उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। राज्य में मुस्लिम मतदाताओं को साधने की होड़ के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने चुनावी गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही ओवैसी ने कड़े शब्दों में आगाह किया है कि यदि अखिलेश यादव ने समय रहते उनके साथ हाथ नहीं मिलाया, तो उत्तर प्रदेश के नतीजों में उनका हश्र वही होगा जो बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव का हुआ था।
सपा और कांग्रेस के मुस्लिम प्रेम को बताया छलावा
अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर हुए विभिन्न अत्याचारों के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी समान रूप से उत्तरदायी हैं। ओवैसी के अनुसार, कुछ राजनीतिक दल खुद को मुस्लिम वोट बैंक का एकतरफा ठेकेदार मानते हैं, परंतु जब इस समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने की बात आती है, तो वे खामोशी इख्तियार कर लेते हैं और अपने बंगलों में सिमट जाते हैं।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए ओवैसी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी का मुस्लिम प्रेम महज एक नौटंकी है। इससे पहले बुधवार को ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया था, जिस पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे बीजेपी की मदद करने का प्रयास करार दिया था। इस पर ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा कि दोनों ही दल वास्तव में अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े विरोधी हैं और वे कभी नहीं चाहते कि मुस्लिम समुदाय का कोई स्वतंत्र नेता आगे आए।
बिहार के चुनावी तजुर्बे का जिक्र और चेतावनी
अपनी बात को साबित करने के लिए हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने बिहार चुनाव का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में अपनी पार्टी के लिए महज पांच सीटें मांगी गई थीं, लेकिन गठबंधन के बड़े साझेदारों ने उनकी मांग को पूरी तरह अनसुना कर दिया था। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने ओवैसी के प्रत्याशियों को हराने के लिए मुस्लिम सांसदों की पूरी टीम मैदान में उतार दी थी। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि अतीत के इन कड़वे अनुभवों के बावजूद अभी भी समझौते का अवसर खुला है। अगर अखिलेश यादव अब भी गठबंधन का फैसला नहीं लेते हैं, तो चुनावी मैदान में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश में 2027 का सियासी गणित और सीटों का आंकड़ा
उत्तर प्रदेश की वर्तमान 18वीं विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2027 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्य की 403 विधानसभा सीटों के लिए फरवरी से मार्च 2027 के बीच नए चुनाव कराए जाने की प्रबल संभावना है। देश के इस सबसे बड़े सूबे में सरकार बनाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या मोर्चे को कम से कम 202 सीटों का स्पष्ट बहुमत हासिल करना होता है। ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को देखते हुए ओवैसी का यह गठबंधन प्रस्ताव राज्य के सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।





















