अलवर की सुप्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील में सर्दियों की शुरुआत होते ही जलीय वन्यजीवों की सक्रियता में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। झील के किनारे चिन्हित क्रोकोडाइल पॉइंट पर इन दिनों छोटे और बड़े मगरमच्छों का पूरा समूह पानी से बाहर आकर खुले स्थानों पर आराम फरमा रहा है। पानी के ठीक बाहर पत्थरों, चट्टानों और जमीनी टीलों पर एक साथ करीब 10 से 15 मगरमच्छों को पसरे देख यहां भ्रमण पर आ रहे सैलानियों में भारी कौतूहल और रोमांच पैदा हो गया है। प्राकृतिक वातावरण के बीच इतने सारे विशालकाय जीवों को इतने करीब से धूप का आनंद लेते देखना पर्यटकों को लगातार अपनी ओर खींच रहा है।
सर्दियों में शरीर का तापमान संतुलित रखने की कवायद
तापमान में गिरावट आते ही सिलीसेढ़ झील के शांत तटों पर मगरमच्छों की ऐसी गतिविधियां बहुत आम हो जाती हैं। जीव विज्ञान के जानकारों का कहना है कि मगरमच्छ शीत-रक्त यानी ठंडे खून वाले जीव होते हैं, जिनका अपना आंतरिक शारीरिक तापमान नियंत्रित करने का कोई स्वचालित तंत्र नहीं होता। वे अपने शरीर की गर्मी को स्थिर रखने के लिए सीधे तौर पर बाहरी परिवेश और वातावरण पर निर्भर रहते हैं। जब झील का गहरा पानी अत्यधिक ठंडा हो जाता है, तब अपने रक्त संचार और शारीरिक तापमान को सामान्य बनाए रखने के उद्देश्य से ये जलीय जीव पानी की सतह से निकलकर जमीन पर आ जाते हैं और घंटों धूप सेंकते हैं।
क्रोकोडाइल पॉइंट पर उमड़ रही सैलानियों की भीड़
झील के इस विशेष हिस्से में एक साथ दर्जनों मगरमच्छों की मौजूदगी ने पर्यटकों के अनुभव को अविस्मरणीय बना दिया है। भ्रमण पर पहुंचे परिवार, युवा और प्रकृति प्रेमी काफी देर तक सुरक्षित दूरी पर खड़े होकर इस अनूठे नजारे को अपलक निहारते दिखाई दे रहे हैं। पत्थरों की छांव और धूप के बीच लेटे इन जीवों के शांत मगर रौबदार रूप को कई आगंतुक अपने स्मार्टफोन और कैमरों में सुरक्षित कैद कर रहे हैं। सामान्य दिनों में पानी के भीतर ओझल रहने वाले ये सरीसृप अब झील के दर्शनीय परिदृश्य का एक बड़ा आकर्षण बन चुके हैं।
प्राकृतिक व्यवहार को करीब से देखने का अवसर
वन्यजीव प्रेमियों और आम सैलानियों के लिए यह दृश्य किसी दुर्लभ अनुभव की तरह सामने आया है। सिलीसेढ़ झील के चारों ओर फैली प्राकृतिक छटा के बीच मगरमच्छों को उनके असली प्राकृतिक पर्यावास में विचरण करते देखना लोगों के उत्साह को दोगुना कर रहा है। जैसे-जैसे ठंड का असर और गहरा होगा, झील के तटीय पत्थरों और समतल किनारों पर इन जीवों का जमावड़ा इसी तरह निरंतर देखने को मिलने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन गतिविधियों को भी नया उत्साह मिल रहा है।


















