राजस्थान के अलवर जिले में सिलीसेढ़ झील से सटे इलाके में देर रात एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया, जब एक रिहायशी दुकान के भीतर आराम फरमा रहे लोगों के ठीक नीचे खूंखार जलीय शिकारी जा बैठा। बख्तपुरा बावड़ी स्टैंड के पास हाल ही में तैयार हुए छावड़ी कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में यह जलीय जीव जा घुसा। दिनभर की भागदौड़ के बाद गहरी नींद में सो रहे लोगों को इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि उनके पास ही मौत चुपचाप बैठी है। जैसे ही नजर नीचे पड़ी, वहां हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी लोग बाहर की तरफ दौड़े। राहत की बात यह रही कि समय रहते खतरे को भांप लिया गया और बिना किसी जनहानि के पूरे मामले को संभाल लिया गया।
गहरी नींद में थे पांच लोग, अचानक नजर पड़ते ही मच गई भगदड़
इस दुकान के भीतर उस वक्त कुल पांच लोग मौजूद थे, जिनके नाम चरण सिंह, जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि हैं। सभी लोग अपनी दिनचर्या पूरी करने के बाद थके-हारे चैन की नींद सो रहे थे। कमरे में शांत माहौल था और किसी को भी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। इसी बीच चरण सिंह की अचानक नींद टूटी और उनकी नजर अनायास ही चारपाई के ठीक नीचे फर्श पर चली गई। वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चारपाई के ठीक नीचे एक जिंदा और खतरनाक मगरमच्छ दुबक कर बैठा हुआ था।
अपनी चारपाई के ठीक नीचे इतने बड़े शिकारी जीव को देखकर चरण सिंह सन्न रह गए। उन्होंने बिना कोई शोर किए तुरंत खुद को संभाला और कमरे में सो रहे बाकी साथियों जगत सिंह, उमेश, राजा और ऋषि को चौकन्ना किया। जैसे ही बाकी लोगों को यह पता चला कि कमरे में मगरमच्छ मौजूद है, वहां तुरंत अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की हड़बड़ाहट में सभी लोग अपनी-अपनी चारपाई छोड़कर तेजी से दुकान के मुख्य दरवाजे से बाहर सड़क की ओर भागे। बाहर निकलकर जब उन्होंने शोर मचाया, तो आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए और देखते ही देखते वहां काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। हर कोई यह सोचकर स्तब्ध था कि बंद दुकान के भीतर यह खूंखार जीव कैसे दाखिल हो गया।
लोहे के सरिए से निकाला बाहर, सूझबूझ से पाया काबू
दुकान के भीतर मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद स्थानीय बाशिंदों ने हिम्मत जुटाई। लोगों ने सबसे पहले दुकान को चारों तरफ से सुरक्षित घेरे में ले लिया ताकि जीव किसी अन्य गली या घर में न घुस सके। इसके बाद कुछ साहसी ग्रामीणों ने लोहे के सरिए और अन्य बचाव उपकरणों का सहारा लिया। काफी देर तक चली मशक्कत और सावधानीपूर्वक किए गए प्रयासों के बाद मगरमच्छ को दुकान से बाहर खुले स्थान पर खदेड़ने में कामयाबी मिली।
दुकान से बाहर निकलने के बाद भी खतरा टला नहीं था, लेकिन स्थानीय लोगों ने सूझबूझ और धैर्य का परिचय देते हुए उस जीव को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए मगरमच्छ को बिना वक्त गंवाए पास के एक खुले और सुरक्षित खेत में ले जाकर छोड़ दिया गया। वहां से वह आसानी से अपने प्राकृतिक जल क्षेत्र की ओर लौट सकता था। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी व्यक्ति अथवा जीव को चोट नहीं आई, जिसके बाद स्थानीय नागरिकों और जीव संरक्षकों ने चैन की सांस ली।
सिलीसेढ़ झील और नजदीकी नदी से जुड़ा है रास्ता
इस पूरी घटना की जड़ें इलाके के भौगोलिक स्वरूप और जल प्रवाह से जुड़ी हुई हैं। स्थानीय निवासियों और शुरुआती पड़ताल के अनुसार यह दुकान प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील के पास स्थित है। दुकान से मात्र 100 मीटर की दूरी पर एक नदी बहती है, जिससे होकर सिलीसेढ़ झील का पानी आगे की ओर निकलता है। ऐसा माना जा रहा है कि पानी के तेज बहाव अथवा जलस्तर में बदलाव के कारण यह मगरमच्छ भटक गया और नदी के रास्ते होते हुए इंसानी आबादी तक जा पहुंचा। रात के सन्नाटे में रास्ता तलाशते हुए यह जीव सीधे नवनिर्मित कॉम्प्लेक्स की दुकान में दाखिल हो गया था। इस वाकये ने पानी के बहाव क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

















