार सत्र के पहले दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से की जाती है, जबकि वंदे मातरम का गायन सत्र के समापन अवसर पर होता है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि सदन हमेशा तय परंपराओं के आधार पर संचालित होता है, इसलिए किसी भी सदस्य को नई परंपरा शुरू करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। स्पीकर ने यह भी कहा कि पहले शोकोद्गार की प्रक्रिया पूरी होने दी जाए और बाद में सदस्यों के पास अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय रहेगा।
दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी और सदन स्थगित
स्पीकर की अपीलों का हंगामा कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं पड़ा और दोनों पक्षों की ओर से जोरदार नारेबाजी जारी रही। जवाब में सत्ता पक्ष के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों ने भी मोर्चा संभाल लिया और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री खुद भी सत्ता पक्ष की ओर से प्रदर्शन में शामिल होकर नारेबाजी करते दिखे। सदन के भीतर दोनों ओर से लगातार बढ़ती नारेबाजी और अव्यवस्था को देखते हुए स्पीकर ने कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करने का फैसला सुनाया। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के बाहर निकल आए और अपना विरोध जारी रखा।



















