शिक्षक दिवस के मौके पर नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए शिक्षकों के योगदान को याद किया और डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी। इसी पोस्ट में उन्होंने एक दिन पहले 7, एलकेएम में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया और उससे जुड़ा एक वीडियो लिंक साझा किया।
मोदी ने पोस्ट में क्या लिखा
मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, "शिक्षक दिवस हमारे समाज में शिक्षकों के मजबूत योगदान की सराहना करने का दिन है।" उन्होंने आगे बताया कि यह दिन डॉ. एस. राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देने का भी अवसर है। इसके साथ ही उन्होंने एक दिन पहले राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं को 7, एलकेएम बुलाए जाने के दौरान क्या हुआ, इसका जिक्र करते हुए एक वीडियो का लिंक भी दिया, हालांकि पोस्ट में मुलाकात का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं की मुलाकात
7, एलकेएम में हुई इस मुलाकात में उन शिक्षकों को बुलाया गया था जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार हर साल स्कूली शिक्षा में योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, और आमतौर पर विजेताओं के सम्मान समारोह शिक्षक दिवस के आसपास ही आयोजित किए जाते हैं। मोदी की पोस्ट से पता चलता है कि इस साल के विजेताओं को शिक्षक दिवस से एक दिन पहले मुलाकात के लिए बुलाया गया था, हालांकि पोस्ट में बातचीत का ब्योरा साझा नहीं किया गया।
5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस
भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, क्योंकि यह डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है। डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षक के रूप में काम किया और बाद में देश के सबसे बड़े पदों में से एक तक पहुंचे। इस दिन देशभर के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के योगदान को सम्मान दिया जाता है, क्योंकि उन्हीं की मेहनत से आने वाली पीढ़ियां और आखिरकार पूरा देश आकार लेता है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने शिक्षकों के योगदान को याद किए जाने पर मोदी का शुक्रिया अदा किया और अच्छे शिक्षकों के जीवन पर पड़ने वाले असर की बात कही। वहीं कुछ यूजर्स ने आलोचनात्मक और तीखे सवाल भी उठाए, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय में मोदी को पढ़ाने वाले शिक्षकों के नाम पूछे गए और बंद पड़े सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने के साथ नई शिक्षक भर्ती की मांग की गई। कुछ अन्य प्रतिक्रियाओं में काशी में हो रहे विकास कार्यों का जिक्र भी किया गया।


























