भारतीय राजनीति के पटल पर साल 2027 बेहद सरगर्मियों भरा साबित होने जा रहा है, क्योंकि इस एक ही वर्ष में देश के कुल सात राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव संपन्न होने तय हैं। राजनीतिक गलियारों में अभी से ही विभिन्न दलों के बीच सियासी बयानबाजी और रणनीतिक तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। जहां एक तरफ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर वर्चस्व की लड़ाई छिड़ेगी, वहीं दूसरी तरफ हिमालयी राज्यों से लेकर पश्चिमी और पूर्वोत्तर भारत तक नई सरकारें चुनने की प्रक्रिया चलेगी। इसके साथ ही केंद्र के स्तर पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्रपति के चुनाव का आयोजन भी इसी वर्ष होना है, जो राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से निर्णायक साबित होगा।
साल के आरंभिक महीनों में पांच राज्यों का सियासी इम्तिहान
साल 2027 की शुरुआत पांच प्रमुख राज्यों के चुनावी घमासान के साथ होगी। इन पांचों राज्यों की वर्तमान विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च से मई 2027 के मध्य समाप्त हो रहा है, जिस वजह से फरवरी और मार्च 2027 के दौरान यहां मतदान संपन्न कराए जाने की प्रबल संभावना है। इन राज्यों में सीटों का संख्याबल और चुनावी तस्वीर इस प्रकार है
- उत्तर प्रदेश: देश का सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा जहां कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और यहां की सत्ता पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करती है।
- पंजाब: उत्तर भारत का महत्वपूर्ण राज्य जहां कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और यहां मुकाबला हमेशा बहुकोणीय रहता है।
- उत्तराखंड: कुल 70 विधानसभा सीटों वाला यह पर्वतीय राज्य सत्ता की नई परीक्षा से गुजरेगा।
- गोवा: पश्चिमी तटीय राज्य जहां कुल 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी बिसात बिछाई जाएगी।
- मणिपुर: पूर्वोत्तर भारत का संवेदनशील राज्य जहां कुल 60 विधानसभा सीटों पर नई सरकार का चुनाव होगा।
साल के आखिरी महीनों में गुजरात और हिमाचल का चुनावी रण
साल के शुरुआती दौर के मतदान के बाद, 2027 के उत्तरार्ध में दो राज्यों के चुनाव कराए जाएंगे। इन दोनों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त होने के कारण चुनाव आयोग द्वारा नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी
- हिमाचल प्रदेश: कुल 68 विधानसभा सीटों वाले इस पहाड़ी प्रदेश में नवंबर 2027 के आसपास मतदान होने के आसार हैं।
- गुजरात: प्रधानमंत्री के गृह राज्य में कुल 182 विधानसभा सीटों के लिए दिसंबर 2027 में वोट डाले जाएंगे।
जुलाई 2027 में देश के नए राष्ट्रपति का चुनाव
विधानसभा चुनावों की इस लंबी श्रृंखला के अलावा वर्ष 2027 के मध्य में एक और बहुत बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आएगा। जुलाई 2027 में भारत के राष्ट्रपति का चुनाव संपन्न होना है। इस चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के नए निर्वाचित विधायकों की संख्या और दलों की स्थिति राष्ट्रपति चुनाव के चुनावी समीकरणों पर सीधा असर डालेगी।
जमीनी समीकरण, मुद्दे और जनता के मूड के बड़े सवाल
चुनावी विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि सात राज्यों में जमीन पर जनता का मिजाज किस करवट बैठ रहा है। क्या सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी इंकम्बेंसी का विपक्ष को लाभ मिलेगा, या फिर भारतीय राजनीति से एंटी इंकम्बेंसी का दौर अब पूरी तरह विदा हो चुका है। इसके अलावा चुनावी राजनीति में डायरेक्ट नोट से डायरेक्ट वोट का चलन कितना असरदार रहेगा, यह भी देखने वाली बात होगी। उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से जातियों के वोट बैंक और हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के बीच संतुलन परखने की होड़ मचेगी, जहां एक तरफ अखिलेश के पास जातिगत समीकरणों की ताकत है, तो दूसरी तरफ योगी के साथ हिंदू मतों और आधी आबादी यानी महिला मतदाताओं का झुकाव चर्चा में है।
पंजाब में कमल, उत्तराखंड में धामी और मणिपुर में समीकरण
पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा ड्रग्स का रहा है, जिसके दम पर आम आदमी पार्टी 92 सीटों के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंची थी। अब पांच साल बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि ड्रग्स के मुद्दे पर बीजेपी कहां तक पहुंचती है, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कितनी सीटों पर टिक पाती हैं, और बीजेपी अकाली दल के बिना चुनावी मैदान में कहां ठहरती है या उनके साथ जाने पर क्या स्थिति बनती है। वहीं उत्तराखंड में सवाल उठ रहा है कि क्या धामी फिर सत्ता में लौटेंगे या कांग्रेस अपनी उम्मीदें जगा पाएगी। गोवा में कांग्रेस के अस्तित्व और मणिपुर में कुकी, नागा, मैतेई और ईसाई मतदाताओं के सामाजिक ध्रुवीकरण पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। दूसरी तरफ साल के अंत में होने वाले चुनावों में गुजरात में बीजेपी का किला भेदना विपक्ष के लिए किसी चमत्कार जैसा माना जा रहा है, तो हिमाचल में कांग्रेस की वापसी की संभावनाएं भी बड़ी चुनौती से घिरी नजर आ रही हैं।



















