संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में उस वक्त हंगामा मच गया जब नीट पेपर लीक के बाद सरकार जिस सख्त नए कानून पर चर्चा करा रही थी, उसी बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी का नाम लिए बिना उन पर सीधा निशाना साध दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया, जिसने रेप पीड़िता के आरोपियों की रिहाई का स्वागत किया था। यह बयान आते ही सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे और लाइव टेलीकास्ट के दौरान प्रियंका गांधी का माइक कई बार बंद कर दिया गया।
आरएमएल अस्पताल की मुलाकात और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
प्रियंका गांधी ने सदन में बताया कि वे प्रदर्शन में घायल हुई एक छात्रा से मिलने आरएमएल अस्पताल पहुंची थीं। वहां घायल छात्रा की मां ने उनसे पूछा कि क्या उनकी बेटी का यह हाल करने वाले लोग भी उससे मिलने आए हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि इस सवाल ने उन्हें बेहद शर्मिंदा कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सीधा सवाल पूछा कि गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया।
शिक्षा बजट घटने और माफिया राज पर निशाना
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में मां-बाप अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जमीन और गहने तक बेच देते हैं, लेकिन असल परीक्षा में योग्यता से ज्यादा पैसे का दबदबा चलता है। उन्होंने कहा कि छात्र सिर्फ इतना चाहते हैं कि पेपर लीक बंद हों और पेपर लीक कराने वाले माफिया पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार बजट में शिक्षा की हिस्सेदारी घटती जा रही है, जबकि जरूरत इसे बढ़ाने की है।
प्रहलाद जोशी पर टिप्पणी से भड़का सदन
चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने बिना नाम लिए एक पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और उसके बाद हुए स्वागत समारोह का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे नेता को मंत्री पद दिया, जिसने बिल्किस बानो मामले के दोषियों की रिहाई का सार्वजनिक तौर पर स्वागत किया था। यह टिप्पणी आते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और प्रहलाद जोशी दोनों ने कड़ी आपत्ति जताई। दोनों नेताओं ने इसे चरित्र हनन करार दिया और मांग की कि प्रियंका गांधी बिना शर्त सदन से माफी मांगें और उनके इन शब्दों को संसद की कार्यवाही से हटाया यानी एक्सपंज किया जाए।
स्पीकर की नसीहत और प्रियंका गांधी का पलटवार
बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने प्रियंका गांधी को हिदायत दी कि बिना तथ्यों के सदन में कोई भी बात न कही जाए। इस पर प्रियंका गांधी ने सदन में एक अखबार की खबर की कतरन दिखाई और कहा कि वे इसे प्रमाणित यानी ऑथेंटिकेट करने को तैयार हैं। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि क्या प्रहलाद जोशी अपने उस बयान से मुकर रहे हैं, जिसका हवाला वे दे रही हैं।
राधाकृष्णन कमेटी और आरएसएस की भूमिका पर सवाल
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जो नया कानून ला रही है, उसमें पेपर लीक रोकने के कोई ठोस और व्यावहारिक उपाय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें अब तक लागू नहीं की गईं, जबकि नई बनी कमिटियों में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिन्हें शिक्षा क्षेत्र की सही और गहरी समझ ही नहीं है। इसी सिलसिले में उन्होंने मांग की कि शिक्षण संस्थानों और पूरे तंत्र को आरएसएस से जुड़े लोगों से भरने के बजाय योग्य और मेहनती युवाओं को मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि देश का नौजवान इंसाफ मांग रहा है, भीख नहीं।
‘सपनों की चोरी’ और जेन-जी का भरोसा वापस पाने की अपील
प्रियंका गांधी ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव में डाले गए वोट की चोरी और मंदिर में दिए गए चंदे की चोरी से भी बड़ी चोरी देश के नौजवानों के सपनों की चोरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे इसकी जिम्मेदारी लें और देश के जेन-जी (Gen-Z) युवाओं का टूटा भरोसा फिर से जीतने की कोशिश करें।
भाषण के बीच नोकझोंक और हल्का-फुल्का पल
अपने भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष से मुस्कुराने का आग्रह करते हुए कहा, "हम कांग्रेस के लोग जान दे देंगे लेकिन भारत की हार नहीं होने देंगे, सर अब तो मुस्कुरा लीजिए." इस पर किरेन रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी के भाषण की लाइनें उधार ले ली हैं। सरकार ने बाद में औपचारिक तौर पर मांग दोहराई कि प्रहलाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी को संसद की आधिकारिक कार्यवाही से हटाया जाए।


















