उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के करीब बाराबंकी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सनातन धर्म की रक्षा और देश की सुरक्षा के बीच के गहरे संबंध पर एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। अपनी मुखर राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक विचारधारा के लिए हमेशा से पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि एक अच्छी और प्रभावी सरकार केवल आधुनिक विकास के लिए ही काम नहीं करती, बल्कि वह अपनी प्राचीन विरासत को सहेजने के लिए भी उतनी ही तत्पर रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी यह अनमोल विरासत ही असल में सनातन धर्म की वास्तविक पहचान है। मंच से उपस्थित भारी भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों में चेतावनी दी और कहा कि हर एक नागरिक की सुरक्षा सीधे तौर पर हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हुई है। उनका स्पष्ट कहना था, ‘हम सब तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक सनातन पूरी तरह से सुरक्षित है।’
युवा बलिदानियों और ऐतिहासिक शूरवीरों के सर्वोच्च त्याग को नमन
अपने इस प्रभावशाली संबोधन के दौरान सीएम योगी ने उन तमाम महान ऐतिहासिक हस्तियों और स्वतंत्रता सेनानियों को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने सनातन मूल्यों की रक्षा करने और देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने इस बात पर गहराई से विचार रखा कि कैसे अलग-अलग कालखंडों और मुश्किल समय में भारत के वीर नायकों ने आगे बढ़कर अपना अमूल्य योगदान दिया है। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से राजा बलभद्र सिंह चालारी और युवा योद्धा लाखन पासी की असाधारण बहादुरी का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि मात्र 18 साल की बेहद कम उम्र में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाने वाले लाखन पासी जैसे रणबांकुरों ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को बुरी तरह से हिला कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए जीवन के इतने शुरुआती पड़ाव पर अपनी जान की बाजी लगा देने से बड़ा कोई और त्याग हो ही नहीं सकता। वीरता की इस महान विरासत को और विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने महाराजा बिजली पासी, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह जी जैसे धर्म और राष्ट्र के महान रक्षकों की यादों को भी ताजा किया। उन्होंने कहा कि इन सभी कालजयी महापुरुषों ने इस भूमि की संप्रभुता को बनाए रखने और बाहरी खतरों से अपने लोगों को बचाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
विदेशी आक्रांता सालार मसूद का खात्मा और महाराजा सुहेलदेव का शौर्य
मुख्यमंत्री के भाषण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी आक्रमणों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक प्रतिरोध पर केंद्रित था। उन्होंने सांस्कृतिक रक्षा की इस निरंतर चल रही लड़ाई के ऐतिहासिक संदर्भ को समझाते हुए विदेशी आक्रांता सालार मसूद का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने महान भारतीय राजा महाराजा सुहेलदेव की उस गौरवशाली जीत की कहानी जनता को याद दिलाई, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हमलावर ताकतों का डटकर और बेहद आक्रामकता के साथ सामना किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाराजा सुहेलदेव ने सिर्फ सालार मसूद को युद्ध के मैदान में हराया ही नहीं था, बल्कि उसे मौत के घाट उतारते हुए उसकी विशाल सेना को बुरी तरह से चकनाचूर कर दिया था, जिससे वह विदेशी खतरा हमेशा के लिए खत्म हो गया। इतिहास की इस महान और निर्णायक जीत को आज के सुशासन से जोड़ते हुए सीएम योगी ने जनता को बताया कि उनकी सरकार ने उसी ऐतिहासिक स्थान यानी बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का एक बेहद भव्य स्मारक और एक शानदार कॉरिडोर का निर्माण करवाया है। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे का यह बड़ा कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आने वाली पीढ़ियां महाराजा सुहेलदेव के उस अदम्य साहस, उनके पराक्रम और उनके उत्कृष्ट युद्ध कौशल को कभी भूल न सकें।
महापुरुषों को सम्मान देने के लिए डबल इंजन सरकार के बड़े कदम
उत्तर प्रदेश में चल रही मौजूदा डबल इंजन की सरकार किस तरह से इन महान ऐतिहासिक हस्तियों को सक्रिय रूप से सम्मान दे रही है, इसका एक विस्तृत उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य भर में ऐतिहासिक प्रतीकों के नाम पर रखे गए कई प्रमुख संस्थानों और पीएसी बटालियनों की पूरी सूची गिनाई। उन्होंने बताया कि किस तरह से मातृभूमि की रक्षा करने वाली महान महिला योद्धाओं के नाम पर पीएसी की विशेष बटालियनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी लखनऊ में 1857 की क्रांति की वीर महिला उदा देवी पासी के नाम पर एक बेहद भव्य पीएसी बटालियन का गठन किया गया है। इसी तर्ज पर गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी के सम्मान में पीएसी की एक विशेष महिला बटालियन बनाई गई है, जबकि बदायूं में भी वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर एक अन्य महिला पीएसी बटालियन तैयार हुई है। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सिर्फ पुलिस बल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में भी यह सम्मान स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। बांदा में बनाए गए एक नए मेडिकल कॉलेज का नाम वीर महारानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है, और औरैया का सरकारी मेडिकल कॉलेज अब सुशासन की प्रतीक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, अध्यात्म के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या में नवनिर्मित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर और वहां बनाए गए प्रमुख रैन बसेरों का नाम निषादराज के नाम पर रखा गया है, जो हमारे धर्म के इन महान आधार स्तंभों के प्रति सरकार के गहरे सम्मान को दर्शाता है।
सनातन धर्म के भविष्य को लेकर एक बहुत ही सख्त चेतावनी
अपने इस ऊर्जा से भरे संबोधन के समापन पर, सीएम योगी आदित्यनाथ ने वहां मौजूद भारी जनसमूह से सीधे तौर पर अपील करते हुए उन्हें उनके नागरिक और आध्यात्मिक कर्तव्यों की याद दिलाई। उन्होंने इस बात पर बहुत जोर दिया कि यह हम सभी का प्राथमिक दायित्व बनता है कि हम इन महान महापुरुषों और वीरांगनाओं को पूरा सम्मान दें और आज की इस नई पीढ़ी को उनके उस गौरव और महिमा से अच्छी तरह अवगत कराएं। अपने भाषण के अंतिम पलों में एक बहुत ही सख्त और गंभीर लहजा अपनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि हमारे समाज का उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य पूरी तरह से सनातन की इसी सुदृढ़ नींव पर ही टिका हुआ है। ‘हमारा भविष्य इसी बात पर निर्भर है कि सनातन हमेशा सुरक्षित रहे,’ उन्होंने इस बात को बहुत ही दृढ़ता के साथ दोहराया। जनता को इस पूरे मामले की गंभीरता का अहसास कराते हुए उन्होंने अपने भाषण का अंत इस सख्त संदेश के साथ किया कि अगर कभी भी सनातन पर कोई खतरा आता है, तो हर किसी को यह बात अच्छी तरह से याद रखनी चाहिए कि इसके परिणामों से कोई भी बच नहीं पाएगा।




















