दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों में उस समय सरगर्मी तेज हो गई जब थलापति विजय की पार्टी और कांग्रेस के बीच आगामी राष्ट्रीय चुनावों के नेतृत्व को लेकर तकरार खुलकर सामने आ गई। तमिलनाडु की राजनीति में यह नया विवाद साल 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर पैदा हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस खींचतान से राज्य के विपक्षी खेमे में दूरियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि दोनों दल अपने-अपने नेता को शीर्ष पद पर देखना चाहते हैं।
सहयोगियों की बैठक और आमंत्रण पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच थलापति विजय की पार्टी टीवीके ने अपने साझीदार दलों की एक अहम बैठक 9 सितंबर को बुलाई है। इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि इसमें गठबंधन के प्रमुख सहयोगियों को शामिल किया जा रहा है या नहीं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं आधव अर्जुन, राज मोहन और आर. निर्मल कुमार ने इस सिलसिले में वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय संगठनों से संपर्क साधा है। हालांकि इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या कांग्रेस को इस बुलावा सूची में जगह दी गई है या इसे कांग्रेस के बिना ही आयोजित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर असहमति
विवाद की मुख्य जड़ यह है कि टीवीके के कई नेता खुलकर थलापति विजय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी इस पद के लिए राहुल गांधी के नाम पर मजबूती से अड़ी हुई है। इसी बीच एमडीएमके प्रमुख वाइको ने इस बैठक में अपनी पार्टी की उपस्थिति पर मुहर लगा दी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन राहुल गांधी के साथ है। वाइको ने यह भी सलाह दी कि थलापति विजय को खुद ऐसे बयानों से बचना चाहिए और अपने नेताओं को इस तरह की मुहिम चलाने से रोकना चाहिए।
विधायकों के तीखे बयान और दावों का दौर
पार्टी के भीतर से आ रहे बयानों ने इस राजनीतिक घमासान को और हवा दे दी है। कवुंडमपालयम से ताल्लुक रखने वाली विधायक कनिमोझी ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि साल 2029 में देश के सर्वोच्च पद के लिए उनकी पार्टी की पसंद सिर्फ थलापति विजय होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली की राजनीति की दिशा तय करने में तमिलनाडु की बड़ी भूमिका होगी और अंततः कांग्रेस भी उनके नेता का समर्थन करेगी। रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा और आर. निर्मल कुमार समेत कई अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की आवाज उठाई है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और गठबंधन का भविष्य
इन तमाम दावों के बीच कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं आया है। कांग्रेस का पक्ष है कि गठबंधन की ओर से राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के निर्विवाद चेहरे बने रहेंगे। कांग्रेस विधायक दल की नेता ताराहाई कथबर्ट ने इन बयानों को नए विधायकों की केवल दीवानगी करार दिया। वहीं, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने इन सारी चर्चाओं को जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में विपक्षी एकता की राह आसान नहीं होगी।


















