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वंदे मातरम गायन रोकने के कथित इशारे पर भड़की बीजेपी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मांगा सार्वजनिक जवाबराजनीति
16 अग॰ 2026, 3:47 pm (1 घंटे पहले)· 2

वंदे मातरम गायन रोकने के कथित इशारे पर भड़की बीजेपी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मांगा सार्वजनिक जवाब

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय गीत रोकने के कथित इशारे और केरल में सरकारी स्तर पर इसे छोड़ने को लेकर बीजेपी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है।

भारतीय जनता पार्टी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम' के गायन को रोके जाने के कथित घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व का रवैया बेहद आपत्तिजनक रहा है। इसके साथ ही बीजेपी ने पी चिदंबरम के हालिया बयानों और केरल सरकार के फैसलों का हवाला देते हुए विपक्षी दल की विचारधारा पर सीधा निशाना साधा है।

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का विवाद

प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि देश जब अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा था, उसी दौरान कांग्रेस के मुख्य कार्यालय में एक अप्रत्याशित वाकया देखने को मिला। उनके अनुसार, जब वहां उपस्थित लोग 'वंदे मातरम' का उद्घोष कर रहे थे, तब सोनिया गांधी ने अपने हाथ के इशारे से उस गायन को तुरंत बंद करने का संकेत दिया। जब पहली बार में गायन नहीं रुका, तो उन्होंने दोबारा हाथ उठाकर उसे रुकवाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता ने इस आचरण को 140 करोड़ देशवासियों, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और भारतीय संविधान की मूल भावना का अनादर करार दिया।

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बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस नेतृत्व पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब अतीत में कुछ समर्थकों की ओर से पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की खबरें आई थीं, तब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने वैसी नाराजगी या त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दिखाई थी। लेकिन अपने ही पार्टी कार्यालय में राष्ट्रगीत का गायन होने पर उसे एक अपराध की तरह रोक दिया गया। बीजेपी का मानना है कि आजादी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय गीत का इस तरह विरोध करना उस पूरे तंत्र की मानसिकता को उजागर करता है जो देश की अखंडता और संप्रभुता के प्रति निष्ठा नहीं रखता।

केरल सरकार के कदम और कथित ऑडियो क्लिप का मुद्दा

प्रदीप भंडारी ने केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस गठबंधन की सरकार के एक हालिया निर्णय को भी इस विवाद से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल सरकार ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के निर्धारित गायन को शामिल न करके इसे छोड़ दिया। बीजेपी के अनुसार, यह कोई अचानक हुआ संयोग नहीं है, बल्कि वही नीति है जिसे दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने प्रदर्शित किया था। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय नेतृत्व की सोच को ही धरातल पर लागू करने का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

इसके साथ ही बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी से जुड़ी एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि इस ऑडियो में यह स्पष्ट सुनाई देता है कि कांग्रेस दल के भीतर 'वंदे मातरम' न गाने की बात कही जा रही है। बीजेपी का कहना है कि इन प्रमाणों के सामने आने के बाद कांग्रेस की ओर से दी जा रही तमाम सफाई झूठी साबित हो जाती है। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं की संवेदनाएं देश के आम देशभक्त नागरिकों के साथ होने के बजाय हमेशा उन समूहों के प्रति रहती हैं जो मुख्यधारा से कटे हुए हैं।

राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम के उल्लंघन का कानूनी तर्क

बीजेपी ने इस पूरे मामले में कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए जांच और कार्रवाई की मांग रखी है। प्रदीप भंडारी ने याद दिलाया कि भारतीय संसद द्वारा 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' पारित किया गया था, जिसमें 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इस संशोधित कानून के तहत 'वंदे मातरम' को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया गया है। अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का विरोध करता है या इसके गायन में बाधा उत्पन्न करता है, तो वह कानून का सीधा उल्लंघन कर रहा है।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इस वैधानिक पृष्ठभूमि के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा जानबूझकर राष्ट्रगीत का विरोध किया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि वे चरमपंथी विचारधाराओं के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जो शक्तियां देश विरोधी या कट्टरपंथी तत्वों का समर्थन करती हैं, उन्हें भारत को सशक्त बनाने वाला हर राष्ट्रीय आह्वान और पहल नागवार गुजरती है। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि कार्यक्रम के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को शारीरिक अस्वस्थता के कारण लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई हो रही थी, जिसके कारण कार्यक्रम को संक्षिप्त करने का प्रयास किया गया था। हालांकि बीजेपी ने इस सफाई को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

'दिमागी नक्सल' बयान और नक्सलवाद पर पलटवार

प्रेस वार्ता के दौरान प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की उन टिप्पणियों पर भी गहरा ऐतराज जताया, जिसमें उन्होंने स्वयं को 'दिमागी नक्सल' बताया था। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि चिदंबरम का यह बयान कांग्रेस की वास्तविक राजनीतिक दिशा को उजागर करता है। उन्होंने आंकड़ों और इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल के दौरान नक्सली हिंसा पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सका था और उस दौर में बड़े नक्सली आतंकी कमांडरों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए थे।

