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जबड़े पर हाथ रखने के इशारे को लेकर विपक्ष ने घेरा, मुख्यमंत्री विजय को देनी पड़ी सफाईराजनीति
8 सित॰ 2026, 10:39 pm (1 घंटे पहले)· 2

जबड़े पर हाथ रखने के इशारे को लेकर विपक्ष ने घेरा, मुख्यमंत्री विजय को देनी पड़ी सफाई

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की MISA गिरफ़्तारी का ज़िक्र करते हुए अपने जबड़े पर हाथ रख दिया, जिसे विपक्ष ने स्टालिन के टूटे जबड़े पर तंज मानकर 'बॉडी-शेमिंग' बताया और हंगामा किया, इसके बाद विजय ने एक्स पर सफाई दी।

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को हुई बहस ने बड़ा सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। सत्तारूढ़ टीवीके और विपक्षी डीएमके के बीच हुई तीखी नोकझोंक में इमरजेंसी के दौर में मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट यानी MISA, 1971 के तहत हुई पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की गिरफ़्तारी का मुद्दा एक बार फिर उभर आया। सदन में इस पर जमकर हंगामा हुआ, स्पीकर के साथ गतिरोध बना और खुद स्टालिन ने सदन चलाने के तरीके पर तीखी टिप्पणी कर डाली। दरअसल पूरा विवाद मुख्यमंत्री विजय के एक बयान से शुरू हुआ, जिन्होंने स्टालिन पर निशाना साधते हुए उनके टूटे हुए जबड़े की ओर इशारा कर दिया। इस हरकत की सभी विपक्षी दलों ने कड़ी निंदा करते हुए इसे 'बॉडी-शेमिंग' करार दिया, जबकि विजय ने बाद में सफाई दी कि उनकी यह बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह अनजाने में सामने आई थी।

विधानसभा में आखिर हुआ क्या

पुलिस विभाग के अनुदान अनुरोध पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने स्टालिन की MISA गिरफ़्तारी का जिक्र छेड़ा। उन्होंने कहा, "हमारे दोस्त हर बात पर MISA का ज़िक्र करते रहते हैं।" उनका इशारा इस ओर था कि पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन खुद कई मौकों पर अपनी इस गिरफ़्तारी का हवाला दे चुके हैं और सम्मानित सदस्यों को इसका इतिहास भी पता है। असली बवाल तब मचा जब यह बात कहते-कहते विजय ने अपने दाहिने हाथ की हथेली अपने जबड़े पर टिका दी। सदन में मौजूद विपक्षी सदस्यों ने इस भाव-भंगिमा को सीधे स्टालिन के टूटे हुए जबड़े की तरफ इशारा मान लिया, और देखते ही देखते इसकी एक सुर में निंदा शुरू हो गई।

डीएमके विधायकों का धरना, मार्शलों से टकराव

विजय के इस इशारे को लेकर विपक्षी खेमे में जबरदस्त नाराज़गी देखी गई। सिर्फ डीएमके ही नहीं, बल्कि सदन में मौजूद तमाम विपक्षी दलों ने विजय के इस इशारे की एक सुर में निंदा की और इसे शर्मनाक बताया। डीएमके के विधायक स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के चैंबर के बाहर पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। उनकी एक ही मांग थी कि मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से पूरी तरह निकाला जाए। स्पीकर की ओर से इस पर कोई फैसला आने से पहले ही मार्शलों ने धरना दे रहे डीएमके विधायकों को जबरन बाहर निकाल दिया, जिसके बाद सदन के भीतर तनाव और बढ़ गया।

सीएम विजय ने एक्स पर दी सफाई

बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री विजय ने एक्स पर एक पोस्ट में अपनी सफाई पेश की। उन्होंने लिखा कि 7.9.2026 को सदन में पुलिस विभाग के अनुदान अनुरोध पर अपने जवाब के दौरान सामने आई उनकी बॉडी लैंग्वेज किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं थी। विजय ने कहा, "मेरे हाव-भाव, जो अनजाने में सामने आए, किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं थे।" उन्होंने आगे अनुरोध किया कि इसे किसी की निजी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई हरकत के तौर पर न देखा जाए।

सीपीएम नेता ने बताई जबड़ा टूटने की वजह

सीपीएम नेता पी षणमुगम ने भी एक्स पर इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा कि यह जगजाहिर ऐतिहासिक तथ्य है कि आपातकाल के दौरान देश में लोकतंत्र बचाने के लिए भारी संघर्ष हुए थे, और साथ ही उस दौर में दमन तथा ज्यादतियां भी खूब हुईं। षणमुगम के मुताबिक उसी दौर में पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री थिरु एम.के. स्टालिन पर बेरहमी से हमला किया था, जिसकी वजह से उनका जबड़ा टूट गया था। उन्होंने कहा, "किसी के शारीरिक रूप-रंग का मजाक उड़ाना निंदनीय है, चाहे कोई भी ऐसा करे।" षणमुगम ने आगे जोड़ा कि खुद मुख्यमंत्री का इस तरह की हरकत करना और भी गैर-जिम्मेदाराना है। इस पूरे प्रकरण के बाद तमिलनाडु की सियासत में टीवीके और डीएमके के बीच तल्खी और बढ़ गई है, और आने वाले सत्रों में भी इस मुद्दे के और तूल पकड़ने के आसार हैं।

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सवाल-जवाब

तमिलनाडु विधानसभा में विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ?
मुख्यमंत्री विजय ने पुलिस विभाग के अनुदान अनुरोध पर जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की MISA गिरफ़्तारी का जिक्र करते हुए अपना हाथ जबड़े पर रख दिया, जिसे विपक्ष ने बॉडी-शेमिंग बताया।
विपक्ष ने इस इशारे की निंदा क्यों की?
क्योंकि यह इशारा स्टालिन के उस टूटे जबड़े की तरफ इशारा माना गया, जो सीपीएम नेता पी षणमुगम के मुताबिक आपातकाल के दौरान पुलिस के हमले में टूटा था।
डीएमके विधायकों ने क्या किया?
डीएमके विधायक स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए और विजय की टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की, जिसके बाद मार्शलों ने उन्हें बाहर निकाल दिया।
सीएम विजय ने अपनी सफाई में क्या कहा?
विजय ने एक्स पर लिखा कि 7.9.2026 को सदन में दिया गया उनका हाव-भाव पूरी तरह अनजाने में सामने आया था और इसका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
यह घटना कब हुई?
यह घटना सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस विभाग के अनुदान अनुरोध पर हुई बहस के दौरान हुई, जिसे लेकर विजय ने 7.9.2026 की तारीख का जिक्र किया।
सीपीएम नेता पी षणमुगम ने क्या आरोप लगाया?
षणमुगम ने कहा कि किसी के शारीरिक रूप-रंग का मजाक उड़ाना निंदनीय है और मुख्यमंत्री का खुद ऐसा करना गैर-जिम्मेदाराना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 मिनट पहले

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के जबड़े के इशारे पर हुआ यह विवाद महज शारीरिक हाव-भाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्तारूढ़ टीवीके और विपक्षी डीएमके के बीच गहराते राजनीतिक टकराव को उजागर करता है। आपातकाल के दौर के MISA इतिहास को सदन में खींचना और फिर बॉडी-शेमिंग के आरोपों पर मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया के जरिए तत्काल सफाई देना यह दिखाता है कि क्षेत्रीय राजनीति में अब हर एक संकेत को कितना आक्रामक रूप से भुनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के बाहर जनता के बीच भी बड़ा सियासी हथियार बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की बहसों के दौरान सदन के भीतर इस तरह की शारीरिक भाषा और हाव-भाव का राजनीतिकरण होना विधायिका की गरिमा पर एक गंभीर सवालिया निशान लगाता है। जब जनप्रतिनिधि गंभीर विधायी मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत इशारों और ऐतिहासिक गिरफ्तारियों पर उलझते हैं, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से ध्यान भटकाता है। यदि इस प्रकार के गतिरोधों को समय रहते संसदीय परंपराओं के दायरे में नहीं नियंत्रित किया गया, तो आने वाले दिनों में यह सड़क पर हिंसक विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्याओं का रूप ले सकता है।

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