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संसद के मानसून सत्र के आखिरी दौर में संभावित विधायी सरप्राइज को लेकर कांग्रेस ने सांसदों के लिए जारी किया अनिवार्य उपस्थिति का व्हिपराजनीति
7 अग॰ 2026, 9:49 pm (4 घंटे पहले)· 0

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दौर में संभावित विधायी सरप्राइज को लेकर कांग्रेस ने सांसदों के लिए जारी किया अनिवार्य उपस्थिति का व्हिप

संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एफसीआरए संशोधन और परिसीमन से जुड़े संभावित विधेयकों को देखते हुए विपक्षी दलों ने 10 से 12 अगस्त तक अपने सांसदों को अनिवार्य उपस्थिति का तीन लाइन का व्हिप सौंपा है।

संसद के मानसून सत्र के समापन की ओर बढ़ने के साथ ही राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां बेहद तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक धड़े किसी भी सम्भावित विधायी मोड़ से निपटने के लिए अपनी-अपनी व्यूहरचना तैयार कर रहे हैं। इसी क्रम में विपक्ष ने अपने तमाम सदस्यों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश थमाया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को कार्यवाही के दौरान मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। कांग्रेस के अलावा इंडिया ब्लॉक के बाकी सहयोगी दलों को भी अपने तमाम सांसदों की शत-प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित करने की ताकीद दी गई है। सत्र के इस अंतिम दौर में सांसदों को दी गई इस सख्त हिदायत से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि सरकार अगले हफ्ते संसद में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम यानी एफसीआरए (FCRA) में संशोधन या परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक जैसा कोई बड़ा सरप्राइज पेश कर सकती है।

संसदीय रणनीति और तीन लाइन का सख्त निर्देश

विपक्ष द्वारा उठाए गए इस कदम को बेहद सतर्क और व्यवस्थित संसदीय रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उच्च सदन यानी राज्यसभा में वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और निचले सदन यानी लोकसभा में सुरेश द्वारा यह व्हिप जारी किया गया है। जारी किए गए इस निर्देश पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 10, 11 और 12 अगस्त के दौरान संसद में अत्यंत महत्वपूर्ण विधायी विषयों और मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना तय हुआ है। इसलिए पार्टी के सभी माननीय सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने से लेकर शाम को कार्यवाही स्थगित होने तक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। सांसदों को यह भी ताकीद की गई है कि वे इन महत्वपूर्ण तिथियों पर पार्टी के तय रुख और रणनीति का एकजुट होकर समर्थन करें।

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सरकारी कामकाज की सूची और पूरक कार्यसूची की आशंका

दूसरी ओर, सरकार की तरफ से पेश किए गए आगामी सप्ताह के आधिकारिक कामकाज में इन सम्भावित विधेयकों का प्रत्यक्ष विवरण सामने नहीं आया था। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा अगले हफ्ते के लिए संसद के पटल पर रखी गई संभावित सरकारी कामकाज की सूची में एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक या परिसीमन से जुड़े विधायी प्रस्तावों का सीधा उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बावजूद विपक्षी दलों की बेचैनी और सतर्कता कम नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण संसदीय प्रक्रियाओं के वे नियम हैं जिनके तहत सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अंतिम क्षणों में भी पूरक कार्यसूची के माध्यम से कोई नया विधेयक या महत्वपूर्ण प्रस्ताव चर्चा और पारित कराने के लिए पटल पर रख सकती है। इसी अप्रत्याशित स्थिति की संभावना को देखते हुए विपक्ष कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता।

विधेयकों का स्वरूप और बहुमत का गणित

संसदीय प्रक्रियाओं के तहत अलग-अलग विधेयकों को पारित कराने के लिए अलग-अलग तरह के बहुमत की आवश्यकता होती है, जो इस समय पूरी राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है। यदि सरकार एफसीआरए (FCRA) से संबंधित संशोधन विधेयक को पेश करती है, तो इसे दोनों सदनों में पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी। साधारण बहुमत का यह आंकड़ा सत्ताधारी पक्ष के पास आसानी से उपलब्ध है, इसलिए इसे पारित कराना सरकार के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।

दूसरी तरफ, यदि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े किसी संविधान संशोधन विधेयक को संसद के समक्ष लाती है, तो इसके लिए एक अलग और कड़ा संवैधानिक पैमाना लागू होता है। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई विशेष बहुमत की अनिवार्य आवश्यकता होती है। यही वजह है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया का प्रत्येक घटक दल अपने एक-एक सांसद की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण वोटिंग के दौरान संख्याबल में कोई कमी न आए।

आगामी सत्रों का विकल्प और 2029 का राजनीतिक संदर्भ

राजनीतिक विश्लेषकों और रणनीतिकारों का मानना है कि यदि सरकार वर्तमान मानसून सत्र के अंतिम दिनों में परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश नहीं भी करती है, तो भी विधायी दृष्टिकोण से कोई जल्दबाजी की बाध्यता नहीं है। सरकार के पास आगामी संसदीय सत्रों में इस तरह का विधेयक लाकर उसे पारित कराने और वर्ष 2029 के अगले लोकसभा चुनावों से पहले व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा। इसके बावजूद, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा दिखाई गई यह आक्रामक गोलबंदी और कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि विपक्ष सरकार के किसी भी अप्रत्याशित विधायी दांव या अचानक पेश किए जाने वाले प्रस्ताव का डटकर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है।

सवाल-जवाब

कांग्रेस ने अपने सांसदों को कब संसद में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है?
कांग्रेस ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का तीन लाइन का व्हिप जारी किया है।
संसद में कौन से दो प्रमुख विधेयक पेश होने की चर्चा गर्म है?
संसद में विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन विधेयक और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश होने की चर्चा है।
FCRA संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए किस प्रकार के बहुमत की जरूरत होती है?
FCRA संशोधन विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कितना बहुमत चाहिए?
परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई विशेष बहुमत की अनिवार्यता होती है।
संसद में व्हिप किस-किस नेता द्वारा जारी किया गया है?
राज्यसभा में जयराम रमेश और लोकसभा में सुरेश द्वारा यह व्हिप जारी किया गया है।
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