कंगना रनौत के बेरोजगार वाले बयान पर सौरव दास की अनोखी प्रतिक्रिया, खुद की तुलना ऋतिक रोशन से कीभारत में लॉन्च हुआ एक्सक्लूसिव मिनी कनवर्टिबल का स्टारडस्ट एडिशन, कीमत 62.90 लाख रुपयेराम भक्तों को अब चढ़ावे की रसीद तुरंत मिलेगी, ट्रस्ट ने वेबसाइट में किया बदलाव30 जुलाई 2026 को मूलांक 9 के जातकों को मंगल से मिलेगी नई ऊर्जा, जिम्मेदारियों को पूरा कर हासिल करेंगे बढ़ततेलंगाना में नल्ला विजय कुमार ने बनाई माचिस में समाने वाली सिल्क साड़ी, श्रीशैलम मंदिर में की अर्पितपाकिस्तान को सऊदी अरब से बड़ी मदद, 5 अरब USD के नकद भंडार की समयसीमा 3 साल बढ़ीप्रेडिक्शन मार्केट के दम पर रॉबिनहुड का रिकॉर्ड प्रदर्शन, दूसरी तिमाही में राजस्व 1.31 अरब डॉलर पहुंचाअयोध्या के विद्वानों के अनुसार चातुर्मास में जप दान और तप से क्यों मिलता है कई गुना पुण्यबांकीपुर उपचुनाव के दौरान जन सुराज कार्यकर्ताओं की हिरासत पर भड़के प्रशांत किशोर, बीजेपी पर लगाया पुलिस के गलत इस्तेमाल का आरोपफाइनेंस में 20 लाख रुपये का पैकेज दिलाने वाले 3 ग्लोबल कोर्स, जानें CFA, CPA और FRM में कौन सा है बेस्ट
मातोश्री में जुटेंगे शिवसेना (यूबीटी) के सभी 9 सांसद, 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों ने बढ़ाई उद्धव ठाकरे की मुश्किलेंराजनीति
14 जून 2026, 3:15 pm (46 दिन पहले)· 0

मातोश्री में जुटेंगे शिवसेना (यूबीटी) के सभी 9 सांसद, 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों ने बढ़ाई उद्धव ठाकरे की मुश्किलें

शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसदों के एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने सभी 9 सांसदों को मातोश्री बुलाया है। 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा दी है।

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और इस बार नजरें मातोश्री पर टिकी हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को लेकर चल रही अटकलों के बाद अब चर्चा का रुख शिवसेना (यूबीटी) की ओर मुड़ गया है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने सभी 9 सांसदों को मातोश्री में हाजिर होने का निर्देश दिया है, और इसी बैठक को 'ऑपरेशन टाइगर' नाम से चल रही सियासी अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

नियमित बैठक या संकट की आहट?

ऊपरी तौर पर भले ही यह संगठन की एक सामान्य समीक्षा बैठक लगे, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर पनप रही बेचैनी और संभावित टूट से जोड़कर पढ़ा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों ने नेतृत्व की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ने एक भी सांसद को छोड़े बिना सभी को मातोश्री बुला लिया है। जो सांसद किसी वजह से व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जोड़ा जाएगा।

ये भी पढ़ें

इस घटनाक्रम की गंभीरता को 2022 की पृष्ठभूमि से समझा जा सकता है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना दो फाड़ हो गई थी। उस बड़े उलटफेर के बाद से उद्धव ठाकरे के सामने संगठन को एकजुट रखने की लगातार चुनौती बनी हुई है। ऐसे माहौल में अगर सांसद स्तर पर भी असंतोष या दूसरे खेमे से संपर्क की बातें सतह पर आती हैं, तो उनका सियासी मतलब और भी गहरा हो जाता है।

संजय राउत ने अटकलों को नकारा

पार्टी नेतृत्व इन कयासों को सार्वजनिक रूप से सिरे से खारिज कर रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे पार्टी की रोजमर्रा की प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि जैसे समय-समय पर विधायकों के साथ बैठकें होती रहती हैं, ठीक वैसे ही सांसदों के साथ भी संगठनात्मक मुद्दों पर बातचीत होना स्वाभाविक है। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले दो साल से 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा हो रही है, मगर हकीकत में ऐसा कोई अभियान आज तक जमीन पर नहीं उतरा।

हालांकि इन सफाइयों के बावजूद सियासी गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि अगर सब कुछ सामान्य ही है, तो अचानक सभी सांसदों को एक साथ तलब करने की नौबत क्यों आ गई। राजनीतिक विश्लेषकों की राय में यह जमावड़ा महज हाजिरी दर्ज कराने का आयोजन नहीं, बल्कि सांसदों की वफादारी और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को परखने का मौका भी साबित हो सकता है।

शिंदे खेमे का रुख

दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे की पार्टी ने किसी भी 'ऑपरेशन' से साफ इनकार किया है, लेकिन साथ ही यह दावा भी किया है कि उद्धव गुट के कई नेता उसके संपर्क में बने हुए हैं। शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि उनकी ओर से कोई 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं चलाया जा रहा, मगर शिवसेना (यूबीटी) के कई नेता और सांसद विकास कार्यों तथा दूसरे मसलों को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। शिरसाट ने यह भी दो टूक कहा कि आगे चलकर अगर किसी नेता या सांसद के पार्टी में शामिल होने का सवाल उठता है, तो उस पर आखिरी मुहर पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे ही लगाएंगे।

उद्धव के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भाजपा और महायुति सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' की बातें 2024 से सुनी जा रही हैं और सवाल किया कि जब सरकार के पास पूर्ण बहुमत है, तो उसे विपक्षी दलों को तोड़ने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है।

बीते कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति ने जिस तरह के उलटफेर देखे हैं, उसे देखते हुए किसी भी अटकल को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही कारण है कि मातोश्री की यह बैठक सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम भर नहीं रह गई है, बल्कि उद्धव ठाकरे की नेतृत्व पर पकड़ और सांसदों की एकजुटता की परीक्षा के तौर पर देखी जा रही है। आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि 'ऑपरेशन टाइगर' महज एक सियासी अफवाह है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए समीकरण की भूमिका।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR