संसद के मानसून सत्र 2026 के दौरान बुधवार को राज्यसभा में हंगामा देखने को मिला, जब छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। नीट परीक्षा पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की इस कार्रवाई से देश में लोकतंत्र और नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक सामान्य प्रक्रिया बताया और विपक्ष पर इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देकर सनसनी फैलाने का आरोप लगाया।
राज्यसभा में छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर तीखी तकरार
संसद का 2026 का मानसून सत्र नीट पेपर लीक मामले और राजधानी दिल्ली में छात्रों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के कारण लगातार बाधित हो रहा है। सदन में यह तकरार तब और बढ़ गई जब पिछले सप्ताह संसद भवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का मुद्दा राज्यसभा में गूंजा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने की मांग की।
सदन में अपनी बात रखते हुए खड़गे ने कहा, "जिन लोगों ने विरोध कर रहे छात्रों पर हमला किया, वे तो खुलेआम घूम रहें हैं." उन्होंने सवाल किया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे विद्यार्थियों पर कार्रवाई क्यों की गई। खड़गे ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और एसएफआई की नेता आइशी घोष को हिरासत में लेने के प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल के दफ्तर में घुसकर कार्रवाई करना बेहद गंभीर बात है और ऐसी घटनाओं से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरा आघात पहुंचता है।
खड़गे के इन वक्तव्यों के बाद विपक्ष के अन्य सांसदों ने भी नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे उच्च सदन में भारी शोर-शराबा होने लगा। विपक्ष के नेताओं ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस पूरे घटनाक्रम पर सदन में आकर आधिकारिक जवाब दें और विरोध कर रहे छात्रों पर कार्रवाई का आदेश देने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर सख्त कदम उठाएं।
सरकार का रुख: कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया
विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सामने आए। जेपी नड्डा ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह से स्थापित नियमों और कानून के दायरे में रहकर काम किया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पुलिस का एकमात्र उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना और संसद मार्ग पर सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करना था।
सदन को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, "यह कानून-व्यवस्था की एक बहुत ही सामान्य स्थिति थी जिसे हमें समझना होगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति छात्र राजनीति या किसी भी प्रकार की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता में भाग लेता है, उसे इस तरह की प्रशासनिक और पुलिस प्रक्रियाओं का सामना करना ही पड़ता है। नड्डा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वे एक सामान्य घटनाक्रम को बेवजह तूल दे रहे हैं और राजनीतिक लाभ के लिए इसे सनसनीखेज बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
आपातकाल के दिनों को याद कर जेपी नड्डा ने दिया अपना तर्क
छात्र सक्रियता और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ को और स्पष्ट करने के लिए जेपी नड्डा ने अपने छात्र जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय देश में लागू किए गए आपातकाल के दौर का स्मरण कराया, जब वे स्वयं एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न आंदोलनों में हिस्सा लिया करते थे। नड्डा ने बताया कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें भी कांग्रेस शासन के दौरान कई बार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
अपने अनुभवों का उदाहरण देते हुए नड्डा ने कहा कि छात्र आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत या गिरफ्तारी जैसी स्थितियों से गुजरना पड़ता है और यह किसी भी दौर की राजनीति में एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है। उन्होंने कहा कि इसे लोकतंत्र पर खतरा बताना पूरी तरह गलत है। हालांकि, सरकार के इस स्पष्टीकरण के बावजूद राज्यसभा में गतिरोध बना रहा, जिससे साफ है कि नीट परीक्षा की शुचिता, छात्र कल्याण और पुलिस की भूमिका पर राजनीतिक खींचतान अभी जारी रहेगी।



















