संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक उस वक्त गरमा गई जब सरकार ने टीएमसी से अलग हुए बागी सांसदों के गुट एनसीपीआई को भी बैठक में बुला लिया। विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट किया, हालांकि कुछ देर बाद अपना विरोध दर्ज कराने के बाद वे फिर बैठक में लौट आए।
वॉकआउट की वजह क्या रही
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सरकार ने एनसीपीआई के प्रतिनिधियों को बाकी मान्यता प्राप्त दलों के साथ सर्वदलीय बैठक में बुलाया। विपक्षी सांसदों का कहना था कि एनसीपीआई को न्योता देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है, क्योंकि जिन सांसदों की बात हो रही है वे मूल रूप से टीएमसी के टिकट पर चुनकर आए थे। महुआ मोइत्रा ने सरकार के इस कदम की आलोचना की, जिसके बाद कई विपक्षी दलों ने प्रतीकात्मक वॉकआउट किया और बाद में बैठक में वापस लौट आए।
एनसीपीआई का पलटवार
विपक्ष के वॉकआउट पर एनसीपीआई ने भी पलटवार किया। पार्टी के सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि एनसीपीआई को चुनाव आयोग से मान्यता मिली हुई है, इसलिए बैठक में शामिल होने का उसे पूरा हक है। इसके अलावा एनसीपीआई ने सांसदों के अपनी पार्टी में विलय को लेकर एक नोटिस भी जारी किया, जिससे यह विवाद मानसून सत्र से पहले और गहरा सकता है।
शिवसेना में विलय का अलग मसला
एनसीपीआई विवाद के साथ ही एक और मसला भी सामने आया। श्रीकांत शिंदे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के शिवसेना में विलय से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर स्पीकर फैसला लेंगे। यह मामला एनसीपीआई विवाद से अलग है, लेकिन संसद सत्र में इस पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
रिजिजू की सहयोग की अपील
बैठक से पहले किरण रिजिजू ने नरमी भरा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार है, लेकिन मानसून सत्र के दौरान बदले में विपक्ष से भी उतने ही सहयोग की उम्मीद रखती है।
डिलिमिटेशन बिल पर भी उठे सवाल
बैठक में और भी शिकायतें उठीं। समाजवादी पार्टी नेता एसटी हसन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डिलिमिटेशन बिल के जरिए विपक्ष के वोट बांटकर सत्ता में बने रहना चाहती है। उनके इस बयान से साफ है कि संसद सत्र में यह बिल भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी घमासान
इसी बीच खरगे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की और लिखा, "आपकी चुप्पी स्वीकार्य नहीं है।" इन आरोपों पर जवाब देते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास महाराज ने कहा, "समय पर अनुष्ठान हुए, श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई।"
आगे क्या
एनसीपीआई विवाद, डिलिमिटेशन बिल पर आरोप और राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर उठे सवाल, ये तीनों मुद्दे एक ही दिन सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामेदार रह सकता है।



















