गुरु पूर्णिमा पर राजनाथ सिंह ने गुरु परंपरा को बताया भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहरफ्रीज संपत्तियों से मुआवजा लेने वालों पर ईरान की चेतावनी, होर्मुज मार्ग रोकने का दिया सख्त निर्देशलाइव: अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर किया हमलाहगिंग फेस के अलावा कई बाहरी अकाउंट्स पर भी हुआ था ओपनएआई के बेकाबू एआई एजेंट का हमलासबपीना में एक अक्षर की गलती से बेकसूर ब्रैंडन क्लेम ने काटी जेल, अपील में बेगुनाही साबितघरेलू क्रिकेट में आशुतोष शर्मा ने रचा इतिहास, मात्र 11 गेंदों पर अर्धशतक ठोक तोड़ा युवराज सिंह का सालों पुराना रिकॉर्डथप्पड़कांड में जांच से नहीं हटाए जाएंगे एडीसीपी संदीप लांबा, हाईकोर्ट की टिप्पणी अहमजिमीकंद के बेमिसाल चिकित्सकीय गुण, जानिए पाचन सुधारने से लेकर डायबिटीज नियंत्रण में यह सब्जी कैसे करती है कामसीजेपी प्रवक्ता सौरव दास पर बरसीं भाजपा सांसद कंगना रनौत, 28 साल की उम्र में दो नेशनल अवॉर्ड जीतने की बात रखकर कसा तंजबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शन
परिसीमन से दक्षिण को नुकसान बर्दाश्त नहीं, डीएमके ने रखी 25 साल तक सीटें न बदलने की मांगराजनीति
19 जुल॰ 2026, 9:11 pm (9 दिन पहले)· 4

परिसीमन से दक्षिण को नुकसान बर्दाश्त नहीं, डीएमके ने रखी 25 साल तक सीटें न बदलने की मांग

डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि पार्टी मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए.

लोकसभा में परिसीमन का मुद्दा गरमाने के बीच द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने साफ कर दिया है कि पार्टी महिला आरक्षण कानून के पक्ष में तो है, मगर मौजूदा 543 सीटों के ढांचे में ही किसी भी बदलाव के सख्त खिलाफ है. रविवार को डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि सीमाओं की नए सिरे से गिनती दक्षिण भारत के राज्यों को किसी भी सूरत में नुकसान नहीं पहुंचानी चाहिए.

महिला आरक्षण पर पार्टी की स्थिति साफ

तिरुचि शिवा के मुताबिक, डीएमके महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अधिक भागीदारी देने के पक्ष में हमेशा से रही है, लेकिन पार्टी की शर्त यह है कि यह हिस्सेदारी मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही तय हो, न कि सीटों की कुल संख्या बढ़ाकर या घटाकर. वजह यह है कि सीटों में किसी भी फेरबदल का सीधा असर राज्यों के बीच राजनीतिक ताकत के मौजूदा संतुलन पर पड़ेगा.

ये भी पढ़ें

जनसंख्या नियंत्रण में आगे, फिर भी नुकसान की आशंका

तिरुचि शिवा ने चिंता जताई कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया, उन्हें ही परिसीमन की किसी नई प्रक्रिया में कम सीटें मिलने का खतरा है. उनका कहना था कि केंद्र सरकार ने अब तक इस पूरी कवायद को लेकर कोई साफ और पारदर्शी खाका जनता के सामने नहीं रखा, जिससे राज्यों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है.

25 साल तक सीटों में बदलाव न करने की मांग

डीएमके सांसद ने सुझाव दिया कि अगर परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी घटने का खतरा दिखे, तो बेहतर यही होगा कि लोकसभा की 543 सीटों की मौजूदा संख्या को अगले 25 साल तक जस का तस रखा जाए. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह परिसीमन को लेकर अपनी नीयत और नीति दोनों जल्द से जल्द सार्वजनिक करे. साथ ही, देश के संघीय ढांचे और हर राज्य के हितों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को इस संवेदनशील मसले पर टालमटोल की बजाय ठोस रुख अपनाना चाहिए.

दक्षिणी राज्यों की पुरानी आशंका फिर सामने आई

तिरुचि शिवा की यह टिप्पणी उस बहस को फिर हवा देती है, जो दक्षिण भारत में काफी समय से चल रही है. वहां के कई नेता लगातार यह आशंका जताते रहे हैं कि आने वाले वर्षों में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने पर संसद में उनके राज्यों की आवाज और सीटों की तादाद, दोनों घट सकती हैं.

सवाल-जवाब

क्या डीएमके महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है?
हां, पार्टी समर्थन करती है, लेकिन शर्त है कि यह आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही लागू हो.
तिरुचि शिवा ने परिसीमन पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए.
डीएमके की मुख्य मांग क्या है?
पार्टी चाहती है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक न बदली जाए.
यह बयान कब आया?
डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने यह बयान रविवार को दिया.
दक्षिणी राज्यों को किस बात का डर है?
उन्हें आशंका है कि परिसीमन से भविष्य में संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है, खासकर उन राज्यों का जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है.
केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाया गया?
तिरुचि शिवा ने कहा कि सरकार ने अब तक परिसीमन को लेकर कोई ठोस और पारदर्शी फॉर्मूला सामने नहीं रखा है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR