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ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए अखिलेश यादव का नया राजनीतिक कदम, 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले पीडीए की पेश की नई व्याख्याराजनीति
5 अग॰ 2026, 5:17 pm (2 दिन पहले)· 2

ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए अखिलेश यादव का नया राजनीतिक कदम, 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले पीडीए की पेश की नई व्याख्या

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पीडीए फॉर्मूले की नई व्याख्या पेश करते हुए 'पीडी' का अर्थ पंडित भी बताया है। जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सवर्ण समाज को पार्टी से जोड़ने और सत्तारूढ़ दल को घेरने की कोशिश की।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है, और इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। बुधवार, 5 अगस्त 2026 को लखनऊ में पूर्व दिग्गज समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्रा, जिन्हें राजनीति में 'छोटे लोहिया' के नाम से जाना जाता है, की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सपा प्रमुख ने शिरकत की। मंच पर समर्थकों के भारी उत्साह के बीच अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के चर्चित राजनीतिक फॉर्मूले पीडीए की एक सर्वथा नई और रणनीतिक परिभाषा पेश की। सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी के पाले में लाने की मंशा से उन्होंने कहा कि विरोधी दल चाहे जितनी व्याख्याएं करते रहें, लेकिन पीडीए में शामिल 'पीडी' शब्द का एक अर्थ पंडित समाज से भी है।

पीडीए फॉर्मूले की नई व्याख्या से सवर्ण साधने की कोशिश

समाजवादी पार्टी अब तक पीडीए फॉर्मूले के तहत पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एकजुट करने की रणनीति पर काम करती रही है। हालांकि, जनेश्वर मिश्रा जयंती के मंच से अखिलेश यादव ने इस अवधारणा को विस्तार देते हुए एक नया सियासी मोड़ दे दिया। उन्होंने विरोधियों पर प्रहार करते हुए कहा, "जो लोग पीडीए का मतलब बदलते रहते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि पीडीए में 'पीडी' दरअसल पंडित का ही शॉर्ट फॉर्म है।" अखिलेश यादव का यह वक्तव्य स्पष्ट संकेत देता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी केवल अपने पारंपरिक जनाधार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पीड़ित पंडितों और सवर्ण वर्ग को भी अपने सामाजिक एजेंडे में स्थान देना चाहती है।

जनेश्वर मिश्रा की विरासत और कृष्ण सुदामा की पौराणिक मित्रता

संबोधन के दौरान सपा प्रमुख ने जनेश्वर मिश्रा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाजवादी सिद्धांतों का पालन किया और बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य किया। अखिलेश ने प्रतिबद्धता व्यक्त की कि यदि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो जनेश्वर मिश्रा के अधूरे सपनों और विचारों को पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही ब्राह्मण समाज से अपने जुड़ाव को रेखांकित करने के लिए उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की कालजयी मित्रता का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कृष्ण और सुदामा का संबंध सदियों पुराना है और जब भी समाजवादी पार्टी को सत्ता में सेवा करने का अवसर मिला है, उसने सभी वर्गों और ब्राह्मण समाज को पूरा सम्मान दिया है।

रैली की अनुमति न मिलने पर प्रशासन पर बोला तीखा हमला

कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने राज्य की वर्तमान सरकार और प्रशासनिक रवैये पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर पार्टी को विशाल रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई। सपा प्रमुख ने कहा कि प्रशासनिक रुकावटों के बावजूद सामाजिक न्याय और जनकल्याण का यह मिशन रुकने वाला नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदेश सरकार पर पार्टी कार्यकर्ताओं को लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि सरकार जितनी पीड़ा पहुंचाएगी, समाजवादी पार्टी का संगठन और कार्यकर्ता उतने ही अधिक मजबूत होकर सामने आएंगे।

मंच पर वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और संगठन की मजबूती

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम के मंच पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय विशेष रूप से उपस्थित रहे। अखिलेश यादव ने सनातन पांडेय के संगठनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न जिलों का दौरा करके पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और सांसद सनातन पांडेय की मंच पर प्रमुख भूमिका यह दर्शाती है कि समाजवादी पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे में वरिष्ठ ब्राह्मण नेताओं को आगे रखकर सवर्ण समाज में अपनी पैठ मजबूत करने की सुविचारित योजना पर काम कर रही है।

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की रसीद पर उठाए सवाल

अपने भाषण में अखिलेश यादव ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे से जुड़े मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। मंदिर प्रशासन द्वारा चढ़ावे पर रसीद मांगे जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने इसे बेहद आपत्तिजनक और संकीर्ण मानसिकता का प्रतीक बताया। अखिलेश ने तर्क दिया कि श्रद्धापूर्वक दिए गए दान पर रसीद की व्यवस्था करना श्रद्धालुओं की आस्था का अनादर है और यह मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।

2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए सपा का व्यापक सियासी समीकरण

अखिलेश यादव द्वारा पीडीए की नई परिभाषा प्रस्तुत करना और माता प्रसाद पांडेय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व सौंपना, 2027 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अपने पारंपरिक यादव और मुस्लिम वोट बैंक से आगे बढ़कर सवर्णों, विशेषकर ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की पुरजोर कोशिश में है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में यह रणनीति बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की उस सोशल इंजीनियरिंग की याद दिलाती है, जिसके जरिए उन्होंने ब्राह्मण दलित गठबंधन बनाकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव का यह नया सियासी दांव 2027 के चुनावी समर में कितना कारगर साबित होता है।

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सवाल-जवाब

अखिलेश यादव ने पीडीए का नया अर्थ क्या बताया?
अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी के पीडीए फॉर्मूले में 'पीडी' का मतलब केवल पिछड़ा या दलित ही नहीं, बल्कि पीड़ित 'पंडित' भी है।
यह बयान किस अवसर पर दिया गया?
यह बयान बुधवार, 5 अगस्त 2026 को लखनऊ में दिवंगत समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्रा ('छोटे लोहिया') की जयंती कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
अखिलेश यादव ने भगवान कृष्ण और सुदामा का उदाहरण क्यों दिया?
उन्होंने कृष्ण-सुदामा की पौराणिक मित्रता का उल्लेख यह बताने के लिए किया कि उनकी पार्टी हमेशा से सवर्ण और ब्राह्मण समाज का सम्मान करती आई है।
कार्यक्रम में सपा के कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
मंच पर यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और बलिया से सपा सांसद सनातन पांडेय प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
अखिलेश यादव ने अयोध्या राम मंदिर के संबंध में क्या मुद्दा उठाया?
उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे पर रसीद मांगे जाने को संकीर्ण मानसिकता वाला और पारदर्शिता की कमी वाला कदम बताते हुए इसकी आलोचना की।
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