राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी धाम आने वाले वर्षों में एक बिल्कुल नए और भव्य स्वरूप में नजर आने वाला है। देश और दुनिया भर से बाबा श्याम के दर्शन करने पहुंचने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद को देखते हुए मंदिर के विस्तार और नवनिर्माण की योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी इस परियोजना को अपने मौजूदा कार्यकाल के भीतर धरातल पर शुरू करने और एक तय समय सीमा में पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रही है। पिछले चार वर्षों से चल रही कागजी और तकनीकी तैयारियों के बाद अब पत्थरों की तराशी का काम जोर-शोर से चल रहा है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि अगले पांच साल के भीतर यह विशाल मंदिर पूरी तरह बनकर भक्तों के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।
चार साल की पूर्व तैयारी के बाद तराशी जा रहे हैं पत्थर
इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा अचानक नहीं बनी है, बल्कि पिछले लगभग चार सालों से इसके अलग-अलग चरणों पर गहन काम किया जा रहा था। वर्तमान मंदिर परिसर से कुछ ही दूरी पर चिन्हित जगह पर प्रस्तावित ढांचे के लिए पत्थरों पर बारीक नक्काशी का काम निरंतर जारी है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, मुख्य मंदिर के निर्माण की शुरुआती औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पत्थरों की जटिल और पारंपरिक नक्काशी में अभी थोड़ा वक्त और दरकार है, जिसके पूरा होते ही मुख्य स्थल पर निर्माण कार्य पूरी ताकत के साथ शुरू हो जाएगा। प्रबंध समिति का लक्ष्य है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में मंदिर की मुख्य संरचना अपनी भव्य आकृति लेने लगे और तय समय के भीतर समूचा परिसर आकार ले ले।
पारंपरिक नागर वास्तुकला और वर्तमान से दोगुना विशाल परिसर
नया श्याम मंदिर किसी भी तरह के आधुनिक कंक्रीट ढांचे की बजाय भारतीय स्थापत्य की ऐतिहासिक और पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है। नागर शैली की भव्यता को दर्शाने के लिए पूरे परिसर का निर्माण मकराना के उच्च श्रेणी के सफेद मार्बल और मजबूत ग्रेनाइट के मेल से किया जाएगा। क्षेत्रफल और भव्यता के मामले में यह प्रस्तावित परिसर मौजूदा मंदिर की तुलना में लगभग दोगुना बड़ा होगा। मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई करीब 133 फीट तय की गई है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। इस पूरे ढांचे का भार 93 बेहद कलात्मक और नक्काशीदार खंभों पर टिका होगा, जो मंदिर को प्राचीन राजप्रासादों और ऐतिहासिक देवालयों जैसा गौरवशाली रूप प्रदान करेंगे।
मूल प्रतिमा का स्थान रहेगा यथावत, गर्भगृह का होगा विस्तार
श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सदियों पुरानी परंपराओं का पूरा सम्मान करते हुए स्पष्ट किया गया है कि बाबा श्याम की पूज्य प्रतिमा के मूल स्वरूप या स्थान में रत्ती भर भी बदलाव नहीं किया जाएगा। प्रतिमा अपने तय स्थान पर वैसी ही प्रतिष्ठित रहेगी जैसी अब तक रही है। बदलाव केवल उसके आसपास के स्थापत्य में किया जा रहा है। नए नक्शे के मुताबिक गर्भगृह को पहले की तुलना में काफी ज्यादा चौड़ा, खुला और भव्य बनाया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में भक्त करीब 18 फीट की दूरी से बाबा श्याम की अलौकिक छवि के दर्शन करते हैं, लेकिन नया गर्भगृह और बड़ा आंगन तैयार होने के बाद वे कुछ और दूरी से भी बिना किसी रुकावट के अत्यंत सुगमता से दर्शन लाभ ले सकेंगे। प्रवेश द्वारों को भी काफी चौड़ा किया जा रहा है ताकि भारी भीड़ के दौरान श्रद्धालुओं को खड़े होने और कतारबद्ध चलने में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
मकराना मार्बल, भूकंपरोधी तकनीक और महाभारत कालीन नक्काशी
नए धाम को सदियों तक सुरक्षित और अडिग रखने के उद्देश्य से निर्माण तकनीक में मजबूती पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। पूरे ढांचे को विशेष रूप से भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें जमीन के नीचे की नींव और मुख्य आधार में उच्च गुणवत्ता वाले मजबूत ग्रेनाइट का इस्तेमाल होगा। मंदिर कमेटी के प्रतिनिधियों ने राजस्थान के कई प्रसिद्ध पत्थर क्षेत्रों का दौरा करने के बाद विश्वविख्यात मकराना के सफेद संगमरमर को इस पुनीत कार्य के लिए चुना। इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ टीम हर पत्थर के नमूने और उसकी गुणवत्ता की बारीकी से जांच करती है, जिसके बाद ही उसे कुशल कारीगरों के पास नक्काशी के लिए भेजा जाता है। मंदिर की दीवारों पर राधा-कृष्ण की मनोहारी लीलाओं और महाभारत के ऐतिहासिक प्रसंगों को सजीव रूप में उकेरा जाएगा। इसके अलावा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक मेटल डिटेक्टर और हाईटेक सीसीटीवी कैमरों का जाल भी बिछाया जाएगा।



















