तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए सी. जोसेफ विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार ने सोमवार को सत्ता में अपने 100 दिन संपन्न कर लिए हैं। राज्य में पिछले पांच दशकों से भी अधिक समय से द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) बारी-बारी से शासन करती रही हैं, ऐसे में इस नई पार्टी का सत्ता में आना एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देता है। अप्रैल महीने में आयोजित विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद टीवीके ने 10 मई को अपनी पहली सरकार का गठन किया था। शुरुआत में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय विजय के साथ नौ मंत्रियों ने पद संभाला था, जिसके बाद 21 मई को हुए कैबिनेट विस्तार में 23 और अगले ही दिन 22 मई को दो अन्य मंत्रियों को शामिल कर मंत्रिपरिषद को पूर्ण रूप दिया गया।
शुरुआती फैसले: मुफ्त बिजली, सुरक्षा दस्ता और नशाबंदी
मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालते ही सी. जोसेफ विजय ने तीन अत्यंत महत्वपूर्ण शासकीय फाइलों को अपनी स्वीकृति प्रदान की थी। इन प्राथमिक फैसलों में 500 यूनिट तक खपत वाले घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को हर दो महीने के चक्र में 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का प्रावधान शामिल था। इसके अतिरिक्त महिला सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 'सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फोर्स' के गठन का प्रस्ताव पास किया गया और राज्य भर में नशीले पदार्थों पर लगाम कसने के लिए 65 समर्पित एंटी-नारकोटिक्स यूनिट तैयार करने को मंजूरी दी गई। जनकल्याणकारी और सामाजिक सुधारों की इसी कड़ी में शिक्षण संस्थानों और धार्मिक स्थलों के समीप संचालित हो रही 717 टीएएसएमएसी शराब की दुकानों को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया। वहीं राज्य के कर्मचारियों के हित में निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ते को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया, अम्मा कैंटीन के ढांचागत सुधार का आदेश जारी हुआ तथा छोटे एवं सीमांत किसानों के 50,000 रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई।
केंद्र से संवाद और जमीनी कल्याण योजनाएं
प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए 27 मई को मुख्यमंत्री विजय ने नई दिल्ली का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने अंतरराज्यीय मेकेदातु बांध विवाद और तमिलनाडु के मछुआरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद 9 जून को राज्य स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'सिंगप्पेन फोर्स' को आधिकारिक तौर पर धरातल पर उतारा गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल करते हुए सरकार ने घोषणा की कि सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु को सोने की अंगूठी उपहार स्वरूप भेंट की जाएगी।
बजट में 125 चुनावी वादों की झलक और इंफ्रास्ट्रक्चर घोषणाएं
राज्य की वित्त मंत्री मारिया विल्सन द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधित बजट में पार्टी के 125 चुनावी संकल्पों को शामिल करने का दावा किया गया। इस बजट में सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक आवंटन किया गया है। इसके तहत नवविवाहिताओं को 8 ग्राम सोने के सिक्के तथा रेशमी वस्त्र देने का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण एवं शहरी आवास सुधार के अंतर्गत कच्चे मकानों तथा झोपड़ियों को हटाकर 70,000 पक्के मकान निर्मित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शिक्षा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को आधुनिक डिजाइन की साइकिलें और सरकारी कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को निःशुल्क लैपटॉप वितरित करने की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
1 लाख करोड़ का औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन
टीवीके सरकार ने अपने शुरुआती 100 दिनों में औद्योगिक विकास और पूंजी निवेश को अपनी प्राथमिकता के केंद्र में रखा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि के दौरान 104 द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है। विशेष रूप से आयोजित किए गए 'वेट्री तमिलनाडु इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेव' में 67,452 करोड़ रुपये के 97 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रशासन का अनुमान है कि इन औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के 23 विभिन्न जिलों में लगभग 1.07 लाख नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
विपक्षी हमले, प्रशासनिक चुनौतियां और भावी राह
दूसरी ओर, 100 दिनों के इस शुरुआती सफर में सरकार को गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। मुख्य विपक्षी दलों डीएमके और एआईएडीएमके ने विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार की घेराबंदी की है। राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति, महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों की घटनाओं, कई क्षेत्रों में अचानक होने वाली बिजली कटौती और कचरा प्रबंधन की लचर व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। सदन के भीतर अनुभवी विपक्षी विधायकों के तीखे सवालों का जवाब देने में नए और अनुभवहीन मंत्रियों को भी मशक्कत करनी पड़ी है। इन आलोचनाओं के बावजूद टीवीके सरकार अपनी छवि को सतर्क, भ्रष्टाचार-विरोधी और जनकल्याण के प्रति समर्पित दिखाने में जुटी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित योजनाएं और औद्योगिक समझौते धरातल पर कितनी तेजी से क्रियान्वित होते हैं।





















