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मंत्री पद न मिलने से नाराज विधायकों को डीके शिवकुमार का स्पष्ट संदेश, बोले- पार्टी सर्वोपरि, इस्तीफा तुरंत होगा मंजूरराजनीति
4 अग॰ 2026, 3:10 pm (38 दिन पहले)· 0

मंत्री पद न मिलने से नाराज विधायकों को डीके शिवकुमार का स्पष्ट संदेश, बोले- पार्टी सर्वोपरि, इस्तीफा तुरंत होगा मंजूर

कर्नाटक में 19 नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद उपजे असंतोष पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया कि संगठन के हित व्यक्तिगत पदों से ऊपर हैं और यदि कोई विधायक त्यागपत्र सौंपता है तो उसे बिना विलंब स्वीकार कर लिया जाएगा।

कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्ताधारी खेमे में उपजी नाराजगी पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद पद न मिलने से असंतुष्ट विधायकों द्वारा त्यागपत्र देने की धमकियों के बीच उन्होंने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया कि संगठन की मजबूती किसी भी व्यक्ति के पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यदि कोई नेता असंतोष में अपना पद छोड़ना चाहता है, तो उनका त्यागपत्र बिना किसी विलंब के कुछ ही मिनटों के भीतर मंजूर कर लिया जाएगा।

पार्टी सर्वोपरि, धैर्य रखने की दी सलाह

कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मचे घमासान के बीच डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि राजनीति में पद न मिलने पर असंतोष और इस्तीफे की बातें होना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने राजनीतिक भविष्य और संगठन की भलाई सोचते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि पार्टी के अस्तित्व से ही बाकी सभी अवसर बनते हैं। इसके साथ ही उन्होंने असंतुष्ट विधायकों को थोड़ा संयम बरतने का सुझाव दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य के विभिन्न सरकारी बोर्डों और निगमों में रिक्त पड़े पदों पर जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे अन्य नेताओं को भी जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा।

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अतीत के उदाहरणों से दी सब्र की सीख

अपने राजनीतिक सफर का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धैर्य से ही राजनीति में सफलता संभव है। उन्होंने याद दिलाया कि जब धरम सिंह और सिद्धरमैया राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था। यदि वे चाहते तो उस समय इस्तीफा दे सकते थे, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा। इसके अलावा उन्होंने उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर का जिक्र करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने भी कई बार अवसरों के लिए इंतजार किया है।

इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वीरेंद्र पाटिल मुख्यमंत्री पद पर थे, उस समय एस. बंगारप्पा, वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और धरम सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला था। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य रखा और आगे चलकर बंगारप्पा तथा धरम सिंह दोनों ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

19 नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण और वरिष्ठ नेताओं की निराशा

उल्लेखनीय है कि सोमवार को डीके शिवकुमार सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया, जिसमें 19 नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के तुरंत बाद कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी को लेकर पार्टी में सुगबुगाहट शुरू हो गई। पूर्ववर्ती सिद्धरमैया सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके और कांग्रेस के प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले वरिष्ठ विधायक दिनेश गुंडू राव ने भी नए मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने पर अपनी निराशा खुलकर व्यक्त की है। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद से राज्य के राजनीतिक हलकों और कांग्रेस खेमे में हलचल और तेज हो गई है।

सवाल-जवाब

डीके शिवकुमार ने इस्तीफा देने की धमकी देने वाले विधायकों से क्या कहा?
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि संगठन व्यक्ति से बड़ा है और यदि कोई त्यागपत्र देता है तो उसे कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लिया जाएगा।
कर्नाटक में नए मंत्रिमंडल विस्तार में कितने मंत्रियों ने शपथ ली?
सोमवार को हुए पुनर्गठन के दौरान कुल 19 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।
डीके शिवकुमार ने अपने राजनीतिक जीवन का क्या उदाहरण दिया?
उन्होंने याद दिलाया कि धरम सिंह और सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान मंत्री न बनाए जाने पर भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा था।
दिनेश गुंडू राव ने मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर क्या प्रतिक्रिया दी?
वरिष्ठ विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने नए मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने पर निराशा व्यक्त की।
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