भारतीय संसद के मानसून सत्र का ग्यारहवां दिन तीखी राजनीतिक बहस और हंगामे की भेंट चढ़ने के आसार जता रहा है। लोकसभा में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। इसके अलावा, सांसद पप्पू यादव पर हुए हालिया हमले, परिसीमन विधेयक और विभिन्न राजनीतिक बयानों के कारण दोनों सदनों में माहौल गर्म रहने की उम्मीद है।
विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक और विधायी प्रक्रिया
केन्द्र सरकार संसद के निचले सदन में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन बिल प्रस्तुत करने की योजना बना रही है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य विदेशी धन प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर सरकार का सीधा नियंत्रण और निगरानी स्थापित करना है। सरकार का मत है कि विदेशी कोष प्राप्त करने वाले संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह विधायी बदलाव अत्यंत आवश्यक हैं।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस विधेयक के संसद में आने से पहले ही सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस नए नियम के जरिए सरकार विदेशी सहायता से बने स्कूलों, अस्पतालों और अनाथालयों जैसी परिसंपत्तियों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। मानसून सत्र के लिए कुल आठ विधेयक सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें से दो महत्वपूर्ण विधेयक, वंदे मातरम विधेयक और सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, पहले ही दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं।
पप्पू यादव पर हमला और विशेषाधिकार हनन का नोटिस
संसद परिसर में सुरक्षा और राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा उस समय और गहरा गया जब रविवार शाम को सांसद पप्पू यादव पर हमला हुआ। यह घटना उस समय घटी जब वे सनातन धर्म के अपमान के विषय पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस हमले के बाद पप्पू यादव ने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष से संज्ञान लेने और सांसदों की सुरक्षा पुख्ता करने का अनुरोध किया है।
यह विवाद 31 जुलाई को हुई उस घटना से भी जुड़ा हुआ है जब संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान पप्पू यादव साधु के वेश में एक दानपेटी लेकर पहुंचे थे, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई अन्य सांसदों ने सांकेतिक चंदा डाला था। इस घटना पर संत समाज ने कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद, भारतीय जनता पार्टी के सांसद संजय जायसवाल और पार्टी के मुख्य सचेतक ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222 और नियम 223 के तहत पप्पू यादव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा था।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं और परिसीमन पर गतिरोध
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद के भीतर और बाहर कई मुद्दों पर अपने विचार रखे हैं। तमिलनाडु के मामल्लापुरम में एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक को पारित करने के प्रयास को सभी राष्ट्रीय और तमिल पार्टियों को मिलकर विफल करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस विधेयक का समर्थन करना जनता के साथ विश्वासघात होगा।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने विरोध प्रदर्शन कर रहे बच्चों से जुड़े मुद्दे पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से माफी की मांग की। वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद राम गोपाल यादव ने पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनकर किए गए नुक्कड़ नाटक को अनुचित करार दिया। राम गोपाल यादव ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर में चोरी के मामले से संतों का कोई संबंध नहीं है और ऐसी हरकत नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी पार्टी राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी के गंभीर मुद्दे को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाएगी।



















