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अजीतगढ़ में मासूम की सड़क हादसे में मौत के बाद युवक ने खुद ब्रेकर पर बनाई सफेद पट्टी, प्रशासन ने 15 दिन तक नहीं लिया था संज्ञानराजस्थान
9 अक्तू॰ 2026, 12:27 pm (34 मिनट पहले)· 0

अजीतगढ़ में मासूम की सड़क हादसे में मौत के बाद युवक ने खुद ब्रेकर पर बनाई सफेद पट्टी, प्रशासन ने 15 दिन तक नहीं लिया था संज्ञान

सीकर जिले के सांवलपुरा तंवरान में अंधेरे ब्रेकर के कारण हुए दर्दनाक हादसे में चार वर्षीय बच्चे की मौत के बाद, प्रशासन की निष्क्रियता देख ग्रामीण युवक हेमंत कटारिया ने खुद पहल कर ब्रेकर को दृश्यमान बनाया।

सीकर जिले के अजीतगढ़ इलाके में स्थित सांवलपुरा तंवरान गांव में एक दुखद सड़क हादसे के बाद मानवीय संवेदनशीलता और नागरिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण सामने आया है। गांव की सड़क पर बने एक अनदेखे स्पीड ब्रेकर की वजह से चार साल के एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि उसकी मां बुरी तरह जख्मी हो गई थी। इस दिल दहला देने वाली त्रासदी के बाद जब संबंधित विभाग और प्रशासन पंद्रह दिनों तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तब स्थानीय युवक हेमंत कटारिया ने किसी सरकारी सहायता की बाट जोहने के बजाय खुद कमान संभाली और सड़क पर बने ब्रेकर को चालकों के लिए दृश्यमान बना दिया।

सांवलपुरा तंवरान में कैसे हुआ था दर्दनाक हादसा

यह दुर्घटना उस समय घटी जब सांवलपुरा तंवरान की रहने वाली संगीता कटारिया देर शाम अपने चार साल के बेटे के साथ बस से उतरी थीं। दोनों अविनाशी गेट के समीप से पैदल अपने घर की तरफ बढ़ रहे थे। उसी दौरान नीमकाथाना की दिशा से तेजी से आई एक अनियंत्रित कार ने दोनों को जबरदस्त टक्कर मार दी। इस भीषण टक्कर में मासूम बालक की मौके के करीब ही जान चली गई, वहीं गंभीर चोटें आने से संगीता कटारिया लहूलुहान हो गईं। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर स्पीड ब्रेकर बना हुआ था, परंतु रात के अंधेरे में वहां कोई मार्किंग या निशान न होने से वाहन चालकों को सड़क का उभार बिल्कुल नजर नहीं आता था। इसी अनदेखे ब्रेकर के चलते यह जानलेवा हादसा हुआ, जिसने क्षेत्र में बदहाल सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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प्रशासन से गुहार और पंद्रह दिन की चुप्पी

इस हादसे ने गांव के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन हेमंत कटारिया ने शोक जताने के साथ-साथ इस जानलेवा खामी को दूर करने का संकल्प लिया। उन्होंने इस घटना से संबंधित समाचार की कतरनें अधिकारियों तक पहुंचाईं और प्रशासन से स्पीड ब्रेकर को सुधारने तथा चेतावनी संकेत लगाने की पुरजोर मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का हरसंभव प्रयास किया। इसके बावजूद पूरे पंद्रह दिनों तक किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई और सड़क उसी खतरनाक स्थिति में छोड़ दी गई।

सफेद रंग, रोलर और फावड़े से सुरक्षित बनाया रास्ता

सरकारी दफ्तरों से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर हेमंत ने और इंतजार करने के बजाय जमीनी स्तर पर कदम उठाने का निर्णय लिया। वे बाजार गए और अपने खर्च पर सफेद रंग और पेंटिंग रोलर खरीद लाए। इसके बाद उन्होंने अपने मित्रों को साथ लिया और मौके पर पहुंचकर फावड़े से पहले ब्रेकर और सड़क के आसपास जमा गंदगी और धूल को पूरी तरह साफ किया। सफाई करने के बाद उन्होंने पूरे स्पीड ब्रेकर पर मोटी सफेद पट्टियां खींच दीं। इस सफेद पट्टी के बनने से अब रात के घने अंधेरे में भी दूर से आने वाले वाहन चालकों को सड़क पर बना उभार साफ दिखाई देता है, जिससे वे ऐन मौके पर ब्रेक लगाने के बजाय पहले ही गति नियंत्रित कर सकते हैं।

नागरिक पहल और स्थायी समाधान की जरूरत

हेमंत कटारिया और उनके साथियों के इस कार्य की समूचे गांव में व्यापक प्रशंसा हो रही है। बिना किसी बजट, सरकारी टेंडर या अनुमति के इंतजार के युवकों ने संभावित दुर्घटनाओं को रोकने का ठोस प्रयास किया है। हालांकि, सड़क निर्माण और यातायात मानकों के अनुसार गति अवरोधकों पर थर्मोप्लास्टिक पेंट, रिफ्लेक्टर, कैट्स आई और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करना संबंधित लोक निर्माण विभाग का मूल दायित्व है। युवाओं द्वारा लगाई गई सफेद पेंट की पट्टी एक तात्कालिक और जीवन रक्षक कदम साबित हुई है, लेकिन स्थायी सुरक्षा के लिए आधिकारिक स्तर पर बुनियादी ढांचे का सुधार अत्यंत आवश्यक है। यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि समाज में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तंत्र के भरोसे बैठे रहने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।

सवाल-जवाब

सीकर के सांवलपुरा तंवरान में क्या हादसा हुआ था?
बस से उतरकर पैदल घर जा रही संगीता कटारिया और उनके चार वर्षीय बेटे को नीमकाथाना की ओर से आई कार ने टक्कर मार दी थी, जिसमें मासूम की जान चली गई और मां गंभीर घायल हो गईं।
हादसे के पीछे मुख्य कारण क्या माना गया?
सड़क पर बना स्पीड ब्रेकर अंधेरे में साफ दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके चलते वाहन चालक सड़क के उभार का सही अंदाजा नहीं लगा सका।
हेमंत कटारिया ने प्रशासन से क्या मांग की थी?
उन्होंने हादसे से जुड़े समाचार की कतरनें अधिकारियों को भेजकर और सोशल मीडिया के जरिए स्पीड ब्रेकर को दुरुस्त करने तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
प्रशासन द्वारा सुनवाई न करने पर हेमंत ने क्या कदम उठाया?
पंद्रह दिनों तक कोई कार्रवाई न होने पर हेमंत बाजार से सफेद रंग और रोलर लाए, फावड़े से ब्रेकर की सफाई की और साथियों के साथ मिलकर उस पर सफेद पट्टियां खींच दीं।
स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी बनाने से क्या फायदा होगा?
सफेद पट्टी बनने से रात के अंधेरे में भी दूर से आने वाले वाहन चालकों को ब्रेकर स्पष्ट दिखेगा और वे समय रहते गाड़ी की रफ्तार धीमी कर सकेंगे।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 मिनट पहले

एक बच्चे की जान जाने के बाद भी पंद्रह दिन तक प्रशासन की नींद नहीं खुली, यह देखकर बहुत दुख होता है। हेमंत ने तो अपनी तरफ से समझदारी दिखाई और रंग कर दिया, लेकिन उन लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी जो इतनी बड़ी घटना के बाद भी बैठे रहे?

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

करण भाई, अधिकारियों की लापरवाही अपनी जगह है, पर पंद्रह दिन का इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत थी? हेमंत ने जब खुद ही सब कर दिया, तो शायद पहले भी किया जा सकता था।

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