पश्चिम बंगाल की सियासत में सोमवार को एक बार फिर हलचल मच गई, जब तृणमूल कांग्रेस की नेता शशि पांजा एनसीपीआई से जुड़ी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक जा पहुंचीं। यह लगातार दूसरा दिन था जब पांजा इस क्लिनिक में देखी गईं, और इसके साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी से उनके अलग होने को लेकर अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया। पूर्व मंत्री रह चुकीं पांजा ने तृणमूल छोड़ने की संभावना से जुड़े सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
क्लिनिक से निकलते वक्त सिर्फ इतना कहा
जैसे ही पांजा क्लिनिक से बाहर निकलीं, वहां मौजूद पत्रकारों ने उन्हें रोककर पूछा कि क्या वह तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने की तैयारी कर रही हैं। जवाब में पांजा ने हल्की मुस्कान के साथ बस इतना कहा, 'मुझे जाना है।' इतना कहकर वह बिना कुछ और बोले वहां से निकल गईं। उनका यह छोटा सा जवाब खुद कई सवाल खड़े कर गया, क्योंकि उन्होंने न तो अटकलों को सिरे से खारिज किया और न ही इसकी पुष्टि की। पत्रकारों के बार बार पूछने पर भी वह किसी नतीजे पर पहुंचने वाला जवाब देने से बचती रहीं।
ममता के घर से महज 800 मीटर दूर मुलाकात
गौर करने वाली बात यह है कि जिस क्लिनिक में पांजा पहुंचीं, वह पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से करीब 800 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। इतनी कम दूरी पर हुई इस मुलाकात ने पांजा के राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है। पिछले हफ्ते भी वह इसी क्लिनिक जा चुकी हैं, और तब भी राजनीतिक गलियारों में इसी तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। लगातार दो हफ्तों में दो बार एक ही जगह पहुंचना संयोग से ज्यादा किसी संकेत जैसा माना जा रहा है।
काकोली बोलीं, रिश्ता तीन दशक पुराना और सिर्फ इलाज से जुड़ा
तृणमूल से बगावत कर चुकीं काकोली घोष दस्तीदार ने हालांकि इन मुलाकातों को किसी भी राजनीतिक एंगल से जोड़े जाने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि पांजा के साथ उनका नाता तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है और यह रिश्ता पूरी तरह उनके डॉक्टर वाले पेशे से जुड़ा हुआ है, राजनीति से इसका कोई लेना देना नहीं है। घोष दस्तीदार के इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक हलकों में अटकलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
अब तक 20 सांसद तोड़ चुके हैं ममता का साथ
असल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरार साफ नजर आने लगी है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसद पहले ही बगावत कर तृणमूल से अलग हो चुके हैं। इन सभी सांसदों ने मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई के नाम से अपना अलग समूह बना लिया है और सभी ने एनडीए को अपना समर्थन दे दिया है। हाल ही में ये सांसद पहली बार एनडीए के संसदीय दल की बैठक में भी शामिल हुए। इसके अलावा पार्टी के कई और नेता भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं, और इसी वजह से तृणमूल के नेता लगातार इन बागी नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने में जुटे हुए हैं।



















