पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की दुखद खबर सामने आई है। रामपुरहाट स्थित अपने आवासीय कार्यालय में 5 बार के विधायक और पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। रविवार को हुई इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलने के तुरंत बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और मामले की व्यापक जांच शुरू कर दी है।
सुसाइड नोट में राजनीतिक सफर और आरोपों का जिक्र
घटनास्थल से पुलिस को एक पत्र भी मिला है जिसे सुसाइड नोट माना जा रहा है। इस पत्र में आशीष बनर्जी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन के विभिन्न चरणों का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति के दिनों से हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले इस वरिष्ठ नेता ने अपने पत्र में लिखा कि उन पर लगाए जा रहे वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं।
विकास प्राधिकरण में अधिकारों और भूमिका पर सफाई
सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने विशेष रूप से तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस विकास प्राधिकरण में उनके पास कोई वास्तविक प्रशासनिक या वित्तीय अधिकार नहीं थे। वे केवल आम बैठकों में हिस्सा लिया करते थे। उन्होंने न तो किसी विकास योजना को मंजूरी दी थी और न ही किसी वित्तीय चेक पर अपने हस्ताक्षर किए थे। उनका कहना था कि जब उनके पास कोई कार्यकारी शक्ति ही नहीं थी, तो भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता का सवाल ही पैदा नहीं होता।
पुलिस जांच और राजनीतिक पृष्ठभूमि
बीरभूम पुलिस के अनुसार मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की हर संभावित पहलू से गहन जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। आशीष बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के एक कद्दावर नेता थे। वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रहने के साथ-साथ ममता सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। 5 बार विधायक चुने जा चुके बनर्जी के इस तरह अचानक चले जाने से तृणमूल कांग्रेस और उनके समर्थकों में भारी शोक की लहर है।





















