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उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्तराजनीति
27 जून 2026, 12:22 pm (46 दिन पहले)· 4

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय पर नाराजगी जताई है। मामले की अगली सुनवाई अब 13 जुलाई को तय की गई है।

प्रयागराज में उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपने के सरकारी आदेश को गलत माना है। जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। हालांकि, कोर्ट ने इस व्यवस्था पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कानूनी अवमानना का मुद्दा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाना डिवीजन बेंच के पिछले आदेशों का सीधा उल्लंघन है, जो अदालत की अवमानना के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वह ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के साथ एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि सरकार ने कोई आयोग गठित किया है, तो उसकी पूरी जानकारी साझा की जाए और चुनाव कराने की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट विवरण दिया जाए। इसे अंतिम अवसर मानते हुए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

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राज्य चुनाव आयोग की तैयारी

मामले में पक्ष रखते हुए राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि 10 जून 2026 को ही मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है। आयोग पूरी तरह से चुनाव के लिए तैयार है, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से जरूरी व्यवस्थाएं न मिल पाने के कारण प्रक्रिया अटकी हुई है। इसके जवाब में सरकार के अपर स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग विभिन्न जिलों में जाकर आबादी का डेटा जुटाएगा, जिसके आधार पर आरक्षण तय होगा। इस प्रक्रिया में अभी और समय लगने की बात कही गई है।

याचिका और आगामी सुनवाई

यह याचिका अरविंद राठौर द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई है कि प्रशासकों को हटाकर जल्द से जल्द त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करवाए जाएं। उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को ही पूरा हो चुका है, जिसके बाद सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने अब इस पूरे प्रकरण पर अगली सुनवाई 13 जुलाई को दोपहर 2:00 बजे निर्धारित की है।

सवाल-जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों की नियुक्ति पर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती और यह डिवीजन बेंच के आदेशों का उल्लंघन है।
उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल कब समाप्त हुआ?
उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था।
क्या चुनाव प्रक्रिया में देरी का कारण बताया गया है?
राज्य सरकार का कहना है कि ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग का गठन किया गया है और जनसंख्या डेटा जुटाने में समय लग रहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को दोपहर 2:00 बजे होगी।
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