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आजादी से पहले रियासतों में बंटा राजपूताना कैसा दिखता था: बीकानेर अभिलेखागार ने संजोए ऐतिहासिक नक्शे और शाही दस्तावेजराजस्थान
5 अक्तू॰ 2026, 12:38 pm (48 मिनट पहले)· 0

आजादी से पहले रियासतों में बंटा राजपूताना कैसा दिखता था: बीकानेर अभिलेखागार ने संजोए ऐतिहासिक नक्शे और शाही दस्तावेज

एकीकरण से पहले राजस्थान की 19 रियासतों और 3 ठिकानों के ऐतिहासिक नक्शे, प्रतीक चिह्न और शाही फरमान बीकानेर स्थित राजस्थान राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित हैं, जिनका डिजिटलीकरण भी पूरा किया जा चुका है।

आधुनिक दौर में जब पूरा राजस्थान 3,42,239 वर्ग किलोमीटर के एकीकृत क्षेत्रफल, व्यवस्थित संभागों, जिलों, तहसीलों और गांवों के सुगठित प्रशासनिक ढांचे के रूप में दिखाई देता है, तब यह कल्पना करना भी रोचक है कि एकीकरण से पूर्व यह भू-भाग कैसा दिखता था। राजा-महाराजाओं के दौर में राजस्थान नाम का कोई एकल एकीकृत प्रशासनिक नक्शा अस्तित्व में नहीं था। उस दौर में यह समूचा क्षेत्र अलग-अलग रियासतों में विभाजित था, जहां प्रत्येक शासक अपने स्वतंत्र नक्शे और तय सीमाओं के आधार पर अपने भू-भाग पर शासन चलाते थे।

डिजिटल युग में सुरक्षित हैं रजवाड़ों के दुर्लभ दस्तावेज

गूगल और आधुनिक डिजिटल मैपिंग के दौर में आम लोगों को पुरानी 19 रियासतों के भू-भाग और सीमाओं की सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर ने इस ऐतिहासिक धरोहर को अत्यंत सुरक्षित तरीके से सहेज रखा है। अभिलेखागार में रजवाड़ों के दौर के शाही फरमान, प्रशासनिक आदेश, बहियां, पट्टे और प्रतीक चिह्न जैसे अनमोल दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। इन सभी बहुमूल्य दस्तावेजों का व्यापक स्तर पर डिजिटलीकरण भी कर लिया गया है। आमजन, शोधार्थी और इतिहास प्रेमी जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर समय-समय पर आयोजित होने वाली अभिलेख प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों में इन ऐतिहासिक मानचित्रों और दस्तावेजों को प्रत्यक्ष देख सकते हैं।

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क्षेत्रफल के लिहाज से राजपूताना की सबसे बड़ी रियासतें

आजादी और एकीकरण से पहले राजपूताना कुल 19 रियासतों और 3 ठिकानों में बंटा हुआ था। भौगोलिक विस्तार और क्षेत्रफल की दृष्टि से उस कालखंड में मारवाड़, मेवाड़, जयपुर, कोटा, बीकानेर और अजमेर सबसे प्रमुख व विशाल रियासतों में शुमार थीं। राजस्थान राज्य अभिलेखागार के पास इन सभी प्रमुख रियासतों के भू-भाग, सीमांकन और भौगोलिक विस्तार को दर्शाने वाले मूल ऐतिहासिक नक्शे मौजूद हैं। नक्शों के साथ-साथ इन रियासतों के राजचिह्न, प्रतीक चिह्न और उनके आधिकारिक ध्येय वाक्य भी संरक्षित हैं। क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार और भौगोलिक बदलावों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए ये मूल मानचित्र ऐतिहासिक सीमांकन को समझने का सबसे प्रामाणिक माध्यम हैं।

सैकड़ों वर्ष पूर्व भी सटीक और सुव्यवस्थित था सीमाओं का अंकन

वर्तमान समय में जिस तरह प्रत्येक जिले और प्रशासनिक इकाई की सीमाएं बिल्कुल स्पष्ट तय हैं, उसी प्रकार रियासत काल के दौरान भी मानचित्रण की व्यवस्था बेहद बारीक और व्यवस्थित थी। ऐतिहासिक नक्शों में एक रियासत की सीमा दूसरी रियासत से किस बिंदु पर मिलती थी, इसका विस्तृत और सूक्ष्म चित्रण मिलता है। आम लोगों की समझ और अध्ययन को सरल बनाने के लिए इन ऐतिहासिक नक्शों का अंग्रेजी में डिजिटलीकरण किया गया है। प्रत्येक रियासत के नक्शे के साथ उसका विशिष्ट प्रतीक चिह्न भी जुड़ा हुआ है, जिनका उपयोग उस दौर के राजा-महाराजा अपने खास राजकीय और प्रशासनिक दस्तावेजों पर मुहर या पहचान के तौर पर किया करते थे।

सवाल-जवाब

स्वतंत्रता से पहले राजस्थान में कुल कितनी रियासतें और ठिकाने थे?
आजादी से पहले राजस्थान का भू-भाग 19 रियासतों और 3 ठिकानों में बंटा हुआ था।
वर्तमान में एकीकृत राजस्थान का कुल क्षेत्रफल कितना है?
वर्तमान में पूरे एकीकृत राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है।
क्षेत्रफल के हिसाब से उस समय की सबसे बड़ी रियासतें कौन सी थीं?
क्षेत्रफल और नक्शे के लिहाज से मारवाड़, मेवाड़, जयपुर, कोटा, बीकानेर और अजमेर सबसे बड़ी रियासतें हुआ करती थीं।
रियासत काल के ऐतिहासिक नक्शे और दस्तावेज कहां सुरक्षित रखे गए हैं?
ये सभी ऐतिहासिक नक्शे, फरमान, पट्टे और प्रतीक चिह्न राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर में सुरक्षित रखे गए हैं।
आम लोग इन ऐतिहासिक नक्शों और दस्तावेजों को कहां देख सकते हैं?
लोग समय-समय पर जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाली अभिलेख प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों में इन्हें देख सकते हैं।
डिजिटलीकरण के दौरान इन नक्शों को किस भाषा में तैयार किया गया है?
आम लोगों की बेहतर समझ और अध्ययन की सुविधा के लिए इन नक्शों का डिजिटलीकरण अंग्रेजी में किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·2 मिनट पहले

पिछली बार बीकानेर अभिलेखागार गया था, तब वहाँ के पुराने नक्शे देखकर सचमुच हैरानी हुई थी कि राजाओं के वक्त सीमाएँ कितनी पक्की थीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

रोहन भाई, सच कहा आपने! बिना किसी आधुनिक तकनीक के उस दौर में वैसी सटीक सीमाएं तय करना वाक़ई हैरान करने वाला है।

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