जोधपुर जिले में कम बारिश के चलते प्राकृतिक जलस्रोतों पर गहरा संकट छाने लगा है। वर्षा की कमी के कारण क्षेत्र के तालाबों और नाड़ियों में जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिसका सीधा असर वहां मौजूद जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। पानी की लगातार घटती मात्रा ने तालाब में मौजूद मछलियों और अन्य जलीय प्राणियों के अस्तित्व के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इसी विकट स्थिति को ध्यान में रखते हुए पीपाड़ छापा तालाब में जलीय जीवों की रक्षा के लिए एक विशेष संरक्षण मुहिम की शुरुआत की गई है। इस जमीनी प्रयास का मुख्य लक्ष्य तालाब में तेजी से कम हो रहे पानी की भरपाई करना है, ताकि वहां सांसें गिन रही हजारों मछलियों और अन्य बेजुबान जीवों को असमय काल के गाल में समाने से बचाया जा सके।
तालाब में सौ टंकी पानी डालने का तय हुआ लक्ष्य
इस जीवन रक्षक अभियान के अंतर्गत पीपाड़ छापा तालाब में कुल 100 टंकी पानी डालने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुहिम में जुटे स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त मानसूनी बारिश न होने के कारण जलस्रोत पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच चुका है। पानी का स्तर गिरने से जलीय जीवों को जीवित रहने के लिए जरूरी गहराई और जीवनदायिनी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके दम घुटने का खतरा निरंतर बढ़ रहा है। इस तात्कालिक संकट के समाधान के लिए अब विभिन्न टैंकरों और पानी की टंकियों के जरिए बाहर से पानी लाकर सीधे तालाब में उड़ेला जा रहा है। यह पहल केवल जल संकट दूर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जीव दया और संकटग्रस्त जलीय जीवों के संरक्षण की मानवीय भावना का संदेश भी फैला रही है।
ग्रामीणों से एक-एक टंकी पानी समर्पित करने की अपील
अभियान को गति देने के लिए आयोजकों ने पीपाड़ के सभी ग्रामवासियों से बढ़-चढ़कर आगे आने और इस नेक काम में अपनी हिस्सेदारी निभाने का आह्वान किया है। क्षेत्रवासियों से आग्रह किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा, भावना और निजी सामर्थ्य के अनुसार कम से कम एक टंकी या एक टैंकर पानी इन बेजुबान जीवों के जीवन की रक्षा के लिए समर्पित करे। यदि बड़ी संख्या में ग्रामीण इस सामूहिक प्रयास का हिस्सा बनते हैं, तो गंभीर जल संकट से जूझ रहे हजारों जलीय प्राणियों को नया जीवनदान मिल सकता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि बेजुबान जीवों के प्रति मानव समाज की नैतिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी उजागर करता है।
जनभागीदारी से ही संभव होगा जलीय जीवों का संरक्षण
मुहिम से जुड़े जागरूक लोगों ने पीपाड़वासियों से आग्रह किया है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर पीपाड़ छापा तालाब की जमीनी हकीकत को देखें और वहां मौजूद हजारों मछलियों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में हर नागरिक का छोटा सा सहयोग भी बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। किसी एक व्यक्ति द्वारा पहुंचाई गई महज एक टंकी पानी भी किसी बेजुबान जीव को मरने से बचाकर नई जिंदगी दे सकती है। इसी वजह से सभी नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे इस जीव दया अभियान से जुड़ें, अपने स्तर पर पानी का प्रबंध कर तालाब में डलवाएं और जनभागीदारी की ताकत से इस संरक्षण अभियान को सफल बनाएं।



