इसके विपरीत, बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व में देश से नक्सली खतरे को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। सुरक्षा बलों के अभियानों के माध्यम से बड़े नक्सली कमांडरों को ढेर किया गया है, जिससे वर्षों से भय के साए में जी रहे गरीब आदिवासी नागरिकों को सुरक्षा और विकास का अधिकार मिला है। उन्होंने कहा कि जब देश ने नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या पर विजय प्राप्त कर ली है, तब विपक्षी दल के नेताओं का इस प्रकार की विचारधारा से सहानुभूति जताना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी कारण सोनिया गांधी और राहुल गांधी को 24 घंटे के भीतर देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस नेतृत्व से पूछे गए पांच सीधे सवाल

पार्टी की ओर से प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के समक्ष पांच मुख्य सवाल रखे और उनसे सार्वजनिक जवाब की मांग की

  • पहला सवाल: क्या कांग्रेस नेतृत्व के दिल में देशभक्ति का लेशमात्र भी भाव शेष है? यदि हां, तो क्या वे देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाओं, तिरंगे झंडे, संविधान और स्वाधीनता सेनानियों के अपमान पर 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी मांगेंगे? हालांकि बीजेपी को आशंका है कि वे माफी नहीं मांगेंगे क्योंकि इस तंत्र के मुख्य संरक्षक राहुल गांधी स्वयं हैं।
  • दूसरा सवाल: सामने आए ऑडियो में 'वंदे मातरम' न गाने की बात कहने और केरल सरकार द्वारा इसे आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर रखने के बाद क्या यह साबित नहीं हो जाता कि कांग्रेस में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना समाप्त हो चुकी है?
  • तीसरा सवाल: क्या इन घटनाक्रमों और प्रमाणों से यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि पार्टी के अन्य नेताओं जैसे जयराम रमेश द्वारा दिए गए पिछले सभी बयान पूरी तरह से असत्य और भ्रम फैलाने वाले थे?
  • चौथा सवाल: स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर राष्ट्रीय गीत का विरोध वही कर सकता है जिसे देश की संप्रभुता में विश्वास न हो। क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता कि कांग्रेस पार्टी लगातार देश के संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सक्रिय विरोध करती आ रही है?
  • पांचवां सवाल: देश की युवा पीढ़ी, जिसे 'जेन जी' और देशभक्त 'जेन पी' माना जाता है, वह राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति इस प्रकार के अनादर को कदापि स्वीकार नहीं करेगी। क्या कांग्रेस यह समझती है कि युवा वर्ग इस दोहरे रवैये पर उनसे जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है?

अंत में बीजेपी प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे आचरण के बाद राहुल गांधी संसद में विपक्ष के नेता के महत्वपूर्ण पद पर बने रहने की योग्यता रखते हैं? उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद और संविधान को सर्वोच्च मानने वाला कोई भी जिम्मेदार नेता कभी भी राष्ट्रगीत का अपमान नहीं कर सकता।

सवाल-जवाब

बीजेपी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया है?
बीजेपी का आरोप है कि 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी ने हाथ के इशारे से 'वंदे मातरम' का गायन रुकवाने का प्रयास किया।
प्रदीप भंडारी ने किस कानून का उल्लेख किया है?
प्रदीप भंडारी ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' (2026 संशोधन) की धारा 3 का हवाला देते हुए राष्ट्रगीत के अपमान को कानून का उल्लंघन बताया।
केरल सरकार से जुड़ा क्या मामला सामने आया है?
बीजेपी ने दावा किया कि केरल की कांग्रेस सरकार ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के निर्धारित गायन को शामिल न करके इसे छोड़ दिया।
इस विवाद पर कांग्रेस पार्टी की क्या सफाई थी?
कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को खड़े होने में परेशानी हो रही थी, जिसके कारण कार्यक्रम को जल्दी समाप्त करने का प्रयास किया गया।
पी चिदंबरम से जुड़ा क्या मुद्दा बीजेपी ने उठाया?
बीजेपी ने पी चिदंबरम के खुद को 'दिमागी नक्सल' बताने वाले बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि कांग्रेस शासन में नक्सली कमांडरों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·27 मिनट पहले

स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर राष्ट्रीय गीत से जुड़े इस विवाद ने चुनावी राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण को और तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिंदी पट्टी राज्यों में इस तरह के मुद्दे भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। आगामी चुनावों के मद्देनजर, इस प्रकार के घटनाक्रम राजनीतिक दलों के लिए ध्रुवीकरण के मुख्य हथियार बन सकते हैं, जिससे प्रशासनिक और विकासात्मक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकने की पूरी संभावना है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से इस तरह के राजनीतिक टकराव अक्सर सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा कर देते हैं। जब राष्ट्र प्रतीकों से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक मंचों और प्रेस वार्ताओं में आरोप-प्रत्यारोप तेज होते हैं, तो ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का जोखिम रहता है। जांच एजेंसियों और पुलिस प्रशासन को ऐसे संवेदनशील दौर में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या सार्वजनिक अशांति को रोका जा सके।

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