कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेता प्रकाश राज ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एंटी-एसआईआर संघर्ष के तहत आगामी 23 अक्टूबर को पूरे राज्य में जनता मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर राज्य के विभिन्न जिलों में भी कड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए राज्य के कई प्रमुख किसान और दलित संगठन एकजुट होकर मैदान में उतर रहे हैं।
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद किसान और दलित संगठनों के प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले आयोग पर अब गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। प्रतिनिधियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तानाशाही रवैया अपनाने, मनमाने और गैर-कानूनी फैसले लेने तथा सीधे तौर पर सत्ताधारी दल के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पाबंदियों का मुद्दा
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर का विरोध कर रहे लोगों की शांतिपूर्ण आवाज़ सुनने के बजाय केंद्र सरकार उसे बलपूर्वक कुचलने का प्रयास कर रही है। स्थिति यह है कि दिल्ली को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। ऐतिहासिक विरोध स्थल जंतर-मंतर पर भी भारी पाबंदियां लगाकर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई है। आरोप लगाया गया कि सत्ता में बैठे लोगों द्वारा युवाओं पर हमला करने के लिए वर्दीधारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि महिला पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करने वालों को बचाया जा रहा है। इसके विपरीत, तिरंगा थामकर विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को पकड़कर जेल भेजा जा रहा है और उन पर मुकदमे लादे जा रहे हैं।
सड़क पर उतरने का निर्णय
किसान और दलित संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना था कि अब मूक दर्शक बनकर चुपचाप बैठना संभव नहीं है। इसी लाचारी और अन्याय के खिलाफ अब सीधे सड़क पर उतरकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया है, जिसके तहत 23 अक्टूबर को पूरे कर्नाटक में व्यापक स्तर पर जनता मार्च निकालने का आह्वान किया गया है।
प्रकाश राज की तीखी प्रतिक्रिया
अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई, तो यह विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर से भी अधिक व्यापक रूप ले लेगा। जिन किसानों ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी को झुकने के लिए मजबूर कर दिया था, वे अब इस बड़े विरोध प्रदर्शन का अहम हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 23 अक्टूबर को राज्य के हर एक जिले में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
राजनीतिक व्यवस्था और आगामी चुनावों पर बयान
प्रकाश राज ने आगे कहा कि वे व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं, लेकिन दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे नैरेटिव इस महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर के देश में सफल नहीं हो सकते। यदि विरोध की हर आवाज़ को लाठियों और सुरक्षा बलों की तैनाती से कुचला जाएगा, तो देश की जनता सब देख रही है और आने वाले समय में अपने मताधिकार का प्रयोग कर बीजेपी की सत्ता को बदल देगी। उन्होंने दावा किया कि इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी और देश की जनता वर्ष 2029 में अपने वोट की ताकत से मोदी सरकार को भी सत्ता से बेदखल कर देगी।
सौरभ और आशुतोष की रिहाई की मांग
बेंगलुरु में बोलते हुए प्रकाश राज ने यह भी सवाल उठाया कि एक अभिनेता को कोई कैसे गोली मार सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मासूम युवाओं पर लाठियां भांजने और तिरंगा लहराने वालों को जेल में डालने के बजाय असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। सौरभ और आशुतोष को तुरंत रिहा किए जाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि जज को धमकी देने वाले व्यक्ति का नंबर मौजूद होने के बावजूद उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है, जबकि इन दोनों बेकसूर युवकों को जेल में डाला गया है। क्या इन दोनों ने जज को फोन करके धमकी दी थी?

















