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मानसून सत्र से पहले शरद पवार के तेवर में बदलाव, परिसीमन बिल पर मिल सकता है मोदी सरकार का साथराजनीति
16 जुल॰ 2026, 5:27 am (13 दिन पहले)· 4

मानसून सत्र से पहले शरद पवार के तेवर में बदलाव, परिसीमन बिल पर मिल सकता है मोदी सरकार का साथ

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले शरद पवार गुट के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं. सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर 50 प्रतिशत फॉर्मूले की शर्त के साथ समर्थन के संकेत दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी मुलाकातों का दौर तेज हो गया है.

संसद का मानसून सत्र नजदीक आते ही देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है. पीएम नरेंद्र मोदी अपने विदेशी दौरे पूरे कर लौट चुके हैं, नेता विपक्ष राहुल गांधी भी विदेश यात्रा के बाद वापस आ चुके हैं और 21 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है. इसी बीच बड़ी खबर यह है कि इंडिया गठबंधन का सबसे अनुभवी चेहरा माने जाने वाले शरद पवार का धड़ा राहुल गांधी का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी के दो अहम बिलों का समर्थन करने के मूड में दिख रहा है.

तीन महीने पहले अटके दो बिल फिर संसद में

पीएम मोदी इस मानसून सत्र के लिए बड़ी तैयारी कर चुके हैं. जिन दो बिलों, महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को इंडिया गठबंधन ने मिलकर तीन महीने पहले रोक दिया था, सरकार उन्हें फिर से संसद में लाने की तैयारी में है. 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यह मुद्दा एक बार फिर टकराव की वजह बन सकता है, क्योंकि इंडिया गठबंधन इन बिलों को रोकने के लिए फिर पूरी ताकत लगाने का इरादा रखता है. लेकिन इस टकराव से पहले ही राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगता दिख रहा है.

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शरद पवार का साथ छूटने के आसार

इंडिया गठबंधन में सबसे अनुभवी नेता माने जाने वाले शरद पवार इस मुद्दे पर राहुल गांधी का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी के बिल को समर्थन दे सकते हैं. यही वजह है कि रातोंरात यह चर्चा शुरू हो गई कि शरद पवार टीम मोदी का हिस्सा बनने को तैयार हो गए हैं. बीते दो साल से जो लोग यह माहौल बनाते रहे कि 2024 के नतीजों के बाद नरेंद्र मोदी कमजोर पड़ गए हैं और उनकी कुर्सी कभी भी जा सकती है, आज उन्हीं की पार्टियों का हाल यह हो गया है कि उनके अपने वजूद पर सवाल खड़े होने लगे हैं, जबकि पीएम मोदी ने अपने मिशन के लिए इतनी ताकत झोंक रखी है कि बड़े बड़े दिग्गज भी हिलते नजर आ रहे हैं.

सुप्रिया सुले का बयान, इंडिया गठबंधन में हड़कंप

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे इंडिया गठबंधन में हलचल मचा दी है. सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल का सीधे तौर पर विरोध नहीं किया, बल्कि शर्तों के साथ समर्थन के संकेत दिए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार परिसीमन बिल में 50 प्रतिशत वाला फॉर्मूला लेकर आती है, तो उनकी पार्टी इस पर विचार करेगी.

यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि शरद पवार की पार्टी ने पिछली बार परिसीमन बिल के विरोध में वोट किया था. अब सुप्रिया सुले का यह कहना कि पार्टी इस पर विचार करेगी, इसे समर्थन की दिशा में बढ़ता कदम माना जा रहा है. दरअसल जिस 50 प्रतिशत फॉर्मूले की बात सुप्रिया सुले कर रही हैं, वही फॉर्मूला पिछली बार मोदी सरकार परिसीमन बिल में लेकर आई थी. इस फॉर्मूले के तहत प्रावधान यह था कि हर राज्य में आबादी के हिसाब से सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी, बल्कि सीधे लोकसभा की सीटों में 50 प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा.

