राजस्थान के दौसा और दूदू जिलों में अंतिम संस्कार की जगह को लेकर गंभीर तनाव और टकराव के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। दौसा जिले के जीरोता खुर्द गांव में श्मशान घाट की जमीन को लेकर दो गुट आपस में भिड़ गए, जिसके चलते हुई हिंसक झड़प में दो लोग घायल हो गए। दूसरी तरफ, दूदू जिले में स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के परिसर में कथित तौर पर दाह संस्कार किए जाने के बाद गांव के लोगों और स्कूल प्रशासन में गहरा आक्रोश फैल गया है। दोनों ही घटनाओं में शव के क्रियाकर्म के लिए निर्धारित भूमि के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हुए हैं और प्रशासनिक मशीनरी मौके पर स्थिति संभालने में जुटी है।
जीरोता खुर्द में जमीन को लेकर आमने-सामने आए दो पक्ष
दौसा के जीरोता खुर्द गांव में नाथ समाज की एक महिला के देहांत के बाद उनके परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे थे। जब परिजन तय जगह पर शव को दफनाने या अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तभी गांव के दूसरे पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। दूसरे पक्ष के लोगों का स्पष्ट कहना था कि जिस स्थान पर यह प्रक्रिया की जा रही है, वह अधिकृत श्मशान भूमि नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई जो कुछ ही देर में गाली-गलौज और लाठी-डंडों से मारपीट में तब्दील हो गई।
इस खूनी संघर्ष के दौरान दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। हंगामे और तनाव के कारण मृतका का अंतिम संस्कार बीच में ही रुक गया। मृतका के परिजन इस बात पर अड़े रहे कि वे शव को उसी चिन्हित जमीन पर ही दफनाएंगे, जबकि दूसरा पक्ष उस जगह पर किसी भी तरह की अंत्येष्टि कराने का लगातार विरोध करता रहा। घटना की जानकारी मिलते ही सदर थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी फौरन मौके के लिए रवाना हुए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांति स्थापित करने तथा मामले का सर्वमान्य समाधान निकालने की कोशिशों में जुटे हैं।
दूदू के सरकारी मॉडल स्कूल में ताला तोड़कर क्रियाकर्म करने का आरोप
वहीं दूदू जिले से सामने आई दूसरी घटना ने शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के परिसर में कथित रूप से किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने अनधिकृत तरीके से स्कूल का ताला तोड़ा और फिर परिसर के भीतर घुसकर शव का दाह संस्कार कर दिया।
शैक्षणिक संस्थान की चारदीवारी के भीतर इस तरह की घटना की सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन दंग रह गया और ग्रामीणों में गहरा रोष फैल गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक सरकारी स्कूल परिसर में इस प्रकार की गतिविधि बेहद गंभीर और नियमों के खिलाफ है। ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन लोगों ने स्कूल संपत्ति का ताला तोड़कर नियमों का खुला उल्लंघन किया है, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।
श्मशान भूमि और सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ते विवाद
दौसा और दूदू की इन दोनों घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में श्मशान भूमि के सीमांकन और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दौसा में जहां दो पक्षों के बीच जमीन की पहचान को लेकर खूनी संघर्ष छिड़ा और शव का अंतिम संस्कार कई घंटों तक अटका रहा, वहीं दूदू में सरकारी स्कूल जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थल पर दाह संस्कार किए जाने से सामाजिक असंतोष की स्थिति बन गई है। दोनों ही मामलों में स्थानीय प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने और नियमों के उल्लंघन की जांच में लगा हुआ है।



















