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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की मुसलमानों से अपील, पीएम मोदी और सीएम योगी को गालियां देने से बचेंराजनीति
18 अग॰ 2026, 4:35 pm (69 दिन पहले)· 2

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की मुसलमानों से अपील, पीएम मोदी और सीएम योगी को गालियां देने से बचें

आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने मुसलमानों से आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग बंद करें और नकारात्मक राजनीति छोड़ें। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर मुसलमानों को इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप भी लगाया।

बरेली: आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने हाल ही में जारी किए गए अपने एक बयान में समुदाय के लोगों से तीखी अपील की है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गालियां देना छोड़ दिया जाना चाहिए और इसके बजाय समाज को अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए। मौलाना ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय जनता पार्टी को पराजित करने का अकेला ठेका मुसलमानों ने नहीं ले रखा है। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे अब विरोध की उस पुरानी राजनीति को पूरी तरह त्याग दें जो उन्हें बीते कई वर्षों से नुकसान पहुंचाती आ रही है।

सकारात्मक सोच अपनाने और विरोध की राजनीति छोड़ने की जरूरत

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में विस्तार से कहा कि इन दिनों यह एक आम आदत बन चुकी है कि जहां कहीं भी मुस्लिम समुदाय के लोग आपस में बैठते हैं, वहां नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की नकारात्मक आलोचना ही शुरू हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2017 से लेकर अब तक मुसलमान लगातार भाजपा के विरोध की राजनीति में उलझे रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इस शैली को अलविदा कहा जाए और एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा जाए। लगातार विरोध जताने से समाज का भला नहीं होने वाला है, इसलिए अब नए सिरे से सोचने की सख्त आवश्यकता है।

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उन्होंने आगे समझाया कि पिछले 10 वर्षों के इस लंबे अंतराल के दौरान समाजवादी पार्टी और खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले दलों ने लगातार उकसाया, जिसके बाद मुसलमान भाजपा के खिलाफ लामबंद होते चले गए। इस पूरी राजनीति का एकमात्र सीधा फायदा समाजवादी पार्टी को मिला, जबकि दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय धीरे-धीरे हाशिए पर धकेलता चला गया। इस उठापटक में सारा नुकसान अंततः मुसलमानों को ही उठाना पड़ा है। इसी कारण से अब समुदाय के हर व्यक्ति को गहराई से विचार करना होगा और अपने राजनैतिक नजरिए में बुनियादी बदलाव लाना होगा ताकि आगे नुकसान न हो।

सपा और तथाकथित सेकुलर दलों पर भोले-भाले मुसलमानों को भड़काने का आरोप

अपने संबोधन में मौलाना ने आगे कहा कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल और विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के नेताओं ने हमेशा से भोले-भाले और सीधे-साधे मुसलमानों को गुमराह कर भड़काने का काम किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि समुदाय का कोई साधारण व्यक्ति अपने बेटे या बेटी के निकाह समारोह में भाजपा के किसी मंत्री या विधायक को आमंत्रित कर लेता है, तो समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग तुरंत हंगामा खड़ा कर देते हैं और उस परिवार के सामाजिक बहिष्कार तक का ऐलान कर बैठते हैं। ऐसे दोहरे रवैये को भली-भांति समझने की आज जरूरत है।

मौलाना ने समाजवादी पार्टी के पुराने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव ने एक समय कल्याण सिंह को साथ लेकर अपनी सरकार बनाई थी और भाजपा के तमाम नेताओं को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था, जिसमें आजम खान भी मंत्री रहे और उन्होंने उस दौरान कभी इस्तीफा नहीं दिया था। इतना ही नहीं, मुलायम सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई बार प्रधानमंत्री बनने की दुआएं तक मांगी थीं और खुद अखिलेश यादव अक्सर रात के अंधेरे में भाजपा के वरिष्ठ लोगों से गुप्त मुलाकात कर अपना राजनीतिक एजेंडा तय करते हैं। इसलिए मुसलमानों को सपा के इन दोहरे चेहरों को अब पहचान लेना चाहिए।

नकारात्मक राजनीति ने नई नस्ल के विकास को पीछे धकेला

मौलाना ने अपनी बात को आगे बढ़ाते ہوئے कहा कि वह तमाम मुसलमानों से बार-बार यही गुजारिश करते हैं कि वे जगह-जगह जाकर भाजपा का विरोध करना पूरी तरह बंद कर दें। अपने दिल और दिमाग में एक सकारात्मक सोच को जन्म दें ताकि आने वाले कल और अपने परिवार के भविष्य के दिनों के लिए बेहतर योजना बनाई जा सके। ऐसा करने से ही नई पीढ़ी और नस्ल के विकास के लिए एक सही खाका तैयार किया जा सकेगा। पिछले 10 वर्षों की इस लगातार नकारात्मक राजनीति ने मुसलमानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत पीछे धकेल दिया है।

उन्होंने चेताया कि केवल विरोध पर आधारित राजनीति ने मुसलमानों के विकास के पहिए को पूरी तरह से जाम करके रख दिया है। तथाकथित सेकुलर पार्टियों और समाजवादी पार्टी ने ही हमेशा मुसलमानों को भाजपा के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया और उनके बहकावे में आकर समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे। इसके परिणाम यह हुए कि लाठियां मुसलमानों ने खाईं, जेलों में मुसलमान बंद हुए, जबकि सपा के तमाम नेता आराम से अपनी सियासी रोटियां सेकते रहे और सारे राजनीतिक फायदे बटोरते रहे। इसलिए उन्होंने अपने भाइयों से अपील की कि वे इन सियासी लोगों की चालों को समझें और अपना ध्यान पूरी तरह भविष्य पर केंद्रित करें।

बता दें कि इससे पहले मौलाना अरशद मदनी का एक बयान भी काफी चर्चा का विषय बना रहा था, जिसमें मौलाना मदनी ने वंदे मातरम् बिल पर सवाल उठाते हुए यह कहा था कि मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है।

सवाल-जवाब

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी किस पद पर हैं?
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
मौलाना ने मुसलमानों से क्या मुख्य अपील की है?
उन्होंने मुसलमानों से अपील की है कि वे पीएम मोदी और सीएम योगी को गालियां देना बंद करें और नकारात्मक राजनीति छोड़कर सकारात्मक सोच अपनाएं।
मौलाना ने किस राजनीतिक दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं?
मौलाना ने समाजवादी पार्टी और तथाकथित सेकुलर दलों पर भोले-भाले मुसलमानों को उकसाने और उनका राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है।
मुसलमानों को भाजपा के विरोध से क्या नुकसान हुआ है?
मौलाना के अनुसार, पिछले 10 वर्षों की नकारात्मक राजनीति और विरोध के कारण मुसलमानों का विकास रुक गया और उन्हें ही लाठियां व जेल का सामना करना पड़ा।
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टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·69 दिन पहले

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का यह बयान मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों पर पुनर्विचार की मांग करता है। इस तरह के बयानों का असर सीधे तौर पर चुनावी राजनीति और क्षेत्रीय दलों के साथ मुस्लिम मतदाताओं के पारंपरिक जुड़ाव पर पड़ेगा। जब कोई प्रमुख धार्मिक हस्ती खुले तौर पर विरोध की राजनीति छोड़ने की वकालत करती है, तो इससे कॉर्पोरेट निवेश, स्टार्टअप इकोसिस्टम और समाज के भीतर एक नए आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण को बल मिलने की संभावना बनती है, जिससे समुदाय की मुख्यधारा में भागीदारी और अधिक सुदृढ़ हो सकती है।

Riya Menon@riya-menon·69 दिन पहले

मौलाना के इस बयान का असर जीवनशैली और सामाजिक-सांस्कृतिक मेलजोल पर भी दिख सकता है। जब राजनीति का ज़हर कम होता है, तो स्थानीय बाजारों, खान-पान की संस्कृति और पाककला के आदान-प्रदान में नए रास्ते खुलते हैं। इस तरह के बदलाव से विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक संवाद बेहतर होता है और घरेलू स्तर पर भी एक समावेशी माहौल तैयार होता है, जो अंततः समाज के समग्र विकास में सहायक बनता है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·69 दिन पहले

कार्लोस मेंडोज़ा की टिप्पणी: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का यह बयान भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण वैचारिक बदलाव का संकेत देता है। यदि मुस्लिम समुदाय पारंपरिक विरोध की राजनीति को छोड़कर सकारात्मक और विकास-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है, तो इससे क्षेत्रीय दलों के उस एकाधिकार को चुनौती मिल सकती है जो अब तक इस वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं। इस नए समीकरण से आगामी चुनावों में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के वोट समीकरण और चुनावी रणनीतियों पर गहरा असर पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·69 दिन पहले

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण के बीच एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। जब धार्मिक मंचों से इस तरह की भाषा और राजनीतिक दलों की दोहरी नीति पर सवाल उठते हैं, तो यह कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस अपील से मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग की सोच में बदलाव आता है या फिर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया से राज्य में नए समीकरण बनते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·69 दिन पहले

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के दूरगामी प्रभाव दिख सकते हैं। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रोहेलखंड क्षेत्र में, जहां मुस्लिम मतदाता पारंपरिक रूप से गैर-भाजपा दलों के पाले में लामबंद होते रहे हैं, वहां इस तरह की अपील राजनीतिक दलों के रणनीतिक समीकरणों को हिला सकती है। यदि धार्मिक नेतृत्व खुलकर सपा जैसे दलों की कथित दोहरी नीति पर सवाल उठा रहा है, तो यह जमीनी स्तर पर मतदाताओं के पारंपरिक रुझान में एक नई बहस को जन्म देगा, जिसका असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ना तय है।

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