सुप्रिया सुले ने यह भी संकेत दिया कि सरकार 50 प्रतिशत वाली बात लिखित में दे. गौर करने वाली बात यह है कि अमित शाह पहले ही संसद में विपक्ष से कह चुके हैं कि सरकार यह बात लिखित में देने को तैयार है. यानी सुप्रिया सुले जिस शर्त की बात कर रही हैं, उसके लिए सरकार पहले से ही तैयार बैठी है. अब फैसला शरद पवार की पार्टी को लेना है.

मुंबई से दिल्ली तक मुलाकातों का दौर

परिसीमन बिल पर शरद पवार गुट के नरम पड़ते रुख के पीछे एक रात पहले हुई कई अहम मुलाकातें बताई जा रही हैं. बीती रात शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले. इसके अलावा सत्ता में शामिल एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी सीएम फडणवीस से अलग से मुलाकात की. यानी सीएम आवास पर एनसीपी के दोनों गुटों के नेता पहुंचे और मुख्यमंत्री से बातचीत की.

जिस वक्त मुंबई में यह मुलाकातें चल रही थीं, ठीक उसी समय दिल्ली में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अमित शाह से मिल रहे थे. अमित शाह और एकनाथ शिंदे की इस मुलाकात में उद्धव ठाकरे गुट से बागी होकर आए 6 सांसद भी मौजूद रहे. इस मुलाकात में इन बागी सांसदों को उनके राजनीतिक भविष्य, पार्टी बदलने पर मिलने वाली कानूनी मदद और उनकी सीट को लेकर आश्वासन दिया गया.

यानी एक ही समय पर दिल्ली और मुंबई दोनों जगह सियासी मुलाकातों का दौर चल रहा था, और उसी दिन सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर बड़ा बयान दे दिया. अमित शाह से मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने भी इशारों में यह जता दिया कि मानसून सत्र में कुछ बड़ा होने वाला है.

सुप्रिया सुले की सफाई

हालांकि अपने बयान पर सुप्रिया सुले ने सफाई भी दी है. उनका कहना है कि मीडिया में परिसीमन बिल को लेकर उनकी पार्टी के स्टैंड को लेकर जो अंदाजे लगाए जा रहे हैं, वे गलत हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी फैसला पार्टी के भीतर गहन चर्चा और गठबंधन के साथियों से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा. सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि सरकार ने अभी तक कोई संशोधित परिसीमन बिल संसद में पेश ही नहीं किया है, इसलिए इस पर अभी से अंदाजा लगाना जल्दबाजी होगी.

इंडिया गठबंधन अपनी ही उलझनों में फंसा

एक तरफ शरद पवार गुट के तेवर बदलते नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के भीतर भी कई मोर्चों पर खींचतान चल रही है. राहुल गांधी इन दिनों पंजाब कांग्रेस के भीतर के विवाद को सुलझाने में उलझे हुए हैं. ममता बनर्जी के खिलाफ भी बगावत की एक नई खेप सामने आई है. उद्धव ठाकरे से बागी होकर आए सांसद लगातार अमित शाह से मुलाकात कर रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस को यह डर भी सता रहा है कि कहीं डीएमके भी नरेंद्र मोदी के साथ न चला जाए.

दूसरी ओर इंडिया गठबंधन संसद में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और इथेनॉल जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, लेकिन शरद पवार गुट के रुख ने विपक्ष की इस रणनीति के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है.

संसद के साथ साथ यूपी और पंजाब पर भी नजर

यह सियासी खेल सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे अहम राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर भी हलचल तेज है. उत्तर प्रदेश को लेकर एक दिन पहले ही अमित शाह और सीएम योगी के बीच मुलाकात हुई है, जबकि पीएम मोदी खुद पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं. यानी संसद से लेकर राज्यों तक, हर मोर्चे पर रणनीति बनाई जा रही है, जबकि इंडिया गठबंधन के घटक दल अपने ही आंतरिक झगड़ों में उलझे नजर आ रहे हैं.

कुल मिलाकर मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही देश की सियासत में नया अध्याय खुलता दिख रहा है. मुंबई से दिल्ली तक हुई मुलाकातों और सुप्रिया सुले के बयान के बाद यह साफ है कि परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में इस बार माहौल पहले से अलग रहने वाला है.

सत्र से पहले किन बातों पर रहेगी नजर

मानसून सत्र नजदीक आने के साथ इस पूरी कहानी के कई पहलुओं पर नजर बनी रहेगी.

  • महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल, दोनों तीन महीने पहले इंडिया गठबंधन द्वारा रोके जाने के बाद अब फिर संसद में लौटने की तैयारी में हैं.
  • सुप्रिया सुले ने अपनी पार्टी के संभावित समर्थन को 50 प्रतिशत वाले सीट बढ़ोतरी फॉर्मूले से जोड़ा है, यही फॉर्मूला मोदी सरकार पहले भी परिसीमन बिल में ला चुकी है.
  • अमित शाह पहले ही संसद में कह चुके हैं कि सरकार 50 प्रतिशत वाली बात लिखित में देने को तैयार है.
  • दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के दौरान उद्धव ठाकरे गुट से बागी हुए 6 सांसद भी मौजूद थे, जिन्हें राजनीतिक भविष्य, कानूनी मदद और सीट को लेकर आश्वासन दिया गया.
  • संसद के अलावा अमित शाह सीएम योगी से मुलाकात कर चुके हैं और पीएम मोदी पंजाब दौरे की तैयारी में हैं, ये दोनों ही राज्य आने वाले चुनावों की दहलीज पर खड़े हैं.

शरद पवार गुट आखिरकार इन बिलों का समर्थन करता है या सुप्रिया सुले की सफाई ही अंतिम स्टैंड बनकर रह जाती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन जिस तरह की सियासी हलचल अभी से शुरू हो चुकी है, उससे साफ है कि मानसून सत्र का माहौल तीन महीने पहले इन बिलों को रोकने वाले माहौल से बिल्कुल अलग रहने वाला है.

सवाल-जवाब

मानसून सत्र कब शुरू हो रहा है?
मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है.
पीएम मोदी के कौन से दो बिल फिर संसद में लाए जा सकते हैं?
महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल, जिन्हें इंडिया गठबंधन ने तीन महीने पहले रोक दिया था.
सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल पर क्या कहा है?
उन्होंने कहा कि अगर सरकार बिल में 50 प्रतिशत वाला फॉर्मूला लाती है, तो पार्टी इस पर विचार करेगी.
परिसीमन बिल में 50 प्रतिशत फॉर्मूला क्या है?
इसके तहत राज्यों में आबादी के आधार पर सीटें नहीं बढ़ेंगी, बल्कि सीधे लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत का इजाफा होगा.
अमित शाह और एकनाथ शिंदे की दिल्ली मुलाकात में कौन मौजूद था?
उद्धव ठाकरे गुट से बागी होकर आए 6 सांसद इस मुलाकात में मौजूद थे.
सुप्रिया सुले ने अपने बयान पर बाद में क्या सफाई दी?
उन्होंने कहा कि मीडिया के अंदाजे गलत हैं और कोई फैसला पार्टी के भीतर चर्चा व गठबंधन से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा, क्योंकि सरकार ने अभी संशोधित बिल पेश ही नहीं किया है.
कांग्रेस को किस सहयोगी दल के छिटकने की चिंता सता रही है?
कांग्रेस को डर है कि डीएमके भी नरेंद्र मोदी के साथ जा सकती है.
उत्तर प्रदेश और पंजाब का इस पूरे मामले से क्या संबंध है?
अमित शाह ने यूपी को लेकर सीएम योगी से मुलाकात की है और पीएम मोदी पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं, दोनों राज्यों में जल्द चुनाव होने हैं.
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