बंगाली सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री और पूर्व सांसद रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें कोयल मल्लिक के नाम से जाना जाता है, आधिकारिक तौर पर कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बन गई हैं। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में आगामी राज्यसभा उपचुनाव के लिए रविवार को उनके नाम का ऐलान किया था। नए राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए उन्होंने राज्य की भलाई और जनसेवा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है।
राज्य में हुए बदलावों पर जताया भरोसा
पार्टी में प्रवेश करने के बाद कोयल मल्लिक ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए यह कदम सम्मान की बात है। राज्य में बीते कुछ महीनों के भीतर हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा का तरीका भली-भांति जानती हैं और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। अभिनेता रंजीत मल्लिक की पुत्री कोयल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में उनका मुख्य लक्ष्य लोगों के सरोकारों से जुड़ना है।
विधानसभा पहुंचकर दाखिल किया नामांकन पत्र
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई की महासचिव शशि अग्निहोत्री ने अभिनेत्री का दल में स्वागत किया और जानकारी दी कि वे उपचुनाव के लिए अपना पर्चा भरेंगी। इसके कुछ ही समय बाद कोयल मल्लिक पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचीं और राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक नामांकन पत्र जमा किया। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा,
"संसद के उच्च सदन की सदस्य बनना और लोगों के कल्याण के लिए काम करने का अवसर मिलना मेरे लिए सम्मान की बात होगी।"
पहले भी उच्च सदन की सदस्य रह चुकी हैं कोयल
कोयल मल्लिक का संसदीय राजनीति में यह पहला अनुभव नहीं है। इससे पहले वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा की सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने छह अप्रैल से 16 जुलाई तक बेहद संक्षिप्त अवधि के लिए उच्च सदन में अपनी सेवाएं दी थीं। विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब भाजपा की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद वे एक बार फिर दिल्ली की संसद में प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में हैं।
तीन राज्यों में 12 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान
आगामी 16 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों पर मतदान की प्रक्रिया पूरी होनी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास संख्याबल का स्पष्ट बहुमत है, जिससे इस सीट पर जीत की राह काफी आसान मानी जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी भाजपा की सरकारें हैं, जहां पार्टी ने अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने का सिलसिला शुरू कर दिया है।





















