उत्तराखंड के हल्द्वानी में आयोजित जनसभा के बाद सामने आए कथित शुद्धीकरण विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष और उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गहरा रोष प्रकट किया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को प्रेषित अपने पत्र में घटना के लगभग 24 दिन बीत जाने के उपरांत भी पुलिस द्वारा कोई मामला दर्ज न किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। खरगे ने स्पष्ट किया कि 8 अगस्त को आयोजित रैली के बाद सार्वजनिक स्थल पर किए गए इस अनुष्ठान के विरुद्ध अब तक किसी भी जिम्मेदार संस्था या व्यक्ति पर वैधानिक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, जो कि अत्यंत खेदजनक है।
संसदीय आश्वासन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अपने पत्र में मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 अगस्त को संसद के उच्च सदन में इस विषय पर हुई चर्चा का स्मरण कराया। उन्होंने लिखा कि राज्यसभा में उन्होंने अत्यंत दुख और पीड़ा के साथ 8 अगस्त की हल्द्वानी जनसभा के पश्चात स्थल के कथित शुद्धीकरण का मुद्दा उठाया था। खरगे के अनुसार, किसी सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार का अनुष्ठान सीधे तौर पर छुआछूत की भावना और सामाजिक भेदभाव को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बल दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों वाले देश में ऐसी कुप्रथाओं को किसी भी सूरत में अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने जेपी नड्डा द्वारा राज्यसभा में दिए गए वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्हें उनके शब्दों की याद दिलाई। सदन में चर्चा के दौरान जेपी नड्डा ने कहा था, "मल्लिकार्जुन खरगे ने जो कहा है, वह सच में बहुत ही दुखदायी विषय है।" नड्डा ने तब स्पष्ट किया था कि भारतीय जनता पार्टी ऐसी सोच या गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, खरगे ने शिकायत की कि इस आधिकारिक आश्वासन के बावजूद 24 दिन बीत जाने पर भी हल्द्वानी में इस कृत्य को अंजाम देने वाले संगठनों या व्यक्तियों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है।
इतिहास के उदाहरणों से छुआछूत की मानसिकता पर प्रहार
सामाजिक असमानता के संदर्भ को विस्तार देते हुए उन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक महाड़ सत्याग्रह का उल्लेख किया। खरगे ने लिखा कि जब अंबेडकर ने सार्वजनिक जलाशय से जल ग्रहण किया था, तब भी जातिवादी दंभ से ग्रस्त लोगों ने 108 घड़े गोमूत्र और गोबर मिश्रित जल डालकर मंत्रोच्चार पूर्वक स्थल का शुद्धीकरण किया था। खरगे ने इस उदाहरण के जरिए रेखांकित किया कि आधुनिक दौर में भी ऐसी रूढ़िवादी सोच का दोहराव समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
इस विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए खरगे ने स्पष्ट कहा, "सिर्फ मंत्रोच्चार या हवन करने से शुद्धीकरण की जातिवादी प्रक्रिया पावन नहीं हो जाती है।" उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत रोष नहीं है, बल्कि देश के उन करोड़ों नागरिकों की सामूहिक पीड़ा की अभिव्यक्ति है जो दैनिक जीवन में इस प्रकार की क्रूर वास्तविकता का सामना करते हैं। रामलीला मैदान जैसे सार्वजनिक मंच पर इस तरह की गतिविधि भारत के संविधान में निहित समानता और मानवीय गरिमा के मूल सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करती है।
उत्तराखंड प्रशासन को निर्देश देने की मांग
पत्र के अंतिम भाग में मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री से त्वरित हस्तक्षेप का आग्रह किया। उन्होंने मांग की कि जेपी नड्डा राज्यसभा में दिए गए अपने आश्वासन और उपलब्ध तथ्यों के आलोक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। खरगे ने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 8 अगस्त की जनसभा के बाद रामलीला मैदान में छुआछूत से प्रेरित शुद्धीकरण करने वाले सभी संबंधित संगठनों और व्यक्तियों पर अविलंब एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।



















