संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार से हो गई और सदन की कार्यवाही 13 अगस्त 2026 तक चलने वाली है। इस दौरान सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन परिसर में पत्रकारों के सामने आए और देश की कुछ ताजा उपलब्धियों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर परोक्ष निशाना साधा। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उम्र को लेकर एक तीखी टिप्पणी की, जिसे राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा मिली।
स्काईरूट की सफलता पर प्रधानमंत्री का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस की तारीफ करते हुए कहा कि उसके विक्रम-1 रॉकेट का प्रक्षेपण सफल रहा है और इस कामयाबी ने भारतीय नौजवानों की प्रतिभा और क्षमता को पूरी दुनिया के सामने रख दिया है। उन्होंने बताया कि इस रॉकेट को बनाने वाली पूरी टीम की औसत उम्र महज 28 साल है, यानी देश के बेहद युवा इंजीनियर इस कामयाबी के पीछे हैं। इसी संदर्भ में राजनीतिक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "मैं 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा हूं।" यह पंक्ति सीधे तौर पर राहुल गांधी की तरफ इशारा मानी जा रही है, हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने बयान में उनका नाम कहीं नहीं लिया।
पिछले एक महीने की उपलब्धियों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने घरेलू और वैश्विक, दोनों मोर्चों पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने पिछले मानसून सत्र से ठीक पहले की एक घटना भी याद दिलाई, जब एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचा था। उनके मुताबिक अब एक निजी भारतीय स्टार्टअप ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और नई कामयाबी दर्ज कर ली है। मोदी के अनुसार यह लगातार मिल रही सफलताएं इस बात का सबूत हैं कि भारत के युवाओं के सपने और उनकी क्षमताएं अंतरिक्ष जितनी ही असीमित हैं।
मानसून सत्र से उम्मीदें
प्रधानमंत्री ने संसद के सुचारू संचालन की उम्मीद जताते हुए एक दिलचस्प तुलना पेश की। उन्होंने कहा कि जिस तरह अच्छी बारिश देश की खेती और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होती है, ठीक उसी तरह संसद का मानसून सत्र भी सक्रिय और नतीजों वाला होना चाहिए। उनके अनुसार संसद लोकतंत्र में बहस और विचार-विमर्श का सबसे बड़ा मंच है, इसलिए यहां हर सांसद और हर आवाज को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना जरूरी है।
युवा सांसदों को ज्यादा मौका देने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने खासतौर पर नए और युवा सांसदों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें सदन में ज्यादा अवसर मिलने चाहिए, क्योंकि संसद को उनकी सोच, उनके नजरिए और उनकी ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी सांसद के पास मजबूत तर्क और पुख्ता तथ्य हों, तो वह पूरे भरोसे के साथ अपनी बात सदन में रख सकता है, चाहे वह कितना भी नया सदस्य क्यों न हो। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस के लहजे का भी संकेत मानी जा रही है।




















