राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यएमयूएफजी ने दी चेतावनी, अमेरिकी यील्ड में तेजी से बढ़ सकता है एशियाई मुद्राओं का संकटब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने की महिंद्रा समूह की सराहना, पश्चिमी देशों के दबदबे को दी चुनौतीमुंबई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पलामू के 12 स्केटर दिखाएंगे दम, गांधी उद्यान में मिल रही कोचिंग से संवर रहा भविष्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन
महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण पर अल्टीमेटम, मुंबई घेरने और 29 अगस्त से भूख हड़ताल का मनोज जरांगे का ऐलानराजनीति
27 अग॰ 2026, 12:28 am (16 दिन पहले)· 4

महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण पर अल्टीमेटम, मुंबई घेरने और 29 अगस्त से भूख हड़ताल का मनोज जरांगे का ऐलान

मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने आरक्षण मांगों को लेकर 28 अगस्त तक की समयसीमा तय करते हुए 29 अगस्त से जालना में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की है। उन्होंने मुंबई में प्रदर्शन होने पर रेल और हवाई सेवा बाधित होने की चेतावनी दी है।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। मराठा समुदाय को कथित रूप से धमकाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को कड़े परिणामों की चेतावनी देते हुए मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मराठा समाज को उनके हक का आरक्षण मिल जाता है तो उनका मुंबई जाकर प्रदर्शन करने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और मुंबई में विरोध प्रदर्शन का फैसला लिया गया, तो लगभग 80 से 90 लाख युवा राजधानी में एकत्र होंगे, जिससे रेल और विमान सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।

मराठा आरक्षण पर अल्टीमेटम और 28 अगस्त की समयसीमा

मनोज जरांगे ने राज्य सरकार की पुनर्विचार करने की सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने आंदोलन की अगली रणनीति की घोषणा करते हुए 28 अगस्त की समयसीमा तय की है। यदि इस तिथि तक सरकार मराठा समुदाय की मांगों को लागू नहीं करती है, तो जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। जरांगे का कहना है कि सरकार को मराठा समाज के धैर्य की परीक्षा लेने के बजाय समय रहते उचित कदम उठाना चाहिए।

ये भी पढ़ें

मुंबई जाम करने और रेल-हवाई सेवा ठप करने की चेतावनी

मुंबई पुलिस द्वारा सार्वजनिक रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक लगाने के कथित आदेशों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जरांगे ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन मनमाना व्यवहार करता है और मराठा समुदाय के लोग मुंबई आने का फैसला लेते हैं, तो वे अपनी मांगों के समर्थन में रेलवे ट्रैक उखाड़ने और उड़ानों को रोकने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि सरकारी बाधाओं के बावजूद लाखों की संख्या में युवा अपनी आवाज उठाने के लिए राजधानी में प्रवेश करेंगे।

कुनबी जाति प्रमाण पत्र और 58 लाख रिकॉर्ड की मांग

आंदोलन के मुख्य मुद्दों को रेखांकित करते हुए मनोज जरांगे ने आरोप लगाया कि प्रशासन मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को धीमा और सीमित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि पहले से पहचाने गए 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर ही सभी योग्य मराठा सदस्यों को तुरंत कुनबी प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का छल या विश्वासघात हुआ, तो आगामी चुनावों में इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

आंदोलन के सम्भावित स्थान और आगे की रणनीति

यदि आंदोलनकारी मुंबई का रुख करते हैं तो विरोध प्रदर्शन के लिए कई प्रमुख स्थानों पर विचार किया जा रहा है। मनोज जरांगे के अनुसार मराठा प्रदर्शनकारी आजाद मैदान, शिवाजी पार्क या मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा के बाहर धरना दे सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि यह संघर्ष पूरे महाराष्ट्र के मराठा समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए है और जब तक अधिकार नहीं मिल जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

