एंथ्रोपिक का बड़ा कदम, भारत में ही प्रोसेस होगा क्लॉड एआई का डेटाएनएमडीसी ने तय की 1 रुपये डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट, उत्पादन बढ़ा लेकिन बिक्री घटने से शेयर में नरमीजोधपुर के पीपाड़ छापा तालाब में गहराया जल संकट, हजारों मछलियों को बचाने के लिए शुरू हुआ सौ टंकी पानी का अभियानराजस्थान में अंतिम संस्कार की जमीन पर दो जिलों में हंगामा, दौसा में खूनी टकराव और दूदू के मॉडल स्कूल में दाह संस्कार का आरोपउत्तर प्रदेश से राजधानी तक फैला नशीले पदार्थों का सिंडिकेट ध्वस्त, चार तस्कर पकड़े गएघर पर पनीर निकालने के बाद बचे मट्ठा रूपी पानी को नाली में न बहाएं, रसोई से लेकर बागवानी तक काम आएंगे ये छह तरीकेमाइकल ब्रेसवेल ने बिग बैश लीग के लिए छोड़ा न्यूजीलैंड का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट, निक केली को 11 साल बाद मिली जगहबिना उपले या तंदूर के गैस चूल्हे पर कड़ाही में बनाएं खस्ता लिट्टी चोखा, जानें आसान तरीकागुरु नानक देव के ज्योति ज्योत दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने किया नमन, सत्य और सेवा के बताए मार्गब्राजील के चुनाव को भारत बता बैठे डोनाल्ड ट्रंप, सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद
अलवर के कॉम्प्लेक्स में सो रहे लोगों की चारपाई तले घुसा मगरमच्छ, सरिए से रेस्क्यूराजस्थान
5 अक्तू॰ 2026, 12:19 pm (38 मिनट पहले)· 0

अलवर के कॉम्प्लेक्स में सो रहे लोगों की चारपाई तले घुसा मगरमच्छ, सरिए से रेस्क्यू

अलवर के बख्तपुरा बावड़ी स्टैंड स्थित एक दुकान में सो रहे पांच लोगों की चारपाई के नीचे मगरमच्छ घुस आया, जिसे स्थानीय लोगों ने सरिए की मदद से बाहर निकालकर खेत में छोड़ा।

राजस्थान के अलवर जिले में सिलीसेढ़ झील से सटे इलाके में देर रात एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया, जब एक रिहायशी दुकान के भीतर आराम फरमा रहे लोगों के ठीक नीचे खूंखार जलीय शिकारी जा बैठा। बख्तपुरा बावड़ी स्टैंड के पास हाल ही में तैयार हुए छावड़ी कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में यह जलीय जीव जा घुसा। दिनभर की भागदौड़ के बाद गहरी नींद में सो रहे लोगों को इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि उनके पास ही मौत चुपचाप बैठी है। जैसे ही नजर नीचे पड़ी, वहां हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी लोग बाहर की तरफ दौड़े। राहत की बात यह रही कि समय रहते खतरे को भांप लिया गया और बिना किसी जनहानि के पूरे मामले को संभाल लिया गया।

गहरी नींद में थे पांच लोग, अचानक नजर पड़ते ही मच गई भगदड़

इस दुकान के भीतर उस वक्त कुल पांच लोग मौजूद थे, जिनके नाम चरण सिंह, जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि हैं। सभी लोग अपनी दिनचर्या पूरी करने के बाद थके-हारे चैन की नींद सो रहे थे। कमरे में शांत माहौल था और किसी को भी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। इसी बीच चरण सिंह की अचानक नींद टूटी और उनकी नजर अनायास ही चारपाई के ठीक नीचे फर्श पर चली गई। वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चारपाई के ठीक नीचे एक जिंदा और खतरनाक मगरमच्छ दुबक कर बैठा हुआ था।

ये भी पढ़ें

अपनी चारपाई के ठीक नीचे इतने बड़े शिकारी जीव को देखकर चरण सिंह सन्न रह गए। उन्होंने बिना कोई शोर किए तुरंत खुद को संभाला और कमरे में सो रहे बाकी साथियों जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि को चौकन्ना किया। जैसे ही बाकी लोगों को यह पता चला कि कमरे में मगरमच्छ मौजूद है, वहां तुरंत अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की हड़बड़ाहट में सभी लोग अपनी-अपनी चारपाई छोड़कर तेजी से दुकान के मुख्य दरवाजे से बाहर सड़क की ओर भागे। बाहर निकलकर जब उन्होंने शोर मचाया, तो आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए और देखते ही देखते वहां काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। हर कोई यह सोचकर स्तब्ध था कि बंद दुकान के भीतर यह खूंखार जीव कैसे दाखिल हो गया।

लोहे के सरिए से निकाला बाहर, सूझबूझ से पाया काबू

दुकान के भीतर मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद स्थानीय बाशिंदों ने हिम्मत जुटाई। लोगों ने सबसे पहले दुकान को चारों तरफ से सुरक्षित घेरे में ले लिया ताकि जीव किसी अन्य गली या घर में न घुस सके। इसके बाद कुछ साहसी ग्रामीणों ने लोहे के सरिए और अन्य बचाव उपकरणों का सहारा लिया। काफी देर तक चली मशक्कत और सावधानीपूर्वक किए गए प्रयासों के बाद मगरमच्छ को दुकान से बाहर खुले स्थान पर खदेड़ने में कामयाबी मिली।

दुकान से बाहर निकलने के बाद भी खतरा टला नहीं था, लेकिन स्थानीय लोगों ने सूझबूझ और धैर्य का परिचय देते हुए उस जीव को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए मगरमच्छ को बिना वक्त गंवाए पास के एक खुले और सुरक्षित खेत में ले जाकर छोड़ दिया गया। वहां से वह आसानी से अपने प्राकृतिक जल क्षेत्र की ओर लौट सकता था। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी व्यक्ति अथवा जीव को चोट नहीं आई, जिसके बाद स्थानीय नागरिकों और जीव संरक्षकों ने चैन की सांस ली।

सिलीसेढ़ झील और नजदीकी नदी से जुड़ा है रास्ता

इस पूरी घटना की जड़ें इलाके के भौगोलिक स्वरूप और जल प्रवाह से जुड़ी हुई हैं। स्थानीय निवासियों और शुरुआती पड़ताल के अनुसार यह दुकान प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील के पास स्थित है। दुकान से मात्र 100 मीटर की दूरी पर एक नदी बहती है, जिससे होकर सिलीसेढ़ झील का पानी आगे की ओर निकलता है। ऐसा माना जा रहा है कि पानी के तेज बहाव अथवा जलस्तर में बदलाव के कारण यह मगरमच्छ भटक गया और नदी के रास्ते होते हुए इंसानी आबादी तक जा पहुंचा। रात के सन्नाटे में रास्ता तलाशते हुए यह जीव सीधे नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स की दुकान में दाखिल हो गया था। इस वाकये ने पानी के बहाव क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

सवाल-जवाब

यह घटना अलवर में किस स्थान पर हुई?
यह घटना अलवर के प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील क्षेत्र के पास स्थित बख्तपुरा बावड़ी स्टैंड के नवनिर्मित छावड़ी कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में हुई।
घटना के समय दुकान के अंदर कितने और कौन-कौन से लोग सो रहे थे?
घटना के वक्त दुकान के भीतर कुल पांच लोग सो रहे थे, जिनके नाम चरण सिंह, जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि हैं।
मगरमच्छ पर सबसे पहले किसकी नजर पड़ी?
नींद खुलने के बाद चरण सिंह ने सबसे पहले अपनी चारपाई के नीचे मगरमच्छ को देखा और बाकी साथियों को सतर्क किया।
मगरमच्छ को दुकान से बाहर कैसे निकाला गया?
स्थानीय लोगों ने दुकान को सुरक्षित घेरकर लोहे के सरिए और अन्य साधनों की मदद से मगरमच्छ को बाहर खदेड़ा।
रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को कहां छोड़ा गया?
सुरक्षित पकड़ने के बाद मगरमच्छ को पास के ही एक खुले खेत में छोड़ दिया गया ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास की ओर लौट सके।
मगरमच्छ के दुकान तक पहुंचने का क्या कारण माना जा रहा है?
दुकान से 100 मीटर दूर बहने वाली नदी सिलीसेढ़ झील के पानी से जुड़ी है, जिससे भटककर यह जीव सीधे दुकान में दाखिल हो गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp