आधुनिक दौर में जब पूरा राजस्थान 3,42,239 वर्ग किलोमीटर के एकीकृत क्षेत्रफल, व्यवस्थित संभागों, जिलों, तहसीलों और गांवों के सुगठित प्रशासनिक ढांचे के रूप में दिखाई देता है, तब यह कल्पना करना भी रोचक है कि एकीकरण से पूर्व यह भू-भाग कैसा दिखता था। राजा-महाराजाओं के दौर में राजस्थान नाम का कोई एकल एकीकृत प्रशासनिक नक्शा अस्तित्व में नहीं था। उस दौर में यह समूचा क्षेत्र अलग-अलग रियासतों में विभाजित था, जहां प्रत्येक शासक अपने स्वतंत्र नक्शे और तय सीमाओं के आधार पर अपने भू-भाग पर शासन चलाते थे।
डिजिटल युग में सुरक्षित हैं रजवाड़ों के दुर्लभ दस्तावेज
गूगल और आधुनिक डिजिटल मैपिंग के दौर में आम लोगों को पुरानी 19 रियासतों के भू-भाग और सीमाओं की सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर ने इस ऐतिहासिक धरोहर को अत्यंत सुरक्षित तरीके से सहेज रखा है। अभिलेखागार में रजवाड़ों के दौर के शाही फरमान, प्रशासनिक आदेश, बहियां, पट्टे और प्रतीक चिह्न जैसे अनमोल दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। इन सभी बहुमूल्य दस्तावेजों का व्यापक स्तर पर डिजिटलीकरण भी कर लिया गया है। आमजन, शोधार्थी और इतिहास प्रेमी जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर समय-समय पर आयोजित होने वाली अभिलेख प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों में इन ऐतिहासिक मानचित्रों और दस्तावेजों को प्रत्यक्ष देख सकते हैं।
क्षेत्रफल के लिहाज से राजपूताना की सबसे बड़ी रियासतें
आजादी और एकीकरण से पहले राजपूताना कुल 19 रियासतों और 3 ठिकानों में बंटा हुआ था। भौगोलिक विस्तार और क्षेत्रफल की दृष्टि से उस कालखंड में मारवाड़, मेवाड़, जयपुर, कोटा, बीकानेर और अजमेर सबसे प्रमुख व विशाल रियासतों में शुमार थीं। राजस्थान राज्य अभिलेखागार के पास इन सभी प्रमुख रियासतों के भू-भाग, सीमांकन और भौगोलिक विस्तार को दर्शाने वाले मूल ऐतिहासिक नक्शे मौजूद हैं। नक्शों के साथ-साथ इन रियासतों के राजचिह्न, प्रतीक चिह्न और उनके आधिकारिक ध्येय वाक्य भी संरक्षित हैं। क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार और भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए ये मूल मानचित्र ऐतिहासिक सीमांकन को समझने का सबसे प्रामाणिक माध्यम हैं।
सैकड़ों वर्ष पूर्व भी सटीक और सुव्यवस्थित था सीमाओं का अंकन
वर्तमान समय में जिस तरह प्रत्येक जिले और प्रशासनिक इकाई की सीमाएं बिल्कुल स्पष्ट तय हैं, उसी प्रकार रियासत काल के दौरान भी मानचित्रण की व्यवस्था बेहद बारीक और व्यवस्थित थी। ऐतिहासिक नक्शों में एक रियासत की सीमा दूसरी रियासत से किस बिंदु पर मिलती थी, इसका विस्तृत और सूक्ष्म चित्रण मिलता है। आम लोगों की समझ और अध्ययन को सरल बनाने के लिए इन ऐतिहासिक नक्शों का अंग्रेजी में डिजिटलीकरण किया गया है। प्रत्येक रियासत के नक्शे के साथ उसका विशिष्ट प्रतीक चिह्न भी जुड़ा हुआ है, जिनका उपयोग उस दौर के राजा-महाराजा अपने खास राजकीय और प्रशासनिक दस्तावेजों पर मुहर या पहचान के तौर पर किया करते थे।



















