सीकर जिले के अजीतगढ़ इलाके में स्थित सांवलपुरा तंवरान गांव में एक दुखद सड़क हादसे के बाद मानवीय संवेदनशीलता और नागरिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण सामने आया है। गांव की सड़क पर बने एक अनदेखे स्पीड ब्रेकर की वजह से चार साल के एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि उसकी मां बुरी तरह जख्मी हो गई थी। इस दिल दहला देने वाली त्रासदी के बाद जब संबंधित विभाग और प्रशासन पंद्रह दिनों तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तब स्थानीय युवक हेमंत कटारिया ने किसी सरकारी सहायता की बाट जोहने के बजाय खुद कमान संभाली और सड़क पर बने ब्रेकर को चालकों के लिए दृश्यमान बना दिया।
सांवलपुरा तंवरान में कैसे हुआ था दर्दनाक हादसा
यह दुर्घटना उस समय घटी जब सांवलपुरा तंवरान की रहने वाली संगीता कटारिया देर शाम अपने चार साल के बेटे के साथ बस से उतरी थीं। दोनों अविनाशी गेट के समीप से पैदल अपने घर की तरफ बढ़ रहे थे। उसी दौरान नीमकाथाना की दिशा से तेजी से आई एक अनियंत्रित कार ने दोनों को जबरदस्त टक्कर मार दी। इस भीषण टक्कर में मासूम बालक की मौके के करीब ही जान चली गई, वहीं गंभीर चोटें आने से संगीता कटारिया लहूलुहान हो गईं। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर स्पीड ब्रेकर बना हुआ था, परंतु रात के अंधेरे में वहां कोई मार्किंग या निशान न होने से वाहन चालकों को सड़क का उभार बिल्कुल नजर नहीं आता था। इसी अनदेखे ब्रेकर के चलते यह जानलेवा हादसा हुआ, जिसने क्षेत्र में बदहाल सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
प्रशासन से गुहार और पंद्रह दिन की चुप्पी
इस हादसे ने गांव के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन हेमंत कटारिया ने शोक जताने के साथ-साथ इस जानलेवा खामी को दूर करने का संकल्प लिया। उन्होंने इस घटना से संबंधित समाचार की कतरनें अधिकारियों तक पहुंचाईं और प्रशासन से स्पीड ब्रेकर को सुधारने तथा चेतावनी संकेत लगाने की पुरजोर मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का हरसंभव प्रयास किया। इसके बावजूद पूरे पंद्रह दिनों तक किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई और सड़क उसी खतरनाक स्थिति में छोड़ दी गई।
सफेद रंग, रोलर और फावड़े से सुरक्षित बनाया रास्ता
सरकारी दफ्तरों से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर हेमंत ने और इंतजार करने के बजाय जमीनी स्तर पर कदम उठाने का निर्णय लिया। वे बाजार गए और अपने खर्च पर सफेद रंग और पेंटिंग रोलर खरीद लाए। इसके बाद उन्होंने अपने मित्रों को साथ लिया और मौके पर पहुंचकर फावड़े से पहले ब्रेकर और सड़क के आसपास जमा गंदगी और धूल को पूरी तरह साफ किया। सफाई करने के बाद उन्होंने पूरे स्पीड ब्रेकर पर मोटी सफेद पट्टियां खींच दीं। इस सफेद पट्टी के बनने से अब रात के घने अंधेरे में भी दूर से आने वाले वाहन चालकों को सड़क पर बना उभार साफ दिखाई देता है, जिससे वे ऐन मौके पर ब्रेक लगाने के बजाय पहले ही गति नियंत्रित कर सकते हैं।
नागरिक पहल और स्थायी समाधान की जरूरत
हेमंत कटारिया और उनके साथियों के इस कार्य की समूचे गांव में व्यापक प्रशंसा हो रही है। बिना किसी बजट, सरकारी टेंडर या अनुमति के इंतजार के युवकों ने संभावित दुर्घटनाओं को रोकने का ठोस प्रयास किया है। हालांकि, सड़क निर्माण और यातायात मानकों के अनुसार गति अवरोधकों पर थर्मोप्लास्टिक पेंट, रिफ्लेक्टर, कैट्स आई और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करना संबंधित लोक निर्माण विभाग का मूल दायित्व है। युवाओं द्वारा लगाई गई सफेद पेंट की पट्टी एक तात्कालिक और जीवन रक्षक कदम साबित हुई है, लेकिन स्थायी सुरक्षा के लिए आधिकारिक स्तर पर बुनियादी ढांचे का सुधार अत्यंत आवश्यक है। यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि समाज में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा तंत्र के भरोसे बैठे रहने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।



















