कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी समन और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृति न मिलने के कारण अदालत ने यह कदम उठाया।
अदालत की सुनवाई और सरकारी मंजूरी का मुद्दा
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से सीधा सवाल किया कि क्या सरकार ने मुकदमा चलाने की औपचारिक मंजूरी दी है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने ऐसी कोई मंजूरी प्रदान नहीं की है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि दंड प्रक्रिया के तहत बिना सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होने के कारण कोर्ट ने पाया कि मंजूरी के अभाव में केस आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं बचता।
2022 की सावरकर टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद 2022 में राहुल गांधी की महाराष्ट्र यात्रा के दौरान दिए गए एक भाषण से पैदा हुआ था। भारत जोड़ो यात्रा के एक चरण में उन्होंने सावरकर के संबंध में तीखे बयान दिए थे, जिसमें उन्हें अंग्रेजों का नौकर और ब्रिटिश शासन से पेंशन प्राप्त करने वाला बताया गया था। इस बयान के खिलाफ एडवोकेट नृपेंद्र पांडे ने लखनऊ की निचली अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शुरुआती तौर पर IPC 153(A) और IPC 505 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनते देख राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई और सख्त चेतावनी
इससे पहले पिछले वर्ष जुलाई के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन पर अंतरिम रोक लगाई थी। उस दौरान राहुल गांधी का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और वकील प्रसन्ना एस. ने रखा था। पीठ ने उस सुनवाई में राजनीतिक नेताओं को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति बयानबाजी करते समय सावधानी बरतने की सख्त हिदायत दी थी। जस्टिस दत्ता ने कहा था कि यदि भविष्य में ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कोई अपमानजनक बयान दिया जाता है, तो अदालत खुद संज्ञान लेगी और उस स्थिति में किसी सरकारी मंजूरी की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।
राहुल गांधी से जुड़ी अन्य याचिकाएं
इसी कानूनी घटनाक्रम के बीच कांग्रेस नेता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ भी शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है जिसमें उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच करने के निर्देश दिए गए थे। उस मामले में ED और CBI से जांच की सिफारिश की गई थी, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय में विचार किया जा रहा है।



