मनोज जरांगे ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कब से शुरू करने की घोषणा की है?
मनोज जरांगे ने 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है।
महाराष्ट्र सरकार के लिए क्या समयसीमा तय की गई है?
उन्होंने मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों को लागू करने के लिए सरकार को 28 अगस्त तक की समयसीमा दी है।
कुनबी जाति प्रमाण पत्र को लेकर मनोज जरांगे का मुख्य आरोप क्या है?
उनका आरोप है कि सरकार योग्य मराठा सदस्यों के लिए कुनबी प्रमाण पत्र सीमित कर रही है और उन्होंने 58 लाख पुराने रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है।
मुंबई में विरोध प्रदर्शन के लिए कौन से स्थान प्रस्तावित किए गए हैं?
यदि प्रदर्शनकारी मुंबई जाते हैं, तो वे आजाद मैदान, शिवाजी पार्क या मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा के बाहर एकत्र हो सकते हैं।
मुंबई आंदोलन में कितने लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है?
मनोज जरांगे के अनुसार यदि मुंबई में प्रदर्शन का निर्णय होता है तो 80 से 90 लाख मराठा युवा आंदोलन में भाग ले सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·15 दिन पहले

मनोज जरांगे का यह नया अल्टीमेटम महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता और आगामी चुनावी समीकरणों पर सीधा प्रभाव डालेगा। 28 अगस्त की समयसीमा और मुंबई की परिवहन व्यवस्था ठप करने की चेतावनी यह दर्शाती है कि यह आंदोलन अब सिर्फ सामाजिक मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े राजनीतिक दबाव के रूप में उभर रहा है। यदि प्रशासन ने समय रहते कुनबी प्रमाण पत्रों के 58 लाख रिकॉर्ड और अन्य मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकाला, तो राज्य की वित्तीय राजधानी में कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के संचालन के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिसका खमियाजा सत्तापक्ष को चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

मनोज जरांगे का यह अल्टीमेटम महाराष्ट्र की राजनीति और बुनियादी ढांचे दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब आंदोलनकारी रेल पटरियों और हवाई सेवाओं को ठप करने की चेतावनी दें, तो यह सिर्फ सामाजिक मांग नहीं बल्कि प्रशासनिक संकट बन जाता है। अब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह टकराव आगामी चुनावी समीकरणों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, क्योंकि 58 लाख रिकॉर्ड और कुनबी प्रमाण पत्र का यह मुद्दा अब आर-पार की स्थिति तक पहुँच चुका है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·15 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, जब आर्थिक राजधानी की जीवन रेखा यानी रेल और हवाई मार्गों को बाधित करने की चेतावनी दी जाती है, तो इसका सीधा असर आपूर्ति श्रृंखला और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। 58 लाख ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और कुनबी प्रमाण पत्रों का यह दांव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक अभूतपूर्व तनाव की स्थिति पैदा कर रहा है। यदि यह गतिरोध समय रहते नहीं सुलझा, तो इसका असर केवल चुनावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिशीलता और कानून-व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

मनोज जरांगे का यह आक्रामक रुख राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। 28 अगस्त की समयसीमा समाप्त होने के बाद जालना में शुरू होने वाली भूख हड़ताल और मुंबई की परिवहन सेवाओं को ठप करने की खुली चेतावनी प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर ले आई है। आजाद मैदान या शिवाजी पार्क जैसे संवेदनशील स्थलों पर लाखों युवाओं के जुटने की संभावना और कुनबी प्रमाण पत्रों के 58 लाख रिकॉर्ड पर अड़े रहने से पुलिस प्रशासन के सामने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन का भारी संकट खड़ा हो गया है। आगामी दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव बढ़ने के पूरे आसार हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

मनोज जरांगे द्वारा रेल पटरियों को उखाड़ने और उड़ानों को रोकने जैसी चरम चेतावनियाँ केवल सामाजिक आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह महाराष्ट्र की वित्तीय राजधानी के व्यावसायिक परिदृश्य और निवेशकों की धारणा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। मुंबई की आर्थिक धुरी को इस प्रकार के व्यवधानों से बचाने के लिए कॉरपोरेट जगत और वित्तीय बाजारों की नजरें भी इस राजनीतिक गतिरोध पर टिकी हुई हैं, जिससे सरकार पर त्वरित और ठोस आर्थिक समाधान खोजने का दबाव काफी बढ़ गया है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR