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असम में तैनात चित्तौड़गढ़ के जवान जितेंद्र सिंह चौहान का निधन, पदोन्नति से महज 25 दिन पहले तोड़ा दमराजस्थान
9 अक्तू॰ 2026, 12:26 pm (42 मिनट पहले)· 0

असम में तैनात चित्तौड़गढ़ के जवान जितेंद्र सिंह चौहान का निधन, पदोन्नति से महज 25 दिन पहले तोड़ा दम

भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी में तैनात आरटी हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान का असम में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार तहसील स्थित सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव के जांबाज सैनिक जितेंद्र सिंह चौहान का असम में सैन्य ड्यूटी के दौरान अचानक निधन हो गया। भारतीय सेना में आरटी हवलदार पद पर सेवाएं दे रहे चौहान की अचानक सांसें थमने की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव समेत पूरे इलाके में गहरा शोक फैल गया। अपने सपूत के अंतिम दर्शन करने और श्रद्धांजलि देने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग और युवा एकत्र हो गए। जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, तो ग्रामीणों ने गगनभेदी नारों के साथ उनका स्वागत किया और माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा।

ड्यूटी पर अचानक गिरा ऑक्सीजन स्तर, दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

जितेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी यूनिट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। असम में तैनाती के दौरान अचानक उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे चला गया। इसके तुरंत बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। असम में स्थानीय स्तर पर सभी जरूरी कागजी प्रक्रियाओं और पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुरुवार को उनके पार्थिव शरीर को राजस्थान के लिए रवाना किया गया।

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राजस्थान पहुंचने पर नसीराबाद छावनी से आई भारतीय सेना की विशेष टुकड़ी पार्थिव देह को चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल लेकर पहुंची। वहां आवश्यक प्रक्रियाओं के पश्चात पार्थिव देह को उनके गृह गांव सूरत सिंह जी का खेड़ा पहुंचाया गया, जहां परिवार और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

विशाल तिरंगा यात्रा के बीच सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

गांव में पार्थिव देह के पहुंचते ही युवाओं और ग्रामीणों ने अपने लाडले जवान के सम्मान में एक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे जनसैलाब ने भारत माता की जय और जितेंद्र सिंह अमर रहें के नारों से पूरे मार्ग को गुंजायमान कर दिया। हर किसी की आंखें नम थीं और समूचा वातावरण गमगीन हो गया था।

इसके बाद गांव के श्मशान स्थल पर भारतीय सेना की टुकड़ी ने पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। सेना के जवानों ने विधिवत शस्त्र झुकाए और मातमी बिगुल की धुन बजाकर अपने साथी जवान को अंतिम सलामी पेश की। परिजनों और ग्रामीणों ने अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

22 साल से अधिक समय तक दी सेवाएं, 1 नवंबर को होना था प्रमोशन

जितेंद्र सिंह चौहान जून 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने 22 साल और 4 महीने के अपने लंबे सेवाकाल में देश की दुर्गम सीमाओं और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में समर्पण भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। अपने पूरे सैन्य जीवन में उन्होंने अनुशासन और राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

इस दुखद घटना का सबसे भावुक पहलू यह है कि आगामी 1 नवंबर को उनकी पदोन्नति होने वाली थी। वह हवलदार के पद से पदोन्नत होकर नायब सूबेदार बनने वाले थे, जिसको लेकर परिवार और परिचितों में उत्साह का माहौल था। घर में खुशियों के आगमन की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से ठीक 25 दिन पहले ही नियति ने उनके जीवन की डोर काट दी।

गांव के युवाओं को सेना में जाने के लिए लगातार करते थे प्रेरित

ग्रामीणों और परिचितों का कहना है कि जितेंद्र सिंह जब भी अवकाश पर अपने गांव आते थे, तो गांव के युवाओं के साथ समय बिताते थे। वह युवाओं को शारीरिक व्यायाम और दौड़ की तैयारी करने के गुर सिखाते थे और उन्हें सेना में शामिल होकर देश सेवा करने के लिए लगातार प्रेरित करते रहते थे। उनके असमय चले जाने से उन नौजवानों ने अपना सच्चा मार्गदर्शक खो दिया है। सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव और गंगरार क्षेत्र में उनके समर्पण, सादगी और युवाओं को आगे बढ़ाने की लगन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

सवाल-जवाब

जितेंद्र सिंह चौहान किस सैन्य यूनिट में पदस्थ थे?
जितेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी यूनिट में आरटी हवलदार के पद पर सेवाएं दे रहे थे।
उनका निधन किस कारण से हुआ?
ड्यूटी के दौरान अचानक उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया था, जिसके बाद दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
जितेंद्र सिंह चौहान की सेना में कुल सेवा अवधि कितनी थी?
वह जून 2004 में सेना में भर्ती हुए थे और उन्होंने 22 साल और 4 महीने तक देश की सेवा की।
उनका प्रमोशन कब होने वाला था?
उनका प्रमोशन 1 नवंबर को होने वाला था, जिसमें वह हवलदार से पदोन्नत होकर नायब सूबेदार बनने वाले थे।
उनका पैतृक गांव कौन सा था?
वह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की गंगरार तहसील के सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव के निवासी थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

परसों ही जब मैं फौज में अपने एक परिचित से बात कर रहा था, तो उसने भी यही बताया था कि असम और पूर्वोत्तर की दुर्गम पहाड़ियों में तैनात जवानों को कैसी-कैसी सांस की और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रमोशन से ठीक पच्चीस दिन पहले ऐसा होना वाकई दिल दहला देने वाला है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 मिनट पहले

रोहन भाई, पूर्वोत्तर की इस कठिन ड्यूटी में जवानों का यूं अचानक स्वास्थ्य बिगड़ना वाकई बहुत डरावना है।

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