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सिंगरौली में घूसखोर क्लर्क का कारनामा, लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद भी SDM कोर्ट में की हजारों की वसूलीराजनीति
9 जुल॰ 2026, 1:19 pm (20 दिन पहले)· 4

सिंगरौली में घूसखोर क्लर्क का कारनामा, लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद भी SDM कोर्ट में की हजारों की वसूली

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में लोकायुक्त पुलिस द्वारा पहले पकड़े जा चुके एक दागी रीडर पर चितरंगी SDM कोर्ट में तैनाती के दौरान दो लोगों से 90,000 रुपये की घूस लेने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां लोकायुक्त द्वारा पूर्व में घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए एक दागी कर्मचारी को चितरंगी SDM कोर्ट में रीडर के संवेदनशील पद पर तैनात कर दिया गया। कड़े प्रशासनिक दंड का सामना करने के बजाय इस कर्मचारी ने नई जगह पर भी अपना पुराना रवैया जारी रखा और अदालती फैसलों का डर दिखाकर आम जनता का आर्थिक शोषण करना शुरू कर दिया। इस लचर व्यवस्था के कारण अंततः आम नागरिकों को ही भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दो पीड़ितों से 90 हजार रुपये की ठगी का खुलासा

आरोपी रीडर रविंद्र घोसी के खिलाफ दो अलग-अलग पीड़ितों ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन से लिखित शिकायत की है। इन दोनों मामलों में पीड़ितों से कुल 90,000 रुपये ऐंठे गए। पहले मामले में पीड़ित नंदलाल जायसवाल का आरोप है कि उनकी एक अपील से जुड़े मामले में फैसला उनके पक्ष में कराने और अपील खारिज होने का डर दिखाकर रीडर ने उनसे 40,000 रुपये वसूल लिए। वहीं, दूसरे मामले के पीड़ित इमामुद्दीन से भी एक अदालती मुकदमे के सिलसिले में 50,000 रुपये की रिश्वत ली गई। दोनों ही मामलों में पीड़ितों को न्याय नहीं मिला और कोर्ट के फैसले उनके खिलाफ आए। जब पीड़ितों को खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी रीडर टालमटोल करने लगा और उन्हें गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां देने लगा।

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लोकायुक्त की कार्रवाई और दागी अतीत

इस पूरे मामले में आरोपी रविंद्र घोसी का पुराना रिकॉर्ड भी पूरी तरह से दागदार रहा है। पूर्व में वह बैढ़न कलेक्ट्रेट की भू-अर्जन शाखा में पदस्थ था, जहां लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर उसे 50,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस गंभीर आपराधिक मामले के बाद नियमानुसार उसे कड़े सेवा प्रतिबंधों या निलंबन का सामना करना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक अफसरों की मेहरबानी के चलते उसे चितरंगी SDM कोर्ट जैसी महत्वपूर्ण जगह पर रीडर की मलाईदार कुर्सी सौंप दी गई। वहां पहुंचकर उसने दोबारा मुकदमों में जीत-हार का डर दिखाकर पक्षकारों को ठगना शुरू कर दिया।

प्रशासनिक मिलीभगत और व्यवस्था पर सुलगते सवाल

इस प्रकरण ने सिंगरौली जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का पूछना है कि लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई के बाद भी इस भ्रष्ट बाबू को इतने संवेदनशील पद पर बैठने की अनुमति किसने और क्यों दी? इसके अतिरिक्त, आरोपी क्लर्क का तबादला सागर हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद उसे इतने दिनों तक चितरंगी में रोककर किस अधिकारी के इशारे पर रखा गया था? इन सवालों के घेरे में अब पूरा जिला प्रशासन आ चुका है।

अपर कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू

फिलहाल इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। अपर कलेक्टर ने दोनों शिकायतकर्ताओं और आरोपी कर्मचारी रविंद्र घोसी को तलब कर मामले की विभागीय जांच शुरू करवा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि जांच रिपोर्ट में आरोप सिद्ध होने पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, क्षेत्र की जनता अब केवल औपचारिकता वाली कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है और वह इस पूरे भ्रष्ट तंत्र पर कड़े प्रहार की उम्मीद कर रही है।

सवाल-जवाब

सिंगरौली में आरोपी कोर्ट रीडर का नाम क्या है?
आरोपी कोर्ट रीडर का नाम रविंद्र घोसी है, जो सिंगरौली जिले के चितरंगी एसडीएम कोर्ट में पदस्थ था।
रीडर रविंद्र घोसी पर कुल कितने रुपये की घूस लेने का आरोप है?
ताजा मामले में उन पर दो अलग-अलग पीड़ितों से कुल 90,000 रुपये (एक से 40,000 रुपये और दूसरे से 50,000 रुपये) की घूस लेने का आरोप है।
क्या आरोपी को पहले भी भ्रष्टाचार के मामले में पकड़ा गया था?
हां, रविंद्र घोसी को पहले बैढ़न कलेक्ट्रेट की भू-अर्जन शाखा में पदस्थापना के दौरान लोकायुक्त पुलिस ने 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
शिकायतकर्ताओं के नाम क्या हैं और उन्होंने पैसे क्यों दिए थे?
शिकायतकर्ता नंदलाल जायसवाल और इमामुद्दीन हैं। उन्होंने अदालती मुकदमों में अपने पक्ष में फैसला कराने के लिए रीडर को पैसे दिए थे।
वर्तमान में इस मामले पर क्या प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है?
शिकायत मिलने के बाद अपर कलेक्टर ने दोनों पक्षों को तलब कर मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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