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समरकंद में होने वाली आईपीयू ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राघव चड्ढाराजनीति
3 सित॰ 2026, 8:18 pm (8 दिन पहले)· 0

समरकंद में होने वाली आईपीयू ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राघव चड्ढा

सांसद राघव चड्ढा उज्बेकिस्तान के समरकंद में होने जा रही इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में भारत की तरफ से शामिल होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नाम आगे बढ़ाए जाने पर उन्होंने आभार जताया है।

भारतीय संसद के सदस्य राघव चड्ढा उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद में आयोजित होने वाले इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे। यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन 4 से 6 सितंबर के बीच संपन्न होगा। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच के लिए उनके नाम का प्रस्ताव रखा था, जिस पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रपति के प्रति गहरा आभार प्रकट किया है। इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली के विचारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से रखा जाएगा।

अपनी इस आगामी यात्रा की घोषणा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की जिसमें वह एयरपोर्ट पर अपने बैग, पासपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया है कि इस वैश्विक सम्मेलन में साझा करने के लिए भारत के पास बहुत कुछ उपयोगी है। गौर करने वाली बात यह है कि उनकी यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता पहली बार नहीं हो रही है। इससे पहले वह पिछले साल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, विश्व आर्थिक मंच द्वारा उन्हें यंग ग्लोबल लीडर के रूप में भी चुना जा चुका है, जो उनकी बढ़ती वैश्विक राजनीतिक पहचान को रेखांकित करता है।

एक्स पर साझा की अपनी भावनाएं

इस सम्मेलन का हिस्सा बनने पर अपनी खुशी साझा करते हुए उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि बारहवें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने जाने पर उन्हें अत्यंत गर्व महसूस हो रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके मनोनयन के लिए उन्होंने भारत के माननीय उपराष्ट्रपति का भी विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया। जिनेवा में अपने मुख्यालय के साथ साल 1889 में स्थापित यह संस्था दुनिया की सबसे पुरानी और विशाल राष्ट्रीय संसदों की संस्था है, जिसके तहत 180 सदस्य संसदों और 15 एसोसिएट सदस्यों का मंच साझा होता है।

मानव अधिकारों और न्याय पर केंद्रित होगी चर्चा

सम्मेलन के एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इस बार की मुख्य थीम चुनौतीपूर्ण समय के बीच हर व्यक्ति के लिए मानवाधिकारों, न्याय और गरिमा को पुनर्स्थापित करना तय की गई है। उन्होंने विस्तार से जानकारी दी कि तीन दिनों तक चलने वाले इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में दुनिया भर के युवा जनप्रतिनिधि आपस में विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान युवाओं के अधिकार, डिजिटल स्वतंत्रता, ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और युवा वर्ग के लिए आर्थिक अवसरों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर बहस होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि यहां की एक बहुत बड़ी आबादी युवा वर्ग से ताल्लुक रखती है, जिसके कारण इन तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारतीय संसद के पास दुनिया को देने और सीखने के लिए भरपूर अनुभव मौजूद है।

प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद हो रहा है यह दौरा

यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उज्बेकिस्तान की एक सफल आधिकारिक यात्रा पूरी की है। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाले कई अहम समझौते संपन्न हुए थे। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सफल दौरे के तुरंत बाद इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनना दोनों देशों की इस साझीदारी के संसदीय आयाम को और अधिक गति प्रदान करने की दिशा में एक छोटा सा योगदान साबित होगा।

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सवाल-जवाब

राघव चड्ढा किस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं?
वह 12वें इंटर-पाराम्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
यह सम्मेलन किस देश में आयोजित हो रहा है?
यह कार्यक्रम उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन का आयोजन कब से कब तक होगा?
यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 4 से 6 सितंबर के बीच संपन्न होगा।
इस कार्यक्रम के लिए उनका नाम किसने आगे बढ़ाया था?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया था।
इस वर्ष के सम्मेलन की मुख्य थीम क्या है?
इस साल की थीम मुश्किल समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा को वापस पाना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

उज्बेकिस्तान के समरकंद में होने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में राघव चड्ढा का नेतृत्व भारत के युवा नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती धमक को दर्शाता है। मानवाधिकार, डिजिटल स्वतंत्रता और जलवायु लचीलेपन जैसे एजेंडे पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के युवा प्रतिनिधि का यह संबोधन कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संसदीय प्रणाली के विचारों को रखना और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना देश की कूटनीतिक साख को और मजबूत करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि वैश्विक मंचों पर भारतीय युवाओं की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का प्रमाण है। समरकंद में मानवाधिकार, डिजिटल सुरक्षा और न्याय जैसे समकालीन मुद्दों पर भारत का पक्ष रखना देश की लोकतांत्रिक सुदृढ़ता को रेखांकित करता है। ऐसे बहुपक्षीय आयोजनों से वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूती मिलती है और विधायी स्तर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए द्वार खुलते हैं।

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