कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश यात्रा पर निकल पड़े हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी गत रात्रि 11 बजकर 35 मिनट पर दिल्ली से वियतनाम के हनोई शहर के लिए रवाना हुए। उनके इस अचानक विदेश जाने की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब देश की सियासत गरमाई हुई है।
इससे पहले राहुल गांधी लगातार एसआईआर और वोट चोरी के गंभीर मुद्दों को उठाते हुए चुनाव आयोग पर हमलावर थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे थे। अचानक इन गतिविधियों के बीच उनका वियतनाम चले जाना चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सक्रिय दौर में विदेश जाना विपक्ष की आक्रामक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
भाजपा का तीखा हमला
भारतीय जनता पार्टी ने इस दौरे को लेकर राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि राहुल गांधी वही कर रहे हैं जिसमें वे सबसे आगे रहते हैं, यानी आराम करना और छुट्टियां बिताना। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर राहुल गांधी देश से बाहर क्या कर रहे हैं और क्या वे अपने अराजक साथियों से मिलने गए हैं।
प्रदीप भंडारी ने आगे कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जो जनता के बीच रहने और मेहनत करने के बजाय अधिकांश समय आराम में बिताता है, उसे ही बाद में यह चिल्लाने का मौका मिल जाता है कि वोट चोरी हो गया है। भाजपा लगातार यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वे जनता के असल मुद्दों से दूर भागने वाले नेता हैं।
कांग्रेस और सहयोगियों का पलटवार
भाजपा के इन हमलों का जवाब देते हुए कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि यदि राहुल गांधी विदेश यात्रा पर हैं, तो इससे तो सत्तारूढ़ दल को खुश होना चाहिए क्योंकि इससे उनकी अपनी ही परेशानी कम हो गई है। कांग्रेस खेमे का मानना है कि विरोधियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि कोई निजी दौरे पर कहां जा रहा है।
इस बीच राहुल गांधी के समर्थन में समाजवादी पार्टी भी खुलकर मैदान में उतर आई है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामशंकर राजभर ने बयान दिया कि राहुल का बाहर जाना असल में भाजपा के लिए राहत की बात होनी चाहिए, क्योंकि अगर वे देश में रहते तो लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखते।
पुराने आंकड़े और अन्य प्रतिक्रियाएं
राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। लगभग 5 महीने पहले भी भाजपा ने इसी तरह के मामलों पर कांग्रेस को घेरा था और दावा किया था कि 22 साल की अवधि में राहुल गांधी 54 बार विदेश यात्रा पर जा चुके हैं। उस समय उनकी फंडिंग और खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए गए थे।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भी इस मौके पर अपनी प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी को नसीहत दी कि यदि राजनीति में चुनाव जीतना है, तो जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना पड़ता है, न कि बार-बार विदेश जाकर सैर-सपाटा करना चाहिए।
संदीप दीक्षित का बचाव
पार्टी की ओर से बचाव करते हुए कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा कि देश में हर नागरिक को विदेश जाने की स्वतंत्रता है और हर कोई कभी न कभी बाहर जाता है। उन्होंने सवाल किया कि इस सामान्य यात्रा पर भाजपा खेमे में इतनी खलबली क्यों मच जाती है।
संदीप दीक्षित ने आगे कहा कि भाजपा के पास देश का पूरा तंत्र और सरकारी मशीनरी मौजूद है, यदि वे चाहें तो मिनटों में यह पता लगा सकते हैं कि राहुल गांधी कहां गए हैं। जब सब कुछ उनकी पहुंच में है, तो इस विषय पर इतनी अधिक बयानबाजी और हायतौबा मचाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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