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पलामू की अनु दुबे सब्जियों के छिलकों से बना रही हैं जैविक खाद, छह साल से चला रही हैं छत का किचन गार्डनझारखंड
5 सित॰ 2026, 11:04 am (16 मिनट पहले)· 2

पलामू की अनु दुबे सब्जियों के छिलकों से बना रही हैं जैविक खाद, छह साल से चला रही हैं छत का किचन गार्डन

पलामू जिले की मेदिनीनगर निवासी अनु दुबे सब्जियों के अवशेष, चावल की भूसी, मिट्टी और बालू से जैविक खाद तैयार कर रही हैं, जिसे वह अपने घर की छत पर बने किचन गार्डन में इस्तेमाल करती हैं।

झारखंड के पलामू जिले की मेदिनीनगर में रहने वाली अनु दुबे रसोई से निकलने वाले सब्जियों के छिलकों और बचे हुए हिस्सों को कचरे में फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार कर रही हैं। इस खाद को बनाने में वह चावल की भूसी, मिट्टी, सब्जियों के अवशेष और बालू जैसी घर में ही आसानी से मिल जाने वाली चीजों का इस्तेमाल करती हैं, और करीब एक महीने की प्रक्रिया के बाद यह मिश्रण खाद के रूप में तैयार हो जाता है।

छह साल से खेती से जुड़ीं, छत पर बनाया किचन गार्डन

अनु दुबे पिछले करीब छह वर्षों से खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई हैं। जमीन की कमी उनके शौक के आड़े नहीं आई, उन्होंने अपने घर की छत को ही सब्जियां और दूसरे पौधे उगाने की जगह बना लिया। इसी छत पर बने किचन गार्डन में वह सब्जियां और पौधे तो उगाती ही हैं, साथ ही उनके लिए जरूरी खाद भी खुद तैयार करती हैं। उनका कहना है कि घर में रोजाना निकलने वाले जैविक कचरे को फेंकने के बजाय उसका सही इस्तेमाल कर खाद बनाई जा सकती है, जिससे कचरा भी कम होता है और पौधों को पोषण भी मिलता है।

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चार चीजों से तैयार होती है यह जैविक खाद

अनु दुबे के मुताबिक खाद तैयार करने का तरीका काफी आसान है। सबसे पहले सब्जियां काटने के बाद बचे हुए छिलके और अवशेष इकट्ठा किए जाते हैं। इसके बाद इसमें चावल की भूसी, मिट्टी और बालू मिलाई जाती है। इस पूरे मिश्रण को एक जगह रखकर करीब एक महीने तक प्रोसेस होने दिया जाता है। इस दौरान मिश्रण में नमी बनाए रखना जरूरी होता है और समय-समय पर इसे पलटते रहना पड़ता है, ताकि उसमें मौजूद जैविक पदार्थ ठीक से विघटित हो सकें। धीरे-धीरे यही मिश्रण भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदल जाता है।

गमलों और क्यारियों के लिए फायदेमंद

अनु दुबे बताती हैं कि तैयार खाद को गमलों और क्यारियों की मिट्टी में मिलाकर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रसोई से रोज निकलने वाले जैविक कचरे का बेहतर उपयोग हो जाता है, और घर पर किचन गार्डन तैयार करने वाले लोगों को बाजार से खाद खरीदने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो जाती है। यानी एक तरफ कचरा कम होता है, तो दूसरी तरफ पौधों को प्राकृतिक पोषण भी मिलता रहता है।

इन चीजों को खाद में मिलाने से बचें

हालांकि अनु दुबे यह भी सतर्क करती हैं कि खाद बनाते समय हर तरह का कचरा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। प्लास्टिक, कांच, धातु, रासायनिक पदार्थ और तेल-मसाले वाला कचरा इस मिश्रण में कतई नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि इससे खाद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और यह पौधों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

अनु दुबे कौन हैं और वह क्या करती हैं?
वह झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर की निवासी हैं और अपने घर की छत पर बने किचन गार्डन के लिए जैविक खाद तैयार करती हैं।
खाद बनाने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?
सब्जियों के कटे हुए अवशेष, चावल की भूसी, मिट्टी और बालू को मिलाकर यह खाद तैयार की जाती है।
खाद तैयार होने में कितना समय लगता है?
मिश्रण को करीब एक महीने तक प्रोसेस किया जाता है, इस दौरान नमी बनाए रखनी होती है और समय-समय पर उसे पलटना पड़ता है।
यह खाद किस काम आती है?
तैयार खाद को गमलों और क्यारियों की मिट्टी में मिलाकर पौधों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
खाद बनाते समय किन चीजों से बचना चाहिए?
प्लास्टिक, कांच, धातु, रासायनिक पदार्थ और तेल-मसाले वाला कचरा खाद में नहीं मिलाना चाहिए।
अनु दुबे कब से खेती कर रही हैं?
वह पिछले करीब छह वर्षों से खेती से जुड़ी हुई हैं।
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