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पेपर लीक पर पटना में RJD का राजभवन मार्च, पुलिस की पानी की बौछार के बीच बैरिकेड पर चढ़कर गरजे तेजस्वी यादवराजनीति
19 अग॰ 2026, 11:57 pm (23 दिन पहले)· 2

पेपर लीक पर पटना में RJD का राजभवन मार्च, पुलिस की पानी की बौछार के बीच बैरिकेड पर चढ़कर गरजे तेजस्वी यादव

बिहार में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ RJD नेता तेजस्वी यादव ने पटना में राजभवन तक विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की पानी की बौछार और हिरासत में लिए जाने के बावजूद तेजस्वी यादव ने AK-47 फायरिंग मामले पर सरकार से जवाब मांगा।

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस विवाद को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कार्यकर्ताओं संग सड़क पर उतरे और पटना में राजभवन तक विरोध मार्च निकाला। पांच साल के लंबे समय बाद तेजस्वी यादव सड़क पर नारे लगाते हुए नजर आए। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामकर गांधी मैदान में एकत्र हुए थे। छात्रों की मांगों को लेकर आयोजित इस मार्च को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम कर रखे थे।

इनकम टैक्स चौराहे पर पानी की बौछार और तेजस्वी यादव हिरासत में

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांधी मैदान से आगे बढ़ते हुए इनकम टैक्स चौराहे तक जाने दिया। इसके बाद जब कार्यकर्ताओं ने राजभवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई और माहौल गर्मा गया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर कोई लाठीचार्ज या सख्त बल प्रयोग नहीं किया, लेकिन बैरिकेड हटाने की कोशिश कर रहे लोगों को पीछे धकेलने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

पानी में पूरी तरह भीगने के बाद भी तेजस्वी यादव बैरिकेड पर चढ़ गए और सम्राट चौधरी की सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस ने तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें बस में बैठाकर ले गई और बाद में पटना स्थित RJD दफ्तर के बाहर ले जाकर छोड़ दिया।

AK-47 से फायरिंग पर सवाल और तेजस्वी का सरकार पर हमला

हिरासत से छूटने के बाद RJD दफ्तर के बाहर तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी यादव ने साफ किया कि जब तक सरकार यह स्पष्ट नहीं करती कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 से गोलियां चलाने का आदेश किसने दिया था, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेगा।

इस पूरे मामले की शुरुआत सीवान में हुई एक घटना से जुड़ी है। सीवान में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने अपनी AK-47 राइफल से हवा में गोलियां चलाई थीं। हालांकि इस फायरिंग में कोई भी घायल नहीं हुआ था, लेकिन पुलिस जवान द्वारा AK-47 से फायरिंग का वीडियो सामने आते ही तेजस्वी यादव ने इसे सम्राट चौधरी की सरकार के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

डमी AK-47 से प्रदर्शन पर BJP का पलटवार

राजभवन मार्च के दौरान RJD कार्यकर्ताओं ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अपने साथ 2 डमी AK-47 राइफल लेकर पहुंचे थे और उन्होंने रास्ते में छात्रों पर AK-47 से गोलीबारी की एक्टिंग करके दिखाई। इस तरह के प्रदर्शन को लेकर सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया।

बिहार BJP के अध्यक्ष संजय सरावगी ने डमी हथियारों के इस्तेमाल वाले इस प्रदर्शन की कड़े शब्दों में निंदा की। संजय सरावगी ने कहा कि यह प्रदर्शन RJD की पुरानी मानसिकता का प्रत्यक्ष सबूत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू यादव के शासनकाल में बिहार में सरेआम AK-47 चला करती थी और तेजस्वी यादव बिहार को एक बार फिर उसी खौफनाक दौर में वापस ले जाना चाहते हैं।

पुलिस की सफाई और मामले की पूरी पृष्ठभूमि

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव को काफी समय के बाद सड़कों पर उतरने का एक बड़ा मौका मिला है और वे इसका पूरा राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। लेकिन उनका पूरा ध्यान केवल इस एक सवाल पर टिक गया है कि सीवान में AK-47 से गोलियां किसने और क्यों चलाई थीं।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर पुलिस प्रशासन की आधिकारिक सफाई आ चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि जिस जवान ने AK-47 से गोलियां चलाई थीं, उसकी ड्यूटी भीड़ को नियंत्रित करने के काम में नहीं लगाई गई थी। वह पुलिसकर्मी केवल उस रास्ते से गुजर रहा था और उसने हवा में गोलियां दागी थीं। गनीमत यह रही कि गोली किसी भी छात्र या नागरिक को नहीं लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

गौर करने वाली बात है कि इससे पहले भी तेजस्वी यादव का एक बयान काफी चर्चा में रहा था, जो उन्होंने अपने बड़े भाई तेज प्रताप और कई छात्रों की गिरफ्तारी के बाद दिया था। उस समय भी तेजस्वी यादव ने राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की कड़ी चेतावनी दी थी।

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सवाल-जवाब

तेजस्वी यादव ने पटना में राजभवन मार्च क्यों निकाला?
तेजस्वी यादव ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों की आवाज उठाने के लिए राजभवन मार्च निकाला।
पटना में RJD के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने क्या कदम उठाए?
पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को इनकम टैक्स चौराहे पर रोका और बैरिकेड हटाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछार (वॉटर कैनन) का इस्तेमाल किया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान AK-47 फायरिंग का मुद्दा क्यों उठा?
हाल ही में सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा हवा में AK-47 से गोलियां चलाने का वीडियो सामने आया था, जिसे तेजस्वी यादव ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया।
सीवान में AK-47 चलाने वाले पुलिसकर्मी पर क्या कार्रवाई की गई?
पुलिस प्रशासन ने बताया कि वह जवान भीड़ नियंत्रण ड्यूटी में नहीं था और हवा में गोलियां चलाने वाले उस पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
RJD के इस प्रदर्शन पर BJP ने क्या प्रतिक्रिया दी?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रदर्शन में डमी AK-47 के इस्तेमाल को RJD की पुरानी मानसिकता का सबूत बताया और कहा कि लालू राज में बिहार में खुलेआम AK-47 चलती थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से यह प्रदर्शन एक बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा मोड़ पर खड़ा है। सीवान में पुलिसकर्मी द्वारा भीड़ के बीच एके-47 से हवाई फायरिंग और अब पटना में राजभवन मार्च के दौरान डमी हथियारों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि छात्र आंदोलन और राजनीतिक विरोध अब और अधिक आक्रामक रुख अख्तियार कर चुके हैं। भविष्य में यदि पुलिस बल प्रयोग या हिरासत की यह रणनीति जारी रही, तो यह टकराव राज्यभर में हिंसक झड़पों या व्यापक विधि-व्यवस्था संकट में बदल सकता है, जिसकी जाँच और कानूनी जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·22 दिन पहले

यह घटना बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। पाँच साल बाद तेजस्वी यादव का इस तरह सीधे सड़क पर उतरना और पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दे पर आक्रामक तेवर अपनाना आगामी चुनावों से पहले सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब युवा शक्ति और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दे मुखर होते हैं, तो प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध प्रदर्शनों का यह संघर्ष राज्य की संपूर्ण चुनावी दिशा और राजनीतिक समीकरण को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

तेजस्वी यादव का पांच साल बाद इस प्रकार सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि विपक्ष परीक्षा में धांधली और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को आगामी राजनीतिक रणनीति का मुख्य आधार बनाना चाहता है। सीवान की घटना में एके-47 से फायरिंग और प्रशासनिक जवाबदेही का यह मामला केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा चुनावी संघर्ष बन सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गहरे सवाल खड़े होंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

सहकर्मी के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह ध्यान देना आवश्यक है कि जब इस तरह के राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक अव्यवस्था के मुद्दे सड़कों पर आते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव राज्य के आर्थिक माहौल और निवेश संभावनाओं पर पड़ता है। बिहार में बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी ऐसी घटनाएं राज्य में रोजगार सृजन और युवा कार्यबल की उत्पादकता को बाधित करती हैं। यदि शासन स्तर पर पारदर्शिता और संस्थागत सुधार जल्द सुनिश्चित नहीं किए गए, तो यह अनिश्चितता औद्योगिक विकास और कॉरपोरेट निवेश के दृष्टिकोण से एक बड़ा नकारात्मक संदेश दे सकती है, जिससे राज्य का कारोबारी विश्वास प्रभावित हो सकता है।

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