राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही ग्रामीण अंचलों में स्थानीय मुद्दों पर मंथन शुरू हो गया है। अजमेर जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर बसा लोहागल गांव आज भी कई प्राथमिक नागरिक सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब सात हजार से अधिक की सम्मिलित आबादी वाले लोहागल और मानगढ़ वाली क्षेत्र में चुनावी तारीखों की सुगबुगाहट के साथ ही चौपालों पर पुरानी व्यवस्था और अधूरे वादों का लेखा-जोखा निकाला जाने लगा है। निवासियों का साफ कहना है कि हर बार चुनाव आते ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस रह जाती है। इस बार मतदाता किसी खोखले वादे में आने के बजाय रोजमर्रा की जरूरतों और गांव की बुनियादी कमियों को दूर करने की क्षमता रखने वाले प्रतिनिधि को चुनने का मन बना रहे हैं।
सातों दिन पानी का सूखा और गंदगी से जूझते ग्रामीण
लोहागल के निवासियों का कहना है कि बीते पांच साल के कार्यकाल में उनके जीवन स्तर या गांव के बुनियादी ढांचे में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया। गांव की अंदरूनी गलियों में टूटी सड़कों और बदहाल नालियों का मंजर वर्षों पुराना है। जगह-जगह बजबजाती गंदगी के कारण लोगों का पैदल निकलना भी दूभर रहता है। विडंबना यह है कि अजमेर जैसे बड़े शहर के बिल्कुल पास होने के बाद भी यहां नियमित पेयजल आपूर्ति तक बहाल नहीं हो पाई है। घरों में नल का पानी आने के लिए लोगों को सात दिन से भी अधिक समय तक टकटकी लगानी पड़ती है। जब तक जलापूर्ति का अगला दिन आता है, तब तक दैनिक जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती बन जाता है।
स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक जलस्रोतों की अनदेखी भी ग्रामीणों को अखर रही है। गांव के पारंपरिक तालाब की देखरेख न होने से वह जंगली बबूल की झाड़ियों और कचरे के ढेर से पट चुका है। ग्रामीणों का दर्द है कि उनके क्षेत्र से नेशनल अथवा स्टेट हाईवे तो निकाल दिया गया, लेकिन इसके अलावा गांव के भीतर कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं पहुंचा। हाईवे निकलने मात्र से गांव के आम बाशिंदों के व्यक्तिगत जीवन की बुनियादी मुश्किलें खत्म नहीं हो सकतीं। आने वाले चुनाव में जो भी प्रतिनिधि मैदान में उतरेगा, उसे सबसे पहले नियमित जलापूर्ति, व्यवस्थित नालियों, पक्की गलियों और साफ-सफाई के ठोस प्रबंध का लिखित या मौखिक भरोसा देना होगा।
दो गांवों के बीच बंटा नेतृत्व और विकास की असमान गति
पंचायती व्यवस्था के तहत लोहागल और मानगढ़ वाली, इन दोनों गांवों को मिलाकर एक ही ग्राम पंचायत बनती है और दोनों के लिए साझा सरपंच चुना जाता है। स्थानीय निवासियों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि दो बस्तियों का प्रतिनिधित्व एक ही पद पर होने की वजह से समस्याओं की सुनवाई में असंतुलन पैदा होता है। दोनों इलाकों की प्राथमिकताओं में तालमेल न बैठ पाने से लोहागल की जमीनी दिक्कतों को अक्सर पर्याप्त तवज्जो नहीं मिल पाती। ग्रामीणों का आग्रह है कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय पक्षपात रहित नजरिया अपनाया जाए, ताकि दोनों गांवों को बराबर स्तर पर संसाधन और बजट मिल सके।
हालांकि चर्चाओं के दौरान कुछ बुजुर्गों और ग्रामीणों का यह पक्ष भी सामने आता है कि बीते 10 से 15 वर्षों के समयकाल पर नजर डालें तो पहले के पुराने दौर के मुकाबले कुछ सुधार जरूर दिखाई देता है। फिर भी, बढ़ती आबादी और आधुनिक समय की जरूरतों को देखते हुए अभी भी बहुत सा निर्माण और सुधार कार्य बाकी है। ग्रामीण अब एक ऐसा जागरूक और सक्रिय नेतृत्व चाहते हैं जो पंचायत की बैठकों में केवल औपचारिकता न निभाए, बल्कि गांव की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर प्रशासनिक स्तर पर उनकी पैरवी कर सके।
युवाओं के लिए खेल मैदान और बेहतर शैक्षणिक माहौल की मांग
गांव की चौपालों पर इस बार सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़े मसले भी पूरी मजबूती से उठाए जा रहे हैं। गांव में बच्चों और युवाओं के खेलने-कूदने के लिए कोई तय खेल मैदान या बुनियादी खेल ढांचा नहीं है। प्रतिभा होने के बावजूद खुली जगह और प्रशिक्षण के अभाव में नई पीढ़ी खेल गतिविधियों में पिछड़ रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए पंचायत स्तर पर उपयुक्त खेल मैदान तैयार किया जाना बेहद आवश्यक है।
इसके अलावा गांव के स्थानीय सरकारी स्कूलों की स्थिति को सुधारने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक सुविधाएं और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए दूर न भटकना पड़े। पंचायती राज चुनाव की चौपालों में अब पानी, कचरा निस्तारण, नाली, सड़क, आधुनिक स्कूल और खेल मैदान ही मुख्य पैमाने बन चुके हैं। गांव के मतदाता इन सभी मानकों की कसौटी पर परखकर ही किसी उम्मीदवार को अपना समर्थन देने का संकल्प ले रहे हैं, जिससे लोहागल को वास्तव में एक विकसित और आत्मनिर्भर गांव बनाया जा सके।

